अक्षय नवमी 02 नवंबर को मनाई जाएगी: ज्योतिषाचार्य हरिकेश शास्त्री

ब्यूरो चीफ : शब्बीर अहमद
बेगमगंज । कार्तिक शुक्ल नवमी तिथि को आंवला नवमी मनाई जाती है इसे अक्षय नवमी भी कहते हैं ऐसा माना जाता है कि इस दिन से द्वापर युग आरम्भ हुआ था, इसी दिन कृष्ण ने कंस का वध भी किया था और धर्म की स्थापना की थी आंवले को अमरता का फल भी कहा जाता है। इस दिन आंवले का सेवन करने से सेहत का वरदान मिलता है। आंवले के वृक्ष के नीचे भोजन करने से उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। इसलिए इस दिन व्रत, पूजा, तर्पण और दान का विशेष महत्व होता है। इसी दिन से वृंदावन की परिक्रमा भी प्रारंभ होती है। इस माह में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा और आंवले के पेड़ की पूजा करने का विधान है। पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार मां लक्ष्मी भ्रमण करने के लिए पृथ्वी लोक पर आईं। रास्ते में उन्हें भगवान विष्णु और शिव की पूजा एक साथ करने की इच्छा हुई। माता लक्ष्मी ने विचार किया कि एक साथ विष्णु एवं शिव की पूजा कैसे हो सकती है। तुलसी भगवान विष्णु को प्रिय होती है और बेलपत्र भगवान शिव को। मां लक्ष्मी को ख्याल आया कि तुलसी और बेल का गुण एक साथ आंवले के पेड़ में ही पाया जाता है ऐसे में आंवले के वृक्ष को विष्णु और शिव का प्रतीक चिन्ह मानकर मां लक्ष्मी ने आंवले की वृक्ष की पूजा की। पूजा से प्रसन्न होकर विष्णु और शिव प्रकट हुए। लक्ष्मी माता ने आंवले के वृक्ष के नीचे भोजन बनाकर विष्णु और भगवान शिव को भोजन करवाया। इसके बाद स्वयं भोजन किया, जिस दिन मां लक्ष्मी ने शिव और विष्णु की पूजा की थी, उस दिन कार्तिक शुक्ल नवमी तिथि थी। तभी से कार्तिक शुक्ल की नवमी तिथि को आंवला नवमी या अक्षय नवमी के रूप में मनाया जाने लगा आंवला वृक्ष के मूल में भगवान विष्णु, ऊपर ब्रह्मा, स्कंद में रुद्र, शाखाओं में मुनिगण, पत्तों में वसु, फूलों में मरुद्गण और फलों में प्रजापति का वास होता है। ऐसे में आंवला नवमी के दिन आंवले के पेड़ की पूजा करने से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं। साथ ही इसकी पूजा करने वाले व्यक्ति के जीवन से धन, विवाह, संतान, दांपत्य जीवन से संबंधित समस्या खत्म हो जाती है। मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए अक्षय नवमी का दिन सबसे उत्तम माना जाता है।
अक्षय नवमी का शुभ मुहूर्त के बारे में हरिकेश शास्त्री ने बताया कि इस साल कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि 2 नवंबर को रात 10बजकर 38 मिनट तक रहेगी अक्षय नवमी पर पूजा का शुभ मुहूर्त 2 नवंबर को सुबह 06 बजकर 20 मिनट से लेकर दोपहर 9 बजकर 10 मिनट तक रहेगा, दूसरा मुहूर्त 10 बजकर 30 मिनिट से 12 बजकर 05 मिनिट तक, तीसरा मुहूर्त 2 बजकर 55 मिनिट से 05 बजकर 35 मिनिट तक रहेगा ।
अक्षय नवमी की पूजा विधि :- आंवला नवमी के दिन स्नान करके पूजा करने का संकल्प लें. प्रार्थना करें कि आंवले की पूजा से आपको सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य का वरदान मिले. इसके बाद आंवले के वृक्ष के निकट पूर्व की ओर मुख करके जल अर्पित करें. वृक्ष की सात बार परिक्रमा करें और कपूर से आरती करें, वृक्ष के नीचे निर्धनों को भोजन कराएं और स्वयं भी भोजन करें, आंवले का वृक्ष घर में लगाना वास्तु की दृष्टि से भी शुभ माना जाता है, इस दिन आंवले के पेड़ पर हल्दी का स्वस्तिक बनाएं. इससे घर में सुख-समृद्धि बनी रहेगी, ऐसा कहते हैं कि आंवले के बीजों को हरे कपड़े में बांधकर अपने पास रखने से आर्थिक लाभ होता है, इस पोटली को आप तिजोरी या धन के स्थान पर भी रख सकते है।



