उद्यान विभाग की अनुदान योजना के तहत ड्रिप मल्चिंग पद्धति का किसान ले रहे लाभ

ब्यूरो चीफ : शब्बीर अहमद,
बेगमगंज । अगर आप किसान हैं और अभी भी पुराने तौर तरीकों से खेती करते आ रहे हैं तो आप बिना रासायनिक दवा और खाद के भी मिट्टी की उत्पादक क्षमता बढ़ा सकते हैं। वहीं इसके बिना खेत को खरपतवारों से भी मुक्त कर सकते है। जी हां, यह जानकर आपको थोड़ी हैरानी जरूर होगी लेकिन ऐसा संभव है।
दरअसल किसानों को खेती में खरपतवार से सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ता है। खरपतवार से फसल को बचाने के लिए किसान निराई-गुड़ाई करते हैं लेकिन इसमें बहुत खर्च आता है। इसमें सिंचाई की भी आवश्यकता बढ़ जाती है। इसके लिए सबसे सस्ती और अच्छी तकनीक है ड्रिप मल्चिंग तकनीक है जो खरपतवार नियंत्रण और पौधों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने में बेहद कारगर होती है। इसे पलवार या मल्च भी कहते हैं अगर आप अपनी फसलों को खरपतवार मुक्त रख कर फसलों से अधिक उपज करना चाहते हैं तो आप उद्यान विभाग की 50 प्रतिशत अनुदान योजना के तहत अपने खेत में मल्चिंग तकनीक का इस्तेमाल जरूर करें।
क्या है मल्चिंग तकनीक:- मल्च एक ऐसी प्रक्रिया है जिसका उपयोग मिट्टी में नमी बनाए रखने, खरपतवारों को दबाने, मिट्टी को ठंडा रखने और सर्दियों में पाले की समस्या से पौधों को सुरक्षित रखने के लिए मल्चिंग किया जाता है। कार्बनिक मल्च धीरे-धीरे अपघटित होने के कारण मिट्टी की संरचना, जल निकासी और पोषक तत्वों को धारण करने की क्षमता में सुधार करने में भी मदद करती है।
क्षेत्र में किस उठा रहे लाभ:- ग्राम केसलोन में खूब सिंह कुशवाहा, सरपंच बाबूलाल कुशवाहा, परसोत्तम कुशवाहा आदि किसानों ने ड्रिप मल्चिंग पद्धति अपना कर खेती को लाभ का धंधा बनाया है। उद्यान विभाग द्वारा ड्रिप मल्चिंग पर 50 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है। जिससे कि किसानों को अधिक उत्पादन के लिए ड्रिप मल्चिंग का लाभ मिल सके।
उद्यान विभाग अधिकारी देवकी मरकाम एवं उमाशंकर कुशवाहा द्वारा कैसे लोन गांव पहुंचकर मल्चिंग पद्धति से ली जा रही फसल का निरीक्षण किया और अधिक उत्पादन करने के लिए सभी किसानों से कहा कि डिप मल्चिंग पद्धति से फसल उत्पादन करें।
यह विधि कृषि क्षेत्र में उत्पादकता बढ़ाने और फसलों की सुरक्षा में सहायक होती है। मल्चिंग से जल संरक्षण में मदद मिलती है और यह पर्यावरण के अनुकूल भी है। इस तकनीक से किसानों को खेती में कम श्रम और लागत में अधिक लाभ होता है। इसलिए, मल्चिंग आधुनिक कृषि प्रणाली में एक अनिवार्य तकनीक बन गई है।



