मित्रता वही होता है जो तुम्हारा मित्र बुरे वक्त पर तुम्हारा साथ दे : पंडित अभिषेक शास्त्री

सिलवानी । गुरुवार को नगर के मां बिजासन कांच मंदिर में चल रही संगीतमय श्रीमद् भागवत महापुराण के समापन दिवस कथा व्यास पंडित अभिषेक शास्त्री ने बताया कि भगवान श्री कृष्ण ने 16108 विवाह किये, इसके बाद में सुदामा चरित्र बताया गया, कथा में बताया गया कि मित्रता कैसी होनी चाहिए सुदामा चरित्र में बताया गया कि सुदामा के यहाँ कितनी गरीबी थी लेकिन सुदामा ने भगवान का भजन करना नहीं छोड़ा कितनी गरीबी को भोगा है सुदामा जी महाराज ने पांच पांच दिन तक कुछ खाने को नहीं मिलता था सुदामा जी महाराज के बच्चे पांच पांच दिन तक भूखे रहते थे एक दिन अपनी धर्म पत्नी के कहने पर सुदामा जी महाराज अपने बचपन के सखा श्री कृष्ण से 4 घरों के चार मुट्ठी चावल लेकर मिलने जाते हैं । द्वारकाधीश को पता चला कि हमारे बचपन का मित्र हमसे मिलने आया है तुरंत अपनी सिंहासन को छोड़कर भागे सारे द्वारका वासी देखते ही रह गए भगवान नंगे पैर दौड़ते हैं और जाकर के सुदामा को गले से लगा लेते हैं सुदामा को अपने सिंहासन पर बिठाते हे और अपने नेत्रों के जल से सुदामा के चरणों को धुलाते हैं और वह चार मुट्ठी चावल से द्वारकाधीश त्रिलोक की संपत्ति सुदामा के नाम कर देते है। कथा में अभिषेक शास्त्री ने बताया मित्रता कैसे होनी चाहिए मित्रता वही होता है जो तुम्हारा मित्र बुरे वक्त पर तुम्हारा साथ दे, आगे चलकर परिक्षित जी महाराज के मोक्ष की कथा बतलाई गई इसके बाद में कथा को विश्राम की पुराण पूजन हुई प्रसाद वितरण होगा।


