किसी को भी सामान्य ना समझे हम : पं.कमलेश शास्त्री
रिपोर्टर : शिवकुमार साहू
सिलवानी। ग्राम सियरमऊ में चल रही श्री गणेश पुराण कथा के छठवें दिन में पंडित कमलेश कृष्ण शास्त्री महाराज तिन्सुआ वाले बेगमगंज ने व्यासपीठ पर बैठे हुए कहा कि किसी को भी सामान्य देखना सबसे सामान्य बात है और किसी को भी सामान्य न देखना सबसे असाधारण बात है। बड़ा भाई राम और छोटा भाई भरत ये तो बड़ी सामान्य बात है पर बड़ा भाई राम हो तो कभी छोटे भाई को भी राम बना ले। अगर बड़ा भाई छोटे भाई को भरत मानेगा तो अपेक्षाओं का जन्म होगा, उससे त्याग की अपेक्षाओं का जन्म होगा, फिर असन्तोष भी आएगा मन में फिर विरोध भी आ सकता है मन में फिर उसके छोटे होने की अभिलाषा भी बनी रहेगी और अपने बड़े बने रहने की अपेक्षा भी बनी रहेगी।ये बड़ी साधारण बात है कि बड़ा भाई राम है, छोटा भाई भरत है पर ये अति आसाधारण बात है कि छोटा भाई राम हो। अगर छोटा भाई राम हो गया तो तुम अपेक्षाओं से मुक्त हो जाओगे। वो तुम्हें राम मान लेगा तो तुम त्याग करने को तैयार हो जाओगे तुम उसे राम मान लेना तो वो भी त्याग करने को तैयार हो जाएगा। और जहाँ त्याग होगा वहाँ सतत् शांति विद्यमान रहेगी। शिष्य गुरु को भगवान देखे ये साधारण बात है पर गुरु शिष्य को भी भगवान देखे ये अति आसाधारण बात है। कैसे सामने बैठे श्रोता को सामान्य दृष्टि से देखा जा सकता है? वक्ता श्रोता च दुर्लभ। कथा के वक्ता भगवान हों न हों पर श्रोता जरूर भगवान होते हैं। श्रोता का आसन लेकर हनुमान जी बैठना चाहते हैं,श्रोता का आसन लेकर भगवान शंकर बैठना चाहते हैं।

