14 मार्च 2023: कब है शीतला सप्तमी, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, महत्व
Astologar Gopi Ram : आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
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🔮 14 मार्च 2023: कब है शीतला सप्तमी, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, महत्व
🥏 महत्वपूर्ण जानकारी
◼️ शीतला सप्तमी व्रत
◼️ मंगलवार, 14 मार्च 2023
◼️ सप्तमी तिथि प्रारंभ: 13 मार्च 2023 अपराह्न 09:27 बजे
◼️ सप्तमी तिथि समाप्त: 14 मार्च 2023 अपराह्न 08:22 बजे
◼️ शीतला सप्तमी पूजा मुहूर्त – 06:33 पूर्वाह्न से 06:29 बजे तक
शीतला सप्तमी देवी शीतला या शीतला माता को समर्पित महत्वपूर्ण हिंदू त्योहार है. यह त्योहार चैत्र महीने के कृष्ण पक्ष सप्तमी तिथि को मनाया जाता है. शीतला सप्तमी के दिन हिंदू भक्त अपने परिवार के सदस्यों, विशेषकर बच्चों को चिकन पॉक्स और चेचक जैसी संक्रामक बीमारियों से बचाने के लिए देवी शीतला की पूजा करते हैं. यह त्योहार पूरे भारत में विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है. भारत के दक्षिणी राज्यों में देवी शीतला को ‘देवी पोलेरम्मा’ या ‘देवी मरियम्मन’ के रूप में पूजा जाता है. कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में, शीतला सप्तमी के समान एक त्योहार मनाया जाता है, जिसे ‘पोलाला अमावस्या’ के रूप में जाना जाता है. जानें इस बार शीतला सप्तमी
📆 शीतला सप्तमी तारीख, शुभ मुहूर्त
♦️ शीतला सप्तमी मंगलवार, मार्च 14, 2023 को
♦️ शीतला सप्तमी पूजा मुहूर्त – 06:33 सुबह से 06:29 शाम तक
♦️ अवधि – 11 घंटे 56 मिनट
🧾 शीतला अष्टमी बुधवार, मार्च 15, 2023 को
♦️ सप्तमी तिथि प्रारंभ – 13 मार्च 2023 को रात्रि 09:27 बजे
♦️ सप्तमी तिथि समाप्त – 14 मार्च 2023 को रात्रि 08:22 बजे
✡️ शीतला सप्तमी के दौरान अनुष्ठान
शीतला सप्तमी के दिन देवी शीतला देवी की पूजा की जाती है. लोग सुबह जल्दी उठकर ठंडे पानी से नहाते हैं.
उसके बाद प्रार्थना करने के लिए शीतला माता के मंदिरों में जाते हैं. शांतिपूर्ण और सुखी जीवन के लिए इस दिन विभिन्न अनुष्ठान किए जाते हैं.
कुछ जगहों पर लोग इस दिन भोजन नहीं बनाते हैं और पिछले दिन बनाए गए भोजन का सेवन करते हैं. इस दिन गर्म भोजन करना सख्त वर्जित होता है.
कुछ भक्त देवी शीतला को प्रसन्न करने के लिए इस दिन व्रत भी रखते हैं. इस व्रत को ज्यादातर महिलाएं अपनी संतान की सलामती के लिए रखती हैं.
🤷🏻♀️ शीतला सप्तमी का महत्व
देवी शीतला का माता पार्वती का अवतार माना जाता है। स्कन्द पुराण में शीलता सप्तमी के महत्व का वर्णन किया गया है। हिन्दू धर्म में शक्ति को दो रूपों में पूजा जाता है। जिसमें से देवी शीतला ‘चिंकन पाॅक्स’ या ‘चेचक’ जैसी संक्रामक रोगों से पीडि़त लोगों मुक्त करती है और प्रकृति द्वारा उपचार शक्ति का भी प्रतिनिधित्व करती है।
स्कन्द पुराण में देवी शीतला का वर्णन किया गया है। शीतलाष्टक शीतला देवी की महिमा गान करता है, साथ ही उनकी उपासना के लिए भक्तों को प्रेरित भी करता है। शास्त्रों में भगवती शीतला की वंदना के लिए यह मंत्र बताया गया हैः
वन्देऽहंशीतलांदेवीं रासभस्थांदिगम्बराम्।।
मार्जनीकलशोपेतां सूर्पालंकृतमस्तकाम्।।
👉🏻 अर्थ – गर्दभ पर विराजमान, दिगम्बरा, हाथ में झाडू तथा कलश धारण करने वाली, सूप से अलंकृत मस्तक वाली भगवती शीतला की मैं वंदना करता हूं।
शीतला माता के इस वंदना मंत्र से यह पूर्णतः स्पष्ट हो जाता है कि ये स्वच्छता की अधिष्ठात्री देवी हैं। हाथ में झाडू होने का अर्थ है कि हम लोगों को भी सफाई के प्रति जागरूक होना चाहिए। कलश से हमारा तात्पर्य है कि स्वच्छता रहने पर ही स्वास्थ्य रूपी समृद्धि आती है।
मान्यता अनुसार इस व्रत को करने से शीतला देवी प्रसन्न होती हैं और व्रती के कुल में दाहज्वर, पीतज्वर, विस्फोटक, दुर्गन्धयुक्त फोडे, नेत्रों के समस्त रोग, शीतलाकी फुंसियों के चिन्ह तथा शीतलाजनित दोष दूर हो जाते हैं।
🍱 शीतला सप्तमी 2023: किए जाने वाले कर्मकांड
लोग सुबह जल्दी उठकर ठंडे पानी से स्नान करते हैं। फिर शीतला माता मंदिर में भोग (दही, चावल, हलवा, पूड़ी, खीर या रबड़ी आदि), कलश, हल्दी, कुमकुम, अक्षत, फूल, सिंदूर, मेहंदी, काजल, लाल चुनरी, कलावा, केला चढ़ाकर पूजा करने के लिए जाएँ। नारियल आदि। बहुत से लोग अपने घर पर भी पूजा करते हैं और स्वस्थ और शांतिपूर्ण जीवन की कामना करते हैं।
📚 शीतला माता व्रत कथा को पढ़ा और सुना जाता है और आरती गाकर पूजा का समापन किया जाता है।



