शिव अभिषेक है आत्म शुद्धि का हेतु : ब्रह्मचारी जी महाराज
सिलवानी । श्री शिवकथा के द्वितीय दिवस पर बम्होरी बर्धा में रविवार को शिवलिंग पूजन की महत्ता बताते हुए बताया कि कलियुग में मिट्टी के शिवलिंग की पूजन, अभिषेक करने का बड़ा ही महत्त्व है। इस पूजन अभिषेक को करने हेतु नदी, तालाब आदि के तट से पवित्र मिट्टी लेकर वर्णाश्रम अनुसार लिंग निर्माण करें।
शिवलिंग की पूजन में तिलक लगाने से आपत्तियों का विनाश, दीपक जलाने से ज्ञान प्राप्ति, पान लौंग के अर्पण से भौतिक संसाधन प्राप्ति, धूप अर्पण करने से मनोकामनाएं, घण्टा चढ़ाने से वाणी की शुद्धि, दही भात अर्पण करने से सदाचारी संतान की प्राप्ति, शिवलिंग को नैवेद्य अर्पण से आयु वृद्धि होती है।
नैवेद्य के विषय में विस्तार से ब्रह्मचारी जी ने व्यास पीठ से बताया कि घर मे एक पाव का नैवेद्य, मंदिर में एक सेर, देवताओं द्वारा प्राण प्रतिष्ठित भगवान को तीन सेर एवं स्वंभू लिंग को पांच सेर का नैवेद्य पुराणोक्त आदेशानुसार अर्पण किया जाए।

