ज्योतिष

Aaj ka Panchang आज का पंचांग बुधवार, 05 अगस्त 2023

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शनिवार 05 अगस्त 2023

शनि देव जी का तांत्रिक मंत्र – ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।।
☄️ दिन (वार) -शनिवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से आयु का नाश होता है । अत: शनिवार को बाल और दाढ़ी दोनों को ही नहीं कटवाना चाहिए।
शनिवार के दिन प्रात: पीपल के पेड़ में दूध मिश्रित मीठे जल का अर्ध्य देने और सांय पीपल के नीचे तेल का दीपक जलाने से कुंडली की समस्त ग्रह बाधाओं का निवारण होता है ।
शनिवार के दिन पीपल के नीचे हनुमान चालीसा पड़ने और गायत्री मन्त्र की àएक माला का जाप करने से किसी भी तरह का भय नहीं रहता है, समस्त बिग़डे कार्य भी बनने लगते है ।
शिवपुराण के अनुसार शनि देव पिप्लाद ऋषि का स्मरण करने वाले, उनके भक्तो को कभी भी पीड़ा नहीं देते है इसलिए जिन के ऊपर शनि की दशा चल रही हो उन्हें अवश्य ही ना केवल शनिवार को वरन नित्य पिप्लाद ऋषि का स्मरण करना चाहिए।
शनिवार के दिन पिप्पलाद श्लोक का या पिप्पलाद ऋषि जी के केवल इन तीन नामों (पिप्पलाद, गाधि, कौशिक) को जपने से शनि देव की कृपा मिलती है, शनि की पीड़ा निश्चय ही शान्त हो जाती है ।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर वर्षा ऋतु
⛈️ मास – श्रावण मास
🌖 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – श्रावण मास कृष्ण पक्ष चतुर्थी तिथि 09:40 AM तक उपरांत पंचमी
✏️ तिथि का स्वामी – चतुर्थी तिथि के स्वामी भगवान गणपति जी और पंचमी तिथि के स्वामी नाग देवता जी है।
💫 नक्षत्र : नक्षत्र उत्तरभाद्रपदा 02:54 AM तक उपरांत रेवती
🪐 नक्षत्र स्वामी – उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के स्वामी शनिदेव हैं। तथा स्वामी देवताओं के गुरु बृहस्पति देव हैं।
🔊 योग : सुकर्मा योग 11:12 PM तक, उसके बाद धृति योग
प्रथम करण : बालव – 09:39 ए एम तक
द्वितीय करण : कौलव – 08:20 पी एम तक
🔥 गुलिक काल : – शनिवार को शुभ गुलिक प्रातः 6 से 7:30 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – शनिवार को पूर्व दिशा का दिकशूल होता है ।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से अदरक खाकर, घी खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -सुबह – 9:00 से 10:30 तक।राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदय – प्रातः 06:15:45 AM
🌅 सूर्यास्त – सायं 19:12:06 PM
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:20 ए एम से 05:02 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:41 ए एम से 05:44 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:00 पी एम से 12:54 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:41 पी एम से 03:35 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 07:09 पी एम से 07:31 पी एम
🌃 सायाह्न सन्ध्या : 07:09 पी एम से 08:13 पी एम
💧 अमृत काल : 10:28 पी एम से 11:57 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:06 ए एम, अगस्त 06 से 12:48 ए एम, अगस्त 06
💥 यायीजयद योग- 5 अगस्त 2023 को सुबह 9 बजकर 40 मिनट से शुरू होकर कल सुबह 7 बजकर 10 मिनट तक
🚓 यात्रा शकुन-शर्करा मिश्रित दही खाकर घर से निकलें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनयै नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-शनि मंदिर में सरसों का तेल व काले तिल चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-शमी के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – राम मंदिर भूमिपूजन निर्माण दिवस, स्वतंत्रता सेनानी द्वारका प्रसाद मिश्रा जयन्ती, भारत के प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी गोपीनाथ बोरदोलोई पुण्यतिथि, केशब चन्द्र गोगोई स्मृति दिवस, बुर्किना फासो स्वतंत्रता दिवस, विश्व स्तनपान दिवस (सप्ताह), पंचक जारी
✍🏼 विशेष – चतुर्थी तिथि को मूली एवं पञ्चमी तिथि को बिल्वफल त्याज्य बताया गया है। इस चतुर्थी तिथि में तिल का दान और भक्षण दोनों त्याज्य होता है। इसलिए चतुर्थी तिथि को मूली और तिल एवं पञ्चमी को बिल्वफल नहीं खाना न ही दान करना चाहिए। चतुर्थी तिथि एक खल और हानिप्रद तिथि मानी जाती है। इस चतुर्थी तिथि के स्वामी गणेश जी हैं तथा यह चतुर्थी तिथि रिक्ता नाम से विख्यात मानी जाती है। यह चतुर्थी तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभफलदायिनी मानी गयी है।
🏘️ Vastu Tips 🏚️
वास्तु शास्त्र के अनुसार डाइनिंग रूम यानि भोजन कक्ष में ऐसा रंग प्रयोग करना चाहिए जो घर के सभी सदस्यों को जोड़े रखने में सहायक हो। कई बार भोजन के दौरान अहम निर्णय भी ले लिये जाते हैं। क्योंकि, उस समय सब साथ होते हैं, तो ऐसे में रंगों का ख्याल रखना बेहद जरूरी है।
वास्तु के अनुसार डाइनिंग रूम में हल्का हरा, गुलाबी, आसमानी, नारंगी, क्रीम या फिर हल्का पीला रंग सबसे अच्छा होता है। हल्के रंगों को देखकर खाना खाने वालों के मन में आनंद बना रहता है। लेकिन ध्यान रहे कि डाइनिंग रूम में काला रंग करवाने से आपको बचना चाहिए।
घर के मंदिर के लिए ये रंग रहेगा शुभ वास्तु शास्त्र के मुताबिक, रंग बहुत ही सौम्य और मन को शांति देने वाले होने चाहिए। इस हिस्से में सकारात्मकता बनी रहनी चाहिए। इसलिए पूजा घर की दिवारों पर हल्का पीला रंग या गेरूआ रंग करवाना ठीक रहता है और फर्श के लिए हल्के पीले या सफेद रंग के पत्थर का चुनाव करना अच्छा होता है।
स्टडी रूम के लिए चुने ये रंग स्टडी रूम या अध्ययन कक्ष के लिए क्रीम कलर, हल्का जामुनी, हल्का हरा, आसमानी, पीला, बादामी या भूरा रंग का चयन करना चाहिए। हल्का रंग वास्तु की दृष्टि से शुभ माना जाता है और खासकर पीला रंग। यह रंग बच्चों की अध्ययन क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
मस्सों को हटाने के नैचुरल तरीके प्याज का रस मस्सा हटाने के लिए प्याज का रस कारगर साबित होता है। प्याज को कद्दूकस करके इसे मलमल के कपड़े से छान लें और इसका रस अलग कर लें। इस रस को सुबह और शाम रोजाना मस्से पर लगाएं। ऐसा करने से कुछ दिनों के बाद मस्सा सूखकर निकल जाता है।
मस्सा हटाने के लिए फ्लॉस को मस्से पर बांधने से ये कुछ दिनों में निकल जाता है। फ्लॉस बांधने से मस्से तक खून नहीं पहुंचता है, जिसके कारण यह कुछ दिनों में सूखकर गिर जाता है।
बरगद के पत्ते बरगद के पत्तों का रस निकालकर रोजाना मस्सों पर लगाएं। ऐसा करने से स्किन सॉफ्ट हो जाती है और कुछ समय के बाद मस्से झड़कर निकल जाते हैं। बरगद के पत्तों के अनेक फायदे हैं।
मस्सा हटाने के लिए आलू को काटकर दिन में 3 से 4 बार मस्से पर रगड़ें। ऐसा करने से मस्सा अपने आप सूख जाता है। आलू न सिर्फ मस्सा हटाने के काम आता है बल्कि चेहरे पर इसका रस लगाने से दाग-धब्बे भी दूर होते हैं।अलसी के बीजों को पीसकर इसमें शहद मिलाएं और इस पेस्ट को मस्सों पर लगाएं। ऐसा करने से कुछ ही दिनों में मस्सा निकलकर गिर जाता है
🩸 आरोग्य संजीवनी 💊
ज्यादा भूख लगने के क्या कारण हो सकते हैं?
डायबिटीज ज्यादा भूख लगने की वजह डायबिटीज भी हो सकती है। डायबिटीज के मरीजों को खाना खाने के बाद भी भूख लगती है, दरअसल, ऐसा शरीर में पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन न बनने की वजह से होता है। डायबिटीज एक लाइलाज बीमारी है लेकिन समय रहते अगर पता चल जाए तो इसे डाइट और लाइफस्टाइल में बदलाव के साथ कंट्रोल किया जा सकता है।
थायराइड शरीर में थायराइड असंतुलित होने पर भी भूख ज्यादा लगती है। गले में तितलीनुमा एक ग्रंथि होती है जिससे थायराइड हार्मोन निकलता है, जब इस हार्मोन का संतुलन शरीर में बिगड़ने लगता है तो हाइपरथाइरायडिज़्म या हाइपोथायराइडिज्म होता है। थायराइड की समस्या में भूख लगने के साथ वजन बढ़ने लगता है और कुछ लोगों के चेहरे पर हल्के बाल भी दिखने लगते हैं।
डिप्रेशन स्ट्रेस के कारण अक्सर लोग डिप्रेशन के शिकार हो जाते हैं। स्ट्रेस या डिप्रेशन के कारण भी लोगों को ज्यादा भूख लगने लगती है, जिसके कारण वह ओवरईटिंग करते हैं। स्ट्रेस के कारण शरीर में कार्टिसोल हार्मोन बढ़ता है, जिसका असर हमारी भूख पर पड़ता है।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
कल का शेष
जिन ऋषि कि दृष्टि से जलकर काल यवन मारता है वे ऋषि इच्छवाकु वंश के राजा थे। वे देवता और दानवों के युद्ध में देवताओं को साथ देने पृथ्वी से देवलोक गए। वहां तो युद्ध एक वर्ष ही चला पर जब वे लौटकर पृथ्वी पर आए तो पता चला कि यहां तो युगों बीत गए हैं और अब इच्छवाकु वंश का नामोनिशान मिट गया है। इससे दुखी होकर वो सोने को वरदान मांगते है और जो भी उन्हे जगाय उसपे दृष्टि पड़ते ही वो भस्म हो जाए यह वरदान मांगकर वे सो जाते हैं। काल यवन के भस्म होने के बाद वे भगवान श्री कृष्ण के दर्शन करते हैं जो उनके वरदान का एक हिस्सा होता है।
महाराज नहुष अपने अच्छे कर्मों के कारण उन्हे इन्द्र का स्थान से दिया जाता है परन्तु अभिमान में वे सप्तऋषियों का अपमान कर देते है जिसके कारण सप्तऋषि उन्हे श्राप देकर अजगर बनाकर धरती पर पटक देते हैं। यही अजगर यानी महाराज नहुष महाभारत काल में भीम को जकड़ लेते है और यह जानते हुए, कि भीम उनके वंशज हैं, उन्हे खाने जाते हैं जब युधिष्ठिर आकर उन्हे बचाते हैं।
उपरोक्त इतिहास से यही पता चलता है कि मलेच्छ अर्थात मुसलमान कोई और नहीं भारतीय हिंदू ही थे जो आगे चलकर यवन देश में बसे और मुसलमान कहलाए।
इति समाप्ति
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⚜️ चतुर्थी तिथि में तिल का दान और भक्षण दोनों भी त्याज्य है। आज गणपति, गजानन, विघ्नहर्ता श्री गणेशजी की पूजा का विशेष महत्त्व है। आज गणपति की पूजा के उपरान्त मोदक, बेशन के लड्डू एवं विशेष रूप से दूर्वादल का भोग लगाना चाहिये इससे मनोकामना की सिद्धि तत्काल होती है।
ज्योतिष शास्त्रानुसार जिस व्यक्ति का जन्म चतुर्थी तिथि को होता है वह व्यक्ति बहुत ही भाग्यशाली होता है। चतुर्थी तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति बुद्धिमान एवं अच्छे संस्कारों वाला होता है। ऐसे लोग अपने मित्रों के प्रति प्रेम भाव रखते हैं तथा इनकी सन्तानें अच्छी होती है। इन्हें धन की कमी का सामना नहीं करना पड़ता है और ये सांसारिक सुखों का पूर्ण उपभोग करते हैं।

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