धार्मिक

हमें सत्यता का व्यवहार करना चाहिए : कमलेश शास्त्री

ब्यूरो चीफ शब्बीर अहमद

बेगमगंज । भोले शिव शंकर दरबार वार्ड 2 मकबरा मे चल रही श्री मद् भागवत महापुराण कथा के तृतीय दिवस में पं. कमलेश कृष्ण शास्त्री ने कहा – जो व्यक्ति मन, वचन व कर्म से सच्चाई का व्यवहार करता है। नम्रता, उदारता, सज्जनता एवं सत्य जिसके स्वभाव की शोभा है, वह व्यक्ति स्वयं भी अपनी दृष्टि में सम्मानित रहता है। अपनी दृष्टि में स्वयं सम्मानित व्यक्ति केवल वही हो सकता है जो कभी किसी के साथ छल-कपट नहीं करता है। किसी के धन पर दृष्टि डालना पाप समझता है। जो लोभ, लालच तथा स्वार्थ की भावना से पीड़ित नहीं है, उसका अपने प्रति यह विश्वास ही‌‌‍ आत्म-सम्मान का आधार होता है और वह समाज में यथोचित सत्यनिष्ठा के अनुरूप व्यवहार करता है। अपने सदाचरण से जिसने दूसरों के हृदय में अपने लिए सम्मान, सद्भाव एवं आदर उत्पन्न किया है तो दूसरों की वे भावनायें अदृश्य रूप में ऐसी शीतल, शाँतिदायक तथा आनन्दमयी विद्युत तरंगों को उत्पन्न करेंगी जो मानसिक स्वास्थ्य बनकर उस तक उसी प्रकार पहुँचती रहेंगी, जिस प्रकार चन्दन-वन के निकट खड़े व्यक्ति के पास शीतल मन्द सुगन्ध। उस स्वास्थ्यप्रद वातावरण में सदाचारी को जो सुख, शाँति एवं आह्लाद प्राप्त होगा, वह किसी स्वर्गिक आनन्द से कम न होगा। पृथ्वी का परमानन्द पाने के लिए मनुष्य को सत्यनिष्ठ, सन्मार्गगामी, सदाचारी तथा परोपकारी बनना ही चाहिये। दूसरों के लिए कुछ करने की भावना ही परोपकार है। परोपकार खेत में बोए जाने वाले बीज के समान है। जब परोपकार किया जाता है तो कुछ भी दिखाई नहीं देता है, परन्तु जब इसकी फसल पक जाती है तो यह सद्भावना एवं प्रेम के रूप में लहलहाने लगती है। अतः सफल व्यक्ति वह नहीं जिन्होंने अगणित धन-सम्पत्ति जमा कर ली हो या समाज में मान-सम्मान पाकर प्रतिष्ठा स्थापित कर ली हो, बल्कि परोपकार जेठ की दुपहरी में ठण्डी व शीतल छाँव के समान है जहाँ पर कुछ देर आराम और विश्राम किया जा सकता है। पूज्य “प्रभुश्री” जी ने कहा कि मनुष्य योनी मुक्ति व भवसागर पार होने के लिए है। धर्म के बिना जीवन का स्वरूप इहलोक व परलोक सिद्धि अमान्य है। धर्म ही सभी भाँति के पदार्थों व सुखों का समागम है। अर्थ की अधिकता मानव को व्यसनी व व्यभिचारी ना बना दे, इसके लिए धर्म का अंकुश अति आवश्यक है। अतः जब धर्म से कामनाएँ सीमित होगी, तब मोक्ष की प्राप्ति अवश्य होगी।

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