धार्मिकमध्य प्रदेश

रात 12 बजे यीशु के स्वागत में हुई प्रार्थना, हर्षोल्लास से मनाया गया क्रिसमस

ब्यूरो चीफ : शब्बीर अहमद
बेगमगंज । प्रभु यीशु का जन्मोत्सव (क्रिसमस) उल्लास के साथ मनाने के लिए मसीही समाज के लोग एकत्रित हुए और शनिवार रात 11:30 बजे चर्च में विशेष प्रार्थना के बाद प्रभु यीशु का जन्मदिवस मनाया गया।
वहीं रविवार की सुबह अलग अलग समय पर प्रार्थनाएं हुईं। जिसमें मसीही परिवार के लोगों ने प्रभु यीशु का गुणगान किया। रविवार को चर्च दिनभर आमजन के लिए खुला रहा। यहां कैंडल लाइट डेकोरेशन व झांकियां आकर्षण का केंद्र रहीं। वहीं पादरी ने बाइबिल का पाठ किया। क्रिसमस को लेकर देर शाम तक शहर का चर्च सहित सेंट थॉमस कॉन्वेंट स्कूल के भवन जगमगाते रहे। रंग विरंगी लाइटों व झालर से सजे चर्च को आकर्षक बनाया गया है। कोरोना काल के चलते बीते वर्ष सादगी के साथ चर्चों में कार्यक्रम हुए। लेकिन इस बार उल्लास दिख रहा है।
मान्यता है कि ईश्वर की भविष्यवाणी के बाद हुआ था ईसा मसीह का जन्म, इस दिन परम पिता परमेशवर के पुत्र ईसा मसीह का जन्म हुआ था। यूं तो भारत समेत दुनिया भर में क्रिसमस का पर्व मनाया जाता है परंतु पश्चिमी देशों में ईसाई इस पर्व को बड़े उल्लास के साथ मनाते हैं। क्रिसमस के मौके पर चर्च और घरों को क्रिसमस ट्री और लाइट्स से सजाया गया लोगो ने एक दूसरे को गिफ्ट्स दिए और केक खिलाकर पर्व मनाया । ईसा मसीह के जन्म के साथ ही अंग्रेजी कैलेंडर की शुरुआती मानी जाती है।
शहर के चर्च में एक जगह पर संगमरमर की फर्श पर एक सितारा बनाया गया इसमें 14 गोल आकृतियां उभारी गई ।
यीशु मसीह की जन्म स्थली क्रीप गोशाला बनाकर आकर्षक झांकी सजाई गई, जो धर्मावलंबियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। फादर ने बताया कि शनिवार की रात 12 बजे चर्च में जन्म पर विशेष प्रार्थना हुई और इसके बाद धर्मावलंबियों द्वारा केक काटकर जन्म का उत्सव मनाया गया। लोगों ने क्रिसमस के गाने गाए। इसके बाद सभी उपस्थित लोगों को इस अवसर पर नाश्ता में केक वितरण किया गया लोगों ने एक दूसरे को क्रिसमस की बधाई दी चर्च परिसर में समाजजनों द्वारा खुशी में नृत्य भी किया फादर ने बताया कि रविवार की सुबह चर्च में क्रिसमस को लेकर विशेष प्रार्थना की गई जिसमें विभिन्न स्थानों पर बसे इसाई धर्मावलंबी शामिल हुए।
इस अवसर पर सेंट थॉमस स्कूल में क्रिसमस ट्री को सजाकर भव्य रूप दिया गया। इसके साथ ही प्रभु यीशु मसीह की फोटो के समक्ष मोमबत्ती जलाकर खुशहाली की प्रार्थना की गई। प्राचार्य ने बच्चों को पर्व का महत्व समझाया।
फादर जूबेश ने चर्च मैं विशेष प्रार्थना उपरांत प्रभु यीशु के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रभु यीशु का जन्म संसार को पाप और बुराइयों से मुक्त कराने के लिए हुआ था। साथ ही कहा कि हमें यीशु के बताए मार्ग पर चलना चाहिए। उनके मार्ग पर चलकर ही अपने जीवन का सदुपयोग कर सकते है।

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