कृषिमध्य प्रदेश

किसानों को अधिक रुपए खर्च कर मशीनों का लेना पड़ रहा सहारा

धान की फसल तैयार, कटाई के लिए नहीं मिल रहे मजदूर
सिलवानी।
खेतों में कटाई के लिए धान की फसल खड़ी है, लेकिन कटाई और मिसाई के लिए किसानों को मजदूर नहीं मिल रहे हैं। मशीनों से धान की कटाई और मिसाई का कार्य महंगा होता जा रहा है। मजदूर नहीं मिलने और मशीनों से लागत अधिक आने के चलते किसान परेशान है। मजदूर एक दिन के 400 से 500 रुपए लेता है। वहीं मशीन एक बीघा के 15 सौ से 17 सौ रुपए लेती है।
साधन संपन्न किसानों ने धान फसल की कटाई और मिसाई का कार्य शुरू कर दिया है। मजदूर नहीं मिलने के कारण किसानों को मशीन का सहारा लेना पड़ रहा है। तहसील में अधिकांश किसान धान की मिसाई के लिए हार्वेस्टर और थ्रेसर मशीन का उपयोग कर रहे हैं वहीं कटाई के लिए रिपर का उपयोग कर रहे हैं।
अधिक आती है लागत
कृषक राधेश्याम, करतार सिंह आदि ने बताया कि मजदूरों की कमी के चलते पारंपरिक पद्धति को छोड़ किसान आधुनिक तकनीकी को तेजी से अपना रहे हैं। लेकिन किसानों को इस कार्य में लागत अधिक आ रही है। पारंपरिक पद्धति में मेहनत और समय अधिक लगता है।
मशीन से कुछ ही घंटों में हो रहा काम
किसानों ने बताया कि मजदूरों की कमी के चलते अब पारंपरिक पद्वति से धान की कटाई व मिसाई करना मुश्किल होने लगा है। एक तो मजदूर मिलते नहीं है और मिल भी गए तो उनके दाम अधिक हैं। पारंपरिक पद्वति से धान मिसाई के कार्य में करीब चार से पांच घंटे का समय लगता है। जबकि मशीन द्वारा घंटों का कार्य मिनटों में हो जाता है। किसान गोपाल सिंह ने बताया कि मशीनों से धान की कटाई और मिसाई का कार्य महंगा होने के कारण वे परिवार के सदस्यों के साथ ही कार्य कर रहे हैं। यदि मशीन का उपयोग करते हैं तो उन्हें लागत अधिक लग जाएगी और फायदा कम होगा।
खेतों में तैयार खड़ी है फसल
वर्तमान में खेतों में धान की फसल खड़ी है। ऐसे में समय पर धान की कटाई नहीं हुई तो किसानों को काफी नुकसान हो सकता है। दरअसल बारिश के चलते रबी सीजन खेती के लिए कार्य पिछड़ रहा है। इसके अलावा धान की फसल में बीमारियों का प्रकोप दिखने लगा है। यदि अभी बारिश हो जाती है, तो ऐसे में किसानों की फसल पूरी तरह से खराब हो जाएगी।

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