
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
मंगलवार 24 मार्च 2026
हनुमान जी का मंत्र : हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् ।
🌌 दिन (वार) – मंगलवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से उम्र कम होती है। अत: इस दिन बाल और दाढ़ी नहीं कटवाना चाहिए ।
*मंगलवार को हनुमान जी की पूजा और व्रत करने से हनुमान जी प्रसन्न होते है। मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा एवं सुन्दर काण्ड का पाठ करना चाहिए। *मंगलवार को यथासंभव मंदिर में हनुमान जी के दर्शन करके उन्हें लाल गुलाब, इत्र अर्पित करके बूंदी / लाल पेड़े या गुड़ चने का प्रशाद चढ़ाएं । हनुमान जी की पूजा से भूत-प्रेत, नज़र की बाधा से बचाव होता है, शत्रु परास्त होते है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2026 विक्रम संवत : 2083 सिद्धार्थी विक्रम : 1969 शर्वरी
🌐 रौद्र संवत्सर विक्रम संवत 2083,
✡️ शक संवत 1948 (पराभव संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2082 पिङ्गल
☸️ काली सम्वत् 5127
🕉️ संवत्सर (बृहस्पति) पराभव
☣️ आयन – उत्तरायण
☂️ ऋतु – सौर बसंत ऋतु
☀️ मास – चैत्र मास
🌗 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – मंगलवार चैत्र माह के शुक्ल पक्ष षष्ठी तिथि 04:08 PM तक उपरांत सप्तमी
🖍️ तिथी स्वामी – षष्ठी के देता हैं कार्तिकेय। इस तिथि में कार्तिकेय की पूजा करने से मनुष्य श्रेष्ठ मेधावी, रूपवान, दीर्घायु और कीर्ति को बढ़ाने वाला हो जाता है। यह यशप्रदा अर्थात सिद्धि देने वाली तिथि हैं।
💫 नक्षत्र- नक्षत्र रोहिणी 07:04 PM तक उपरांत म्रृगशीर्षा
🪐 नक्षत्र स्वामी – रोहिणी नक्षत्र के स्वामी चंद्रमा (विंशोत्तरी दशा स्वामी) हैं। जिसका राशि स्वामी शुक्र है। रोहिणी नक्षत्र के अधिष्ठाता देवता ब्रह्मा (प्रजापति) हैं।
⚜️ योग – प्रीति योग 09:07 AM तक, उसके बाद आयुष्मान योग 06:01 AM तक, उसके बाद सौभाग्य योग
⚡ प्रथम करण : तैतिल 04:08 PM तक
✨ द्वितीय करण : गर 02:57 AM तक, बाद वणिज
🔥 गुलिक काल : मंगलवार का गुलिक दोपहर 12:06 से 01:26 बजे तक।
🤖 राहुकाल (अशुभ) – दोपहर 15:19 बजे से 16:41 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
⚜️ दिशाशूल – मंगलवार को उत्तर दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो कोई गुड़ खाकर यात्रा कर सकते है।
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 06:07:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 06:11:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : सुबह को 04:46 ए एम से सुबह 05:34 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : सुबह को 05:10 ए एम से सुबह 06:21 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : दोपहर को 12:03 पी एम से 12:52 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : दोपहर को 02:30 पी एम से दोपहर 03:19 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : शाम को 06:33 पी एम से शाम 06:57 पी एम
🌃 सायाह्न सन्ध्या : शाम को 06:34 पी एम से शाम 07:45 पी एम
💧 अमृत काल : शाम को 04:06 पी एम से शाम 05:35 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : दोपहर को 12:03 ए एम, मार्च 25 से 12:50 ए एम, मार्च 25
🌸 द्विपुष्कर योग : शाम को 07:04 पी एम से सुबह 06:20 ए एम, मार्च 25
❄️ रवि योग : सुबह को 06:21 ए एम से शाम 07:04 पी एम
🚓 यात्रा शकुन-दलिया का सेवन कर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ अं अंगारकाय नम:।
💁🏻♀️ आज का उपाय-देवी मन्दिर में सवाकिलो अनार चढ़ाएं।
🌴 वनस्पति तंत्र उपाय- खैर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ *पर्व एवं त्यौहार – यमुना छठ/ रोहिणी व्रत/ स्कन्द षष्ठी/ द्विपुष्कर योग/ रवि योग/ आडल योग /विडाल योग/ बसंती पूजा प्रारंभ (बंगाल)/ मुरुगन षष्ठी व्रत, विश्व क्षय रोग दिवस, राष्ट्रीय कॉकटेल दिवस, राष्ट्रीय चीज़स्टेक दिवस, राष्ट्रीय चॉकलेट से ढके किशमिश दिवस, भारत के प्रसिद्ध साहित्यकार हरिभाऊ उपाध्याय जन्म दिवस, आंध्र प्रदेश के प्रसिद्ध उद्योगपति गल्ला जयदेव जन्म दिवस, अभिनेता इमरान हाशमी जन्म दिवस, भारतीय हॉकी खिलाड़ी एड्रियन डिसूजा जन्म दिवस, प्रसिद्ध भारतीय अधिवक्ता सत्येन्द्र प्रसन्न सिन्हा जन्म दिवस, इंग्लैण्ड की महारानी महारानी एलिज़ाबेथ स्मृति दिवस ✍🏼 तिथि विशेष – षष्ठी तिथि को तैल कर्म अर्थात शरीर में तेल मालिश करना या करवाना एवं सप्तमी तिथि को आँवला खाना तथा दान करना भी वर्ज्य बताया गया है। इस षष्ठी तिथि के स्वामी भगवान शिव के पुत्र स्वामी कार्तिकेय जी को बताया गया हैं। यह षष्ठी तिथि नन्दा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह षष्ठी तिथि शुक्ल एवं कृष्ण दोनों पक्षों में मध्यम फलदायीनी मानी जाती है। इस तिथि में स्वामी कार्तिकेय जी के पूजन से सभी कामनाओं की पूर्ति होती है। विशेषकर वीरता, सम्पन्नता, शक्ति, यश और प्रतिष्ठा कि अकल्पनीय वृद्धि होती है। 🏘️ *_Vastu tips* 🏚️
वास्तु के अनुसार घर का मुख्य द्वार वह स्थान होता है जहां से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है। यदि मुख्य द्वार से जुड़ा कोई वास्तु दोष हो तो भगवान गणेश की प्रतिमा को दरवाजे के अंदर और बाहर इस तरह लगाना शुभ माना जाता है कि उनकी पीठ दिखाई न दे। माना जाता है कि इससे घर में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि का मार्ग खुलता है।
*तुलसी का पौधा हिंदू परंपरा में तुलसी को अत्यंत पवित्र और सौभाग्य बढ़ाने वाला पौधा माना गया है। यदि घर के प्रवेश द्वार के पास तुलसी का पौधा लगाया जाए तो यह नकारात्मक ऊर्जा को कम करके सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है। ध्यान रखें कि तुलसी के आसपास साफ-सफाई बनाए रखें और वहां जूते-चप्पल या कूड़ादान न रखें। *घर के कोनों को रखें साफ आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार घर के कोनों में गंदगी, धूल या मकड़ी के जाले होना अशुभ माना जाता है। कहा जाता है कि ऐसी स्थिति में धन की देवी लक्ष्मी का वास नहीं होता। इसलिए घर के मुख्य द्वार, ब्रह्म स्थान और अन्य कोनों को हमेशा साफ रखना चाहिए। इससे घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
लहसुन- शरीर के लिए लहसुन को बहुत फायदेमंद माना जाता है। लहसुन में एलिसिन और दूसरे मेटाबोलाइट्स जैसे कार्बनिक सल्फर यौगिक होते हैं। ये एक्टिव पदार्थ हैं एंटीऑक्सीडेंट और एंटी इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर होते हैं। जिससे ऑक्सीडेटिव तनाव को कम करने में मदद मिलती है और कोशिकाओं को होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है। लिवर लगातार कई तरह के चयापचय उत्पादों, दवाओं, शराब और दूसरे पदार्थों के संपर्क में रहता है। ऑक्सीडेटिव तनाव बढ़ने से लिवर की सेल्स डैमेज होने लगती हैं। लेकिन लहसुन खाने से शरीर को स्वस्थ चयापचय वातावरण बनाने में मदद मिलती है।
*चुकंदर- खाने रोज थोड़ी मात्रा में चुकंदर जरूर शामिल करें। चुकंदर में अच्छी मात्रा में नेचुरल बीटालेन और नाइट्रेट पाए जाते हैं। बीटालेन की वजह से चुकंदर का रंग लाल होता है और ये पावरफुल एंटीऑक्सीडेंट है। कई रिसर्च से पता चला है कि चुकंदर चयापचय स्वास्थ्य और रक्त वाहिका के फंक्शन में सुधार करता है। ये इसलिए जरूरी है क्योंकि लिवर और किडनी दोनों अपने फंक्शन के लिए स्थिर रक्त प्रवाह पर बहुत बहुत निर्भर करते हैं। ऐसे में अगर ब्लड सर्कुलेशन खराब होता है। ब्लड प्रेशर अनियमित होता है या शरीर में मेटाबॉलिक समस्याएं पैदा होती है तो लिवर और किडनी को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ जाता है। 🍃 *आरोग्य संजीवनी* ☘️ थायरॉयड का प्राकृतिक समाधान
आजकल थायरॉयड की समस्या बहुत आम हो गई है। यह शरीर में हार्मोन के असंतुलन के कारण होती है। यह दो प्रकार की होती है*
हाइपोथायरॉयडिज़्म* (थायरॉयड हार्मोन की कमी)
हाइपरथायरॉयडिज़्म (थायरॉयड हार्मोन की अधिकता)*
आयुर्वेद में इस समस्या को नियंत्रित करने के लिए कई प्राकृतिक उपाय बताए गए हैं। उनमें से एक उपाय बेल (बिल्व) के पत्तों का सेवन भी माना जाता है।* बेल के पत्तों के गुण
बेल के पत्तों में एंटीऑक्सिडेंट, एंटी-इंफ्लेमेटरी और रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले गुण पाए जाते हैं। ये शरीर को शुद्ध करने और कई रोगों में सहायक माने जाते हैं।
सेवन करने की विधि* ताज़े, हरे और साफ बेल के पत्ते लें।*
इन्हें साफ पानी से अच्छी तरह धो लें।* सुबह खाली पेट दो जोड़े (कुल 6 पत्ते) चबाकर खाएं। यदि चाहें तो पत्तों का पेस्ट बनाकर गुनगुने पानी के साथ भी ले सकते हैं। *इस प्रक्रिया को लगभग 21 दिनों तक नियमित किया जा सकता है।
📖 *गुरु भक्ति योग* 🕯️
माताशीतला और #महाकाल से जुड़ी एक अत्यंत रहस्यमयी तांत्रिक कथा प्राचीन श्मशान परंपरा में कही जाती है, जिसे साधारण लोग बहुत कम जानते हैं। कहा जाता है कि एक समय उज्जैन और उसके आसपास के क्षेत्रों में भयंकर महामारी फैल गई। गाँव के गाँव ज्वर, फोड़े और अज्ञात रोगों से पीड़ित हो गए। लोग भयभीत होकर देवताओं की शरण में गए, परन्तु रोग रुकने का नाम नहीं ले रहा था। तब कुछ तांत्रिक साधक उज्जैन के श्मशान में जाकर महाकाल की साधना करने लगे। *रात के अंधकार में जब साधक “महाकाल” का जप कर रहे थे, तभी श्मशान में एक अद्भुत दृश्य प्रकट हुआ। श्मशान की अग्नि के मध्य से स्वयं महाकाल प्रकट हुए। उनका स्वरूप अत्यंत उग्र और तेजस्वी था। उनके प्रकट होते ही वातावरण काँप उठा और चारों ओर भयंकर ऊर्जा फैल गई।
*उसी समय महाकाल के बगल में एक करुणामयी देवी प्रकट हुईं, जिनका शरीर हरे आभा से चमक रहा था और वे गधे पर विराजमान थीं। उनके हाथ में झाड़ू और अमृत से भरा कलश था। वे थीं—माता शीतला। *कथा के अनुसार महाकाल ने साधकों से कहा कि रोग और महामारी केवल दैहिक नहीं होती, कई बार वे सूक्ष्म और अदृश्य शक्तियों से उत्पन्न होती हैं। जब संसार में अधर्म, असंतुलन और अशुद्धि बढ़ती है, तब वे शक्तियाँ सक्रिय हो जाती हैं।
तब माता शीतला ने अपने हाथ की झाड़ू से उन अदृश्य रोग-शक्तियों को झाड़ दिया और अपने कलश के अमृत से भूमि को शीतल कर दिया। कहा जाता है कि उसी रात के बाद धीरे-धीरे महामारी समाप्त होने लगी
इस घटना के बाद लोगों ने माता शीतला और महाकाल की संयुक्त आराधना प्रारंभ की, क्योंकि यह माना गया कि महाकाल उग्र शक्तियों को नियंत्रित करते हैं और माता शीतला उन्हें शांत कर देती हैं।
*इसी कारण लोकपरंपरा में यह विश्वास है कि जहाँ महाकाल की कृपा और माता शीतला की शीतल शक्ति साथ होती है, वहाँ रोग, महामारी और अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता। माता शीतला की स्तुति में यह प्रसिद्ध श्लोक कहा जाता है—*
- वन्देऽहं शीतलां देवीं रासभस्थां दिगम्बराम्।
- मार्जनी-कलशोपेतां शूर्पालंकृतमस्तकाम्॥
और महाकाल की स्तुति में कहा गया है— - महाकालं महादेवं सर्वरोगभयापहम्।
- कालकालं महाशक्तिं नमामि शंकरं प्रभुम्॥
इस कथा का रहस्य यह है कि महाकाल विनाश और नियंत्रण की शक्ति हैं, जबकि माता शीतला करुणा और शीतलता की शक्ति हैं। जब ये दोनों शक्तियाँ एक साथ प्रकट होती हैं, तब संसार में संतुलन स्थापित होता है और जीवों को रोग और भय से मुक्ति मिलती है।
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⚜️ षष्ठी तिथि आपके उपर यदि मंगल कि दशा चल रही हो और आप किसी प्रकार के मुकदमे में फंस गये हों तो षष्ठी तिथि को भगवान कार्तिकेय स्वामी का पूजन करें। मुकदमे में अथवा राजकार्य से सम्बन्धित किसी भी कार्य में सफलता प्राप्ति के लिये षष्ठी तिथि को सायंकाल के समय में किसी भी शिवमन्दिर में षण्मुख के नाम से छः दीप दान करें। कहा जाता है, कि स्वामी कार्तिकेय को एक नीला रेशमी धागा चढ़ाकर उसे अपने भुजा पर बाँधने से शत्रु परास्त हो जाते हैं। साथ ही सर्वत्र विजय कि प्राप्ति होती है।।



