ज्योतिष

Aaj ka Panchang आज का पंचांग शुक्रवार, 29 दिसम्बर 2023

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शुक्रवार 29 दिसम्बर 2023

29 दिसम्बर 2023 दिन शुक्रवार को पौष मास के कृष्ण पक्ष की द्वितीया उपरान्त तृतीया तिथि है। आज भगवान श्रीसूर्यनारायण मूल नक्षत्र को छोडकर पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में चले जाएंगे। धनु राशि में ही रहते हुए धनु राशि में ही पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र जाएंगे। आप सभी सनातनियों को “सूर्य भगवान के पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के संक्रान्ति” की हार्दिक शुभकामनायें।।
ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥
🌌 दिन (वार) – शुक्रवार के दिन दक्षिणावर्ती शंख से भगवान विष्णु पर जल चढ़ाकर उन्हें पीले चन्दन अथवा केसर का तिलक करें। इस उपाय में मां लक्ष्मी जल्दी प्रसन्न हो जाती हैं।
शुक्रवार के दिन नियम पूर्वक धन लाभ के लिए लक्ष्मी माँ को अत्यंत प्रिय “श्री सूक्त”, “महालक्ष्मी अष्टकम” एवं समस्त संकटो को दूर करने के लिए “माँ दुर्गा के 32 चमत्कारी नमो का पाठ” अवश्य ही करें ।
शुक्रवार के दिन माँ लक्ष्मी को हलवे या खीर का भोग लगाना चाहिए ।
शुक्रवार के दिन शुक्र ग्रह की आराधना करने से जीवन में समस्त सुख, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है बड़ा भवन, विदेश यात्रा के योग बनते है*
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – उत्तरायण
☀️ ऋतु – सौर शिशर ऋतु
⛈️ मास – पौष मास
🌖 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – पौष मास शुक्ल पक्ष दिन वार शुक्रवार द्वितीया तिथि 08:00 AM तक उपरांत तृतीया
✏️ तिथि स्वामी : तृतीया तिथि के देवता हैं यक्षराज कुबेर। इस तिथि में कुबेर का पूजन करने से व्यक्ति धनवान बन जाता है।
💫 नक्षत्र : नक्षत्र पुष्य 03:09 AM तक उपरांत आश्लेषा
🪐 नक्षत्र स्वामी : पुष्य नक्षत्र का अधिपति शनि और उप स्वामी बृहस्पति होता है अर्थात पुष्य नक्षत्र का देवता बृहस्पति को तथा स्वामी शनि देव को माना जाता है।
📣 योग – वैधृति योग 02:28 AM तक, उसके बाद विष्कुम्भ योग
प्रथम करण : गर – 07:59 ए एम तक
द्वितीय करण : वणिज – 08:47 पी एम तक
🔥 गुलिक काल : – शुक्रवार को शुभ गुलिक प्रात: 7:30 से 9:00 तक ।
⚜️ दिशाशूल – शुक्रवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से दही में चीनी या मिश्री डालकर उसे खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -दिन – 10:30 से 12:00 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:47:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:13:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:02 ए एम से 05:53 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या : 05:28 ए एम से 06:45 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:56 ए एम से 12:40 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:09 पी एम से 02:54 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:49 पी एम से 06:15 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या : 05:51 पी एम से 07:09 पी एम
💧 अमृत काल : 08:12 पी एम से 09:57 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:52 पी एम से 12:44 ए एम, दिसम्बर 30
🚓 यात्रा शकुन-शुक्रवार को मीठा दही खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-किसी विप्र को चांदी भेंट करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-गूलर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – मूल प्रारंभ, गुरु गोबिंद सिंहजी प्रकाश पर्व, टिकटॉक डे, सुमित्रानंदन पंत स्मृति दिवस, स्वामी विश्वेशतीर्थ स्मृति दिवस, मंगोलिया स्वतंत्रता दिवस, धारावाहिक ‘रामायण’ निर्माता रामानन्द सागर जयन्ती, अभिनेता राजेश खन्ना जन्म दिवस, ठा.महाराजा खेतसिंह खंगार जन्म दिवस, साहित्यकार गिरिधर शर्मा चतुर्वेदी जन्म दिवस
✍🏼 विशेष – तृतीया तिथि में नमक का दान तथा भक्षण दोनों ही त्याज्य बताया गया है। तृतीया तिथि एक सबला अर्थात बल प्रदान करने वाली तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं यह तृतीया तिथि आरोग्यकारी रोग निवारण करने वाली तिथि भी मानी जाती है। इस तृतीया तिथि की स्वामिनी माता गौरी और इसके देवता कुबेर देवता हैं। यह तृतीया तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह तृतीया तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभफलदायिनी मानी जाती है।
🗼 Vastu tips 🗽
वास्तु शास्त्र में पूर्व दिशा का बहुत महत्व है। यदि इस दिशा में वास्तु शास्त्र का सही ख्याल रखा जाये तो घर के सदस्यों पर और खासकर कि घर के मुखिया पर इसका अच्छा असर होता है।
सूर्य देव को समर्पित है ये दिशा इन्द्र देव के साथ सूर्य देव की कृपा भी आप पर बनी रहती है क्योंकि पूर्व दिशा सूर्य देव को समर्पित दिशा है।इन दोनों दिशाओं के ठीक होने पर समाज में मान-सम्मान बना रहता है और घर में खुशहाली आती है।
पूर्व दिशा में लगाएं इस रंग का पत्थर वास्तु शास्त्र के अनुसार इस दिशा में फर्श के लिये गहरे हरे रंग के पत्थर का चुनाव करना चाहिए. वहीं अगर घर की दक्षिण-पूर्व दिशा की बात करें तो यह दिशा स्वयं सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी की मानी जाती है। इस दिशा में बैंगनी रंग के फर्श का होना शुभ माना जाता है।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
चिलब्लेन का कारण-लंबे समय तक नंगे पैर रहने से और ठंडे पानी का इस्तेमाल करने से।
तंग जूते और गीले मोजों की वदह से जो कि पैर की उंगलियों में रक्त संचार को और कम कर सकते हैं।
यह ठंड के बाद आपके शरीर की पुनः गर्माहट की एक असामान्य प्रतिक्रिया हो सकती है।
ठंडी त्वचा जब फिर से गर्म होती है तो त्वचा के नीचे की छोटी रक्त वाहिकाएं आस-पास की बड़ी रक्त वाहिकाओं की तुलना में अधिक तेजी से फैल सकती हैं। ये उंगलियों में सूजन और दर्द का कारण बन सकता है।
ऐसे कपड़े और जूते पहनना जो तंग हों या त्वचा को ठंड के संपर्क में लाएं।
ठंड, नमी वाले मौसम में टाइट-फिटिंग कपड़े और जूते पहनने से आपको चिलब्लेन का खतरा अधिक हो सकता है।
💊 आरोग्य संजीवनी 🩸
परिचय: गरम दूध में हल्दी डाल के पीने का महत्व न शिर्षक नहीं है क्योंकि यह एक प्राचीन आयुर्वेदिक औषधि है जो शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए अनगिनत लाभ प्रदान करती है। इसका उपयोग सिर्फ विभिन्न आइयर्वेदिक उपायों में ही नहीं, बल्कि दुनियाभर में लोगों के बीच प्रचलन में भी है।
और जानना चाहते हैं? गरम दूध में हल्दी डाल के पीने से संबंधित समस्याओं का सविशेष विवरण देना महत्वपूर्ण है। इससे त्वचा की समस्याएं, जैसे कि एक्जिमा और एकने, कम हो सकती हैं। यह ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है और शरीर को संजीवनी शक्ति प्रदान करने में भी सहायक हो सकता है।
अब यहां सबसे अच्छा हिस्सा है:रोजाना रात को गरम दूध में हल्दी मिलाकर पीने से अच्छी नींद मिलती है।हल्दी में मौजूद अंटीऑक्सीडेंट्स त्वचा को स्वस्थ और चमकदार बनाए रखने में मदद करते हैं।गरम दूध का सेवन अच्छी पाचन शक्ति को बढ़ावा देता है।
लाभ:गरम दूध में हल्दी के सेवन से त्वचा में निखार आता है।इससे शरीर की ऊर्जा बढ़ती है और थकान कम होती है।ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में सहायक है।
हानि:अगर आपको गरम दूध या हल्दी से एलर्जी है, तो इससे नुकसान हो सकता है।अधिक मात्रा में हल्दी का सेवन करने से पेट समस्याएं हो सकती हैं।
📚 गुरु भक्ति योग 🕯️
ज्योतिष शास्त्र में 27 नक्षत्रों में से एक नक्षत्र पुष्य आता है। जिसके कारण गुरु पुष्य योग बनता है, इस योग में गुरु बृहस्पति और पुष्य नक्षत्र के मिलन के कारण यह योग बेहद शुभ माना जाता है। इस योग के दौरान किए गए कार्यों में सफलता मिलती है। इसी के साथ मां लक्ष्मी का आशीर्वाद भी मिलता है। साल 2023 के अलविदा कहने और नए साल 2024 के आने से पहले धन लाभ का यह महा संयोग बन रहा है।
मान्यता है कि इस नक्षत्र में व्यापार का शुभारंभ करना, खरीदारी करना और धन का निवेश आदि कार्य करना बेहद शुभ और लाभकारी होता है। ज्योतिष शास्त्र में पुष्य नक्षत्र को देवताओं द्वारा पूजने वाला नक्षत्र बताया गया है। आइए जानते हैं आचार्य श्री गोपी राम से साल 2023 में कब बन रहा है गुरु पुष्य नक्षत्र का शुभ संयोग और इस दौरान क्या करना चाहिए।
साल 2023 में कब बन रहा है गुरु पुष्य नक्षत्र का शुभ संयोग
गुरु पुष्य नक्षत्र – 29 दिसंबर 2023 दिन शुक्रवार
गुरु पुष्य नक्षत्र प्रारंभ – 29 दिसंबर 2023 दिन शुक्रवार देव रात 1 बजकर 5 मिनट पर शुरू।
गुरु पुष्य नक्षत्र समापन – 30 दिसंबर 2023 दिन शनिवार सुबह 3 बजकर 10 मिनट पर समाप्ति।
29 दिसंबर 2023 दिन शुक्रवार को पूरे दिन गुरु पुष्य नक्षत्र रहेगा इस लिहाज से खरीदारी करने का शुभ मुहूर्त पूरे दिन रहेग।
गुरु पुष्य योग में इन कार्यों करने से होगा महालाभ
यह नक्षत्र स्थायी है जो लोग इस नक्षत्र के दौरान कोई भी चीज खरीदते हैं। उस वस्तु का अस्तित्व लंबे समय तक के लिए बना रहता है।
पुष्य नक्षत्र पर गुरु बृहस्पति और शनि ग्रह का अधिपत रहता है इस वजह से यह नक्षत्र बेहद शुभ माना जाता है और इस नक्षत्र में भूमि-भवन, रत्न, सोना-चांदी की खरीदारी करना लाभकारी होता है।
इस नक्षत्र के दौरान धन का निवेश करना भी लाभकारी होता है। इसी के साथ इस नक्षत्र में आप गुरु बृहस्पित का शुभ आशीर्वाद पाने के लिए उनसे संबंधित चीजें खरीद सकते हैं, जैसे की पीतल के पात्र, पीले रंग के वस्त्र, सोने के आभूषण इत्यादि।
हिंदू धर्म के अनुसार इस नक्षत्र के दौरान मां लक्ष्मी की पूजा करना बेहद शुभ माना जाता है। पुष्य नक्षत्र में मां लक्ष्मी की आराधना करने से वह शीघ्र प्रसन्न होती है और धन-धान्य से झोली भर देती हैं।
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⚜️ तृतीया तिथि केवल बुधवार की हो तो अशुभ मानी जाती है। अन्यथा इस तृतीया तिथि को सभी शुभ कार्यों में लिया जा सकता है। आज तृतीया तिथि को माता गौरी की पूजा करके व्यक्ति अपनी मनोवाँछित कामनाओं की पूर्ति कर सकता है। आज तृतीया तिथि में एक स्त्री माता गौरी की पूजा करके अचल सुहाग की कामना करे तो उसका पति सभी संकटों से मुक्त हो जाता है। आज तृतीया तिथि को भगवान कुबेर जी की विशिष्ट पूजा करनी चाहिये। देवताओं के कोषाध्यक्ष की पूजा आज तृतीया तिथि को करके मनुष्य अतुलनीय धन प्राप्त कर सकता है।
तृतीया तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति मानसिक रूप से अस्थिर होता है अर्थात उनकी बुद्धि भ्रमित होती है। इस तिथि का जातक आलसी और मेहनत से जी चुराने वाला होता है। ये दूसरे व्यक्ति से जल्दी घुलते मिलते नहीं हैं बल्कि लोगों के प्रति इनके मन में द्वेष की भावना भी रहती है। इनके जीवन में धन की कमी रहती है, इन्हें धन कमाने के लिए काफी मेहनत और परिश्रम करना पड़ता है।

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