जीवन में सुसंस्कार परमावश्यक- आर्यिका विशिष्टश्री माताजी
ब्यूरो चीफ : भगवत सिंह लोधी
दमोह । पू. गणिनी आर्यिका विशिष्टश्री माताजी श्री दि़ जैन नन्हें मंदिर में विराजमान प.पू. भारत गौरव गणाचार्य श्री विरागसागर जी महामुनिराज की परम प्रभावक सुयोग्य शिष्या पू. गणिनी श्रमणी आर्यिका विशिष्टश्री माताजी संसध 15 पिच्छी के पावन सानिध्य में निरंतर धर्मगंगा प्रवाहमान हैं पू. माताजी ने रविवार को उपस्थित जनसमुदाय को सम्बोधित करते हुए कहा जीवन में संस्कारों की बहुत आवश्यकता हुआ करती है यदि माता-पिता अपने बच्चों के लिये बचपन से ही सुसंस्कार देते है, साधु सतों के पास ले जाते है तो वे बच्चे बड़े होकर गलत मार्ग में नहीं जाते। जो माता पिता बच्चों को मंदिर के दर्शन कराने ले जाते है। वे बच्चे बड़े होकर अपने बूढ़े मात पिता की सेवा तथा मन्दिर के दर्शन कराते है, वे बच्चे फिर बिगड़ते नही है। बिगड़ते तो वह बच्चे है जिनके माता-पिता स्वयं सुसंस्कारी नहीं होते पिता स्वंय व्यसनी हो, माता यदि स्वंय फैसलेबल हो तो ऐसे माता-पिता अपने बच्चों को क्या संस्कार दे पायेंगे। वे यदि अपने बच्चों को सुसंस्कार देने का प्रयास भी करेंगे तो बच्चे सहज की कह देंगें कि आप स्वयं भी तो ऐसा करते है। अतः हर माता पिता को चाहिए कि अपने को इतना अच्छा सुसंस्कारित जीवनयापन करेंगे तो बच्चे स्वतः ही सुसंस्कारी होगें क्योंकि आज के बच्चे सिखाने से कम दिखाने से ज्यादा सीखते है। आगामी 2 मई का पू. माताजी के सानिध्य में नन्हें मन्दिर प्रांगण में प.पू. गणाचार्य गुरूवर का षष्ठिपूर्ति जन्म जयन्ती 61वी महामहोत्सव बड़े धूमधाम से मनाया जायेगा जिसके लिये समस्त दमोहवासी उत्साहित है।

