ऋषि पंचमी 20 सितंबर को, पापों से मुक्ति पाने के लिए ऐसे करें पूजा, जानें मुहूर्त, विधि
Astologar Gopi Ram : आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🔮 20 सितम्बर 2023 : ऋषि पंचमी 20 सितंबर को, पापों से मुक्ति पाने के लिए ऐसे करें पूजा, जानें मुहूर्त, विधि
👵🏼 ऋषि पंचमी 2023
भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को ऋषि पंचमी के रूप में मनाया जाता है. ये व्रत गणेश चतुर्थी के अगले दिन आता है. इस साल ऋषि पंचमी 20 सितंबर 2023 को है. इस दिन 7 ऋषियों ऋषि कश्यप, ऋषि अत्रि, ऋषि भारद्वाज, ऋषि विश्वमित्र, ऋषि गौतम, ऋषि जमदग्नि और ऋषि वशिष्ठ की पूजा की जाती है.
मान्यता है जो स्त्रियां ऋषि पंचमी का व्रत रखकर ऋषियों का पूजन करती हैं वह दोष मुक्त हो जाती है. पीरियड्स के दौरान जाने-अनजाने में हुए पाप खत्म हो जाते हैं. ऋषि पंचमी व्रत में कथा जरुर पढ़ें इसके बिना व्रत अधूरा है. जानें ऋषि पंचमी पूजा का मुहूर्त, विधि और कथा.
🤷🏻♀️ ऋषि पंचमी पूजा कैसे करें
ऋषि पंचमी के दिन स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। अपने घर में साफ जगह पर हल्दी, कुमकुम और रोली का उपयोग करके एक चौकोर आकार का मंडल बनाएं। मंडल पर सप्त ऋषि की प्रतिमा स्थापित करें। चित्र के ऊपर शुद्ध जल और पंचामृत डालें। उनका टीका चंदन से करें। फूलों की माला पहचानाएं और सप्तऋषि को पुष्प अर्पित करें। उन्हें पवित्र धागा (यज्ञोपवीत) पहनाएं। फिर सफेद वस्त्र अर्पित करें। साथ ही उन्हें फल, मिठाई आदि भी अर्पित करें। उस स्थान पर धूप आदि रखें। कई क्षेत्रों में यह पूजा प्रक्रिया नदी के किनारे या तालाब के पास देखी जाती है। इस पूजा के बाद महिलाएं अनाज का सेवन नहीं करती हैं। बल्कि वे ऋषि पंचमी के दिन एक खास तरह के चावल का सेवन करते हैं।
⚛️ ऋषि पंचमी 2023 मुहूर्त
➡️ भाद्रपद शुक्ल पंचमी तिथि शुरू – 19 सितंबर 2023, दोपहर 01 बजकर 43
➡️ भाद्रपद शुक्ल पंचमी तिथि समाप्त – 20 सितंबर 2023, दोपहर 02 बजकर 16
➡️ सप्त ऋषियों की पूजा का समय – सुबह 11.01 – दोपहर 01.28
➡️ अवघि – 2 घंटे 27 मिनट
🫴🏼 ऋषि पंचमी का महत्व
इस व्रत में लोग उन प्राचीन ऋषियों के महान कार्यों का सम्मान, कृतज्ञता और स्मरण व्यक्त करते हैं, जिन्होंने अपना जीवन समाज के कल्याण के लिए समर्पित कर दिया। यह व्रत पापों का नाश करने वाला और फल देने वाला है। अगर यह पारंपरिक अनुष्ठानों के एक उचित सेट द्वारा किया जाता है। ऋषि पंचमी त्योहार उपवास के लिए एक महत्वपूर्ण आधार बनाता है और श्रद्धा का आभार, समर्पण और ऋषियों के प्रति सम्मान है।
💮 ऋषि पंचमी पूजा विधि
🪶 ऋषि पंचमी की पूजा के लिए स्त्रियां सुबह सूर्योदय से पूर्व पवित्र नदी गंगा में स्नान करें. घर में पानी में गंगाजल डालकर भी नहा सकते हैं.
🪶 पूजा स्थान पर गोबर से लेपन करें और चौकोर मंडल बनाकर उस पर सप्त ऋषि बनाएं.
🪶 दूध, दही, घी, शहद और जल से सप्त ऋषि का अभिषेक करें. रोली, चावल, धूप, दीप आदि से पूजन करें.
👉🏽 पूजा करते समय ये मंत्र पढ़ें
*कश्यपोत्रिर्भरद्वाजो *विश्वामित्रोय गौतम:।जमदग्निर्वसिष्ठश्च* सप्तैते ऋषय: स्मृता:।।
गृह्णन्त्वर्ध्य मया दत्तं तुष्टा भवत मे सदा।।
🔸 मासिक धर्म के दौरान धर्म से जुड़े कार्य में कोई गलती हुई हो तो महिलाएं उसके लिए क्षमा याचना करें
🔹 इसके बाद कथा सुनने के बाद घी से होम करें. इस दिन किसी ब्राह्मण को केला, घी, शक्कर, केला का दान करें. साथ ही सामर्थ्य अनुसार दक्षिणा देना शुभ होता है.
🧾 हिंदू धर्म में ऋषि पंचमी का व्रत महिलाओं के लिए बेहद खास माना जाता है। हर साल भाद्रपद माह कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को ऋषि पंचमी मनाया जाता है। इस साल 20 सितंबर 2023 को ऋषि पंचमी मनाया जाएगा। इस दिन सप्त ऋषियों की पूजा-अर्चना और व्रत रखने का बड़ा महत्व है। ऋषि पंचमी के दिन गंगा स्नान करने से महिलाओं के सुख-सौभाग्य में कई गुना वृद्धि होती है। मान्यता है कि ऐसा करने से महिलाओं को जाने-अनजाने में हो गए पापों से मुक्ति मिलती है और अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है। इस पर्व पर दान-पुण्य के कार्य भी बेहद शुभ माने जाते हैं। चलिए साल 2023 में ऋषि पंचमी का शुभ मुहूर्त, पूजाविधि और मंत्र जानते हैं आचार्य श्री गोपी राम से।
❄️ ऋषि पंचमी व्रत का शुभ मुहूर्त
इस साल भाद्रपद माह शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि का आरंभ 19 सितंबर 2023 को 1:43 मिनट पर होगा और 20 सितंबर 2023 को 2:16 मिनट पर समाप्त होगा। इसलिए साल 2023 में 20 सितंबर 2023 को ऋषि पंचमी का व्रत रखा जाएगा।
⚛️ पूजा का शुभ मुहूर्त
ऋषि पंचमी के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 11:01 मिनट से दोपहर 1:28 मिनट तक रहेगा। इस दौरान सप्त ऋषियों की पूजा-अर्चना से शुभ फलों की प्राप्ति होगी।
🍱 ऋषि पंचमी व्रत की पूजा विधि
ऋषि पंचमी के दिन महिलाओं को सुबह सूर्योदय से पूर्व उठना चाहिए। इसके बाद स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। घर के मंदिर को साफ कर लें। अब एक छोटी चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं। चौकी पर सप्त ऋषियों और अपने गुरु की तस्वीर स्थापित करें। इसके बाद सप्त ऋषियों को फल, फूल, धूप, दीप और पंचामृत अर्पित करें। उनकी श्रद्धापूर्वक आरती उतारें और आशीर्वाद लें। ऋषि पंचमी की व्रत कथा जरूर सुनें। धार्मिक मान्यता है कि ऐसा करने से भक्तों के सभी दुख दूर हो जाते हैं। फिर सभी को प्रसाद बांटे और खुद भी प्रसाद खाएं।
💁🏻♀️ इन मंत्रों का करें उच्चारण:
कश्यपोत्रिर्भरद्वाजो विश्वामित्रोय गौतम:।
जमदग्निर्वसिष्ठश्च सप्तैते ऋषय: स्मृता:।।
गृह्णन्त्वर्ध्य मया दत्तं तुष्टा भवत मे सदा।।
ऋषि पंचमी के दिन इस मंत्र का उच्चारण करने बेहद मंगलकारी माना जाता है। मान्यता है कि इन मंत्रों के जाप से जातकों को सभी पापों से मुक्ति मिलती है।
☝🏼 ऋषि पंचमी व्रत नियम
🔹 धार्मिक मान्यता के अनुसार ऋषि पंचमी के दिन व्रत करने वाली महिलाओं को जमीन में बोया अनाज नहीं खाना चाहिए.
🔸 मोरधन, कंद, मूल का आहार कर व्रत करें.
🔹 दिन एक बार भोजन करें.
🔸 व्रती स्त्रियां ब्रह्मचर्य का पालन करें.
🗣️ ऋषि पंचमी कथा
भविष्यपुराण की एक कथा के अनुसार एक उत्तक नाम का ब्राह्म्ण अपनी पत्नी सुशीला के साथ रहता था. उसके एक पुत्र और पुत्री दोनों ही विवाह योग्य थे. पुत्री का विवाह उत्तक ब्राह्मण ने सुयोग्य वर के साथ कर दिया, लेकिन कुछ ही दिनों के बाद उसके पति की अकाल मृत्यु हो गई. इसके बाद उसकी पुत्री मायके वापस आ गई. एक दिन विधवा पुत्री अकेले सो रही थी, तभी उसकी मां ने देखा की पुत्री के शरीर पर कीड़े उत्पन्न हो रहे हैं. अपनी पुत्री का ऐसा हाल देखकर उत्तक की पत्नी सहम गई गई.
वह अपनी पुत्री को पति उत्तक के पास लेकर आई और बेटी की हालत दिखाते हुए बोली कि, मेरी साध्वी बेटी की ये गति कैसे हुई’? तब उत्तक ब्राह्मण ने ध्यान लगाने के बाद देखा कि पूर्वजन्म में उनकी पुत्री ब्राह्मण की पुत्री थी, लेकिन राजस्वला के दौरान उससे गलती हो गई. ऋषि पंचमी का व्रत भी नहीं किया था. इस वजह से उसे ये पीड़ा हुई है. फिर पिता के बताए अनुसार पुत्री ने इस जन्म में इन कष्टों से मुक्ति पाने के लिए पंचमी का व्रत किया. इस व्रत को करने से उत्तक की बेटी को अटल सौभाग्य की प्राप्ति हुई.
👉🏽 समापन_
अंत में ऋषि ने निष्कर्ष निकाला कि यदि यह कन्या ऋषि पंचमी की पूजा करें व पूरे मन से और श्रद्धा से क्षमा मांगें। उसे अपने पापों से शीघ्र ही मुक्ति मिल जाएगी। इस प्रकार व्रत और श्रद्धा रखने से उनकी पुत्री अपने पिछले पापों से मुक्त हो गई।



