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Today Panchang आज का पंचांग शुक्रवार, 05 जुलाई 2024

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला मुख्यालय हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शुक्रवार 05 जुलाई 2024
05 जुलाई 2024 दिन शुक्रवार को आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि है। आज ही स्नान-दान एवं श्राद्धादि की भी अमावस्या का कर्म किया जाएगा। आज की अमावस्या शुभ वार अर्थात शुक्रवार की है इसलिए सुभिक्ष एवं प्रजा में सुख-शान्ति का योग बन रहा है।।
ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥
🌌 दिन (वार) – शुक्रवार के दिन दक्षिणावर्ती शंख से भगवान विष्णु पर जल चढ़ाकर उन्हें पीले चन्दन अथवा केसर का तिलक करें। इस उपाय में मां लक्ष्मी जल्दी प्रसन्न हो जाती हैं।
शुक्रवार के दिन नियम पूर्वक धन लाभ के लिए लक्ष्मी माँ को अत्यंत प्रिय “श्री सूक्त”, “महालक्ष्मी अष्टकम” एवं समस्त संकटो को दूर करने के लिए “माँ दुर्गा के 32 चमत्कारी नमो का पाठ” अवश्य ही करें ।
शुक्रवार के दिन माँ लक्ष्मी को हलवे या खीर का भोग लगाना चाहिए ।
शुक्रवार के दिन शुक्र ग्रह की आराधना करने से जीवन में समस्त सुख, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है बड़ा भवन, विदेश यात्रा के योग बनते है।
🌐 शुभ हिन्दू नववर्ष 2024 संवत्सर क्रोधी
📖 संवत्सर (उत्तर) कालयुक्त
🧾 विक्रम संवत 2081 विक्रम संवत
🔮 गुजराती संवत 2080 विक्रम संवत
☸️ शक संवत 1946 शक संवत
☪️ कलि संवत 5125 कलि संवत
🕉️ शिवराज शक 351
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर वर्षा ऋतु
🌤️ मास – आषाढ़ मास
🌑 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – शुक्रवार आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष अमावस्या तिथि 04:27 AM तक उपरांत प्रतिपदा
✏️ तिथि स्वामी : अमावस्या तिथि के देवता हैं अर्यमा जो पितरों के प्रमुख हैं। अमावास्या में पितृगणों की पूजा करने से वे सदैव प्रसन्न रहते हैं।
💫 नक्षत्र : नक्षत्र आद्रा 04:06 AM तक उपरांत पुनर्वसु
🪐 नक्षत्र स्वामी – आर्द्रा नक्षत्र का स्वामी राहु है। भगवान शिव के रुद्र रूप को आर्द्रा नक्षत्र का अधिपति देवता माना जाता है।
⚜️ योग : ध्रुव योग 03:48 AM तक, उसके बाद व्याघात योग
प्रथम करण : चतुष्पाद – 04:38 पी एम तक
द्वितीय करण : नाग – 04:26 ए एम, जुलाई 06 तक किंस्तुघ्न
🔥 गुलिक काल : – शुक्रवार को शुभ गुलिक प्रात: 7:30 से 9:00 तक ।
⚜️ दिशाशूल – शुक्रवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से दही में चीनी या मिश्री डालकर उसे खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -दिन – 10:30 से 12:00 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:29:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 07:23:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:08 ए एम से 04:48 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:28 ए एम से 05:29 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:58 ए एम से 12:54 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 02:45 पी एम से 03:40 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 07:22 पी एम से 07:42 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 07:23 पी एम से 08:24 पी एम
💧 अमृत काल : 06:01 पी एम से 07:38 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:06 ए एम, जुलाई 06 से 12:46 ए एम, जुलाई 06
सर्वार्थ सिद्धि योग : 04:06 ए एम, जुलाई 06 से 05:29 ए एम, जुलाई 06
🚓 यात्रा शकुन-शुक्रवार को मीठा दही खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम:।
💁🏻 आज का उपाय-लक्ष्मी मंदिर में इत्र चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-गूलर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार : देवपितृकार्ये अमावस/सर्वार्थसिद्धि योग/शुक्रोदय पश्चिम-(पंचांग भेद)स्वतंत्रता सेनानी अनुग्रह नारायण सिन्हा जन्म दिवस, राष्ट्रीय वर्कहॉलिक्स दिवस, लालजी सिंह जन्म दिवस, भारतीय नेता रामविलास पासवान जन्म दिवस, पालतू पशु स्मरण दिवस, हाथों के बिना काम करने का दिवस, राष्ट्रीय हवाई दिवस, कॉमिक सेन्स दिवस, राष्ट्रीय वर्कहोलिक्स दिवस, राष्ट्रीय हवाई दिवस, विश्व पर्यावरण दिवस, पेट रिमेंबरेंस डे (Pet Remembrance Day)
✍🏼 विशेष – अमावस्या को मैथुन एवं प्रतिपदा को कद्दू और कूष्माण्ड के फल का दान तथा भक्षण दोनों ही त्याज्य होता है। शास्त्रों में अमावस्या तिथि को सम्भोग वर्जित तिथि बताया गया है। अमावस्या तिथि एक पीड़ाकारक और अशुभ तिथि मानी जाती है। अमावस्या तिथि पितृगणों को समर्पित तिथि है अर्थात इसके स्वामी पितृगण हैं। यह केवल कृष्ण पक्ष में ही होती है तथा अशुभ फलदायिनी मानी जाती है।
🗼 Vastu tips 🗽
जीवन में विजय और प्रगति का द्वार” माना जाता है, मुख्य द्वार का मुख उत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा में होना चाहिए। इसे इस तरह से बनाया जाना चाहिए कि जब आप बाहर निकलें तो आपका मुख उत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा में हो।
आपके घर का मुख्य दरवाज़ा बेहतरीन गुणवत्ता वाली लकड़ी से बना होना चाहिए। यह आपके घर के दूसरे दरवाज़ों से ऊंचा होना चाहिए और सबसे आकर्षक दिखना चाहिए।
मुख्य द्वार के बाहर फव्वारा या कोई अन्य जल-केंद्रित सजावटी वस्तु लगाने से बचें।
मुख्य दरवाजे के बाहर जूता रखने की रैक या कूड़ेदान रखने से बचें।
मुख्य दरवाजे के पास शौचालय नहीं होना चाहिए।
सुनिश्चित करें कि मुख्य प्रवेश द्वार पर अच्छी रोशनी हो।
मुख्य द्वार को काले रंग से रंगने से बचें।
अपने दरवाजे को सुंदर नामपट्टिकाओं और शुभ तोरणों से सजाएं।
मुख्य द्वार के पास जानवरों की मूर्तियां या आकृतियां रखने से बचें।
सुनिश्चित करें कि आपका मुख्य दरवाजा घड़ी की सुई की दिशा में खुले।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
भूमि आंवला का जिगर, गुर्दे और मूत्राशय की समस्याओं, मधुमेह और आंतों के परजीवी के उपचार में उपयोग का एक लंबा इतिहास रहा है। सूरीनाम (दक्षिण अमेरिका का उत्तरपूर्वी भाग) में, भूमि आंवला को हमेशा जड़ी-बूटियों के बाजारों में ताजा और सूखे पौधों की सामग्री के रूप में बेचा जाता है। इसके काढ़े का उपयोग हर्बल स्नान में और प्रसव के बाद की ऐंठन, अस्थमा, गर्भाशय की शिकायतों और पेट दर्द के इलाज के लिए किया जाता है। अनेक लोक संस्कृतियों में इसका उपयोग मधुमेह, पेचिश, हेपेटाइटिस, मासिक धर्म संबंधी विकारों और त्वचा विकारों के उपचार में किया जाता है। इसका क्वाथ मूत्रल/मूत्रवर्धक होता है तथा मलेरिया, एनीमिया, रक्तशोधन और ज्वर में लाभकारी होता है।
🍃 आरोग्य संजीवनी ☘️
शुगर :- जिन व्यक्तियों को शुगर की समस्या हैं, वह मकोई के सूखे फलों का एक चम्मच चूर्ण बनाकर सुबह खाली पेट एक गिलास गुनगुने पानी के साथ पिये.
किडनी :- मकोय का पाउडर ओर सब्जी किडनी के लिए फायदेमंद होती है, जिन व्यक्तियों को किडनी की समस्या होती है उन्हे हफ्ते में कम से एक बार इस सब्जी को जरूर खानी चाहिए.
लिवर :- लीवर की समस्या से परेशान व्यक्तियों को मकोई के हरे फलों को निचोड़ कर उसके एक चम्मच रस को सुबह खाली पेट एक गिलास गुनगुने पानी में मिलाकर पिएं.
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
कालिदास बोले :- “माते पानी पिला दीजिए बड़ा पुण्य होगा” !
स्त्री बोली :- बेटा मैं तुम्हें जानती नहीं. अपना परिचय दो।
मैं अवश्य पानी पिला दूंगी।
कालिदास ने कहा :- मैं पथिक हूँ, कृपया पानी पिला दें।
स्त्री बोली :- “तुम पथिक कैसे हो सकते हो” ? , पथिक तो केवल दो ही हैं सूर्य व चन्द्रमा, जो कभी रुकते नहीं ! हमेशा चलते रहते हैं। तुम इनमें से कौन हो सत्य बताओ।
कालिदास ने कहा :- मैं मेहमान हूँ, कृपया पानी पिला दें।
स्त्री बोली :- “तुम मेहमान कैसे हो सकते हो” ? संसार में दो ही मेहमान हैं। पहला धन और दूसरा यौवन ! इन्हें जाने में समय नहीं लगता। सत्य बताओ कौन हो तुम ?
(अब तक के सारे तर्क से पराजित हताश तो हो ही चुके थे)
कालिदास बोले :- मैं सहनशील हूं। अब आप पानी पिला दें।
स्त्री ने कहा :- “नहीं, सहनशील तो दो ही हैं। पहली, धरती जो पापी-पुण्यात्मा सबका बोझ सहती है” ! उसकी छाती चीरकर बीज बो देने से भी अनाज के भंडार देती है, दूसरे पेड़ जिनको पत्थर मारो फिर भी मीठे फल देते हैं। तुम सहनशील नहीं। सच बताओ तुम कौन हो ?
(कालिदास लगभग मूर्च्छा की स्थिति में आ गए और तर्क-वितर्क से झल्लाकर बोले)
कालिदास बोले :- मैं हठी हूँ ।
स्त्री बोली :- “फिर असत्य. हठी तो दो ही हैं- पहला नख और दूसरे केश, कितना भी काटो बार-बार निकल आते हैं। सत्य कहें कौन हैं आप” ?
(पूरी तरह अपमानित और पराजित हो चुके थे)
कालिदास ने कहा :- फिर तो मैं मूर्ख ही हूँ ।
स्त्री ने कहा :- “नहीं तुम मूर्ख कैसे हो सकते हो।
मूर्ख दो ही हैं। पहला राजा जो बिना योग्यता के भी सब पर शासन करता है, और दूसरा दरबारी पंडित जो राजा को प्रसन्न करने के लिए ग़लत बात पर भी तर्क करके उसको सही सिद्ध करने की चेष्टा करता है” !
कुछ बोल न सकने की स्थिति में कालिदास वृद्धा के पैर पर गिर पड़े और पानी की याचना में गिड़गिड़ाने लगे)
वृद्धा ने कहा :- उठो वत्स ! (आवाज़ सुनकर कालिदास ने ऊपर देखा तो साक्षात माता सरस्वती वहां खड़ी थी, कालिदास पुनः नतमस्तक हो गए)
माता ने कहा :- शिक्षा से ज्ञान आता है न कि अहंकार । तूने शिक्षा के बल पर प्राप्त मान और प्रतिष्ठा को ही अपनी उपलब्धि मान लिया और अहंकार कर बैठे इसलिए मुझे तुम्हारे चक्षु खोलने के लिए ये स्वांग करना पड़ा !!
कालिदास को अपनी गलती समझ में आ गई और भरपेट पानी पीकर वे आगे चल पड़े।
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⚜️ अमावस्या को दूध का दान श्रेष्ठ माना जाता है। किसी कुआँ, तलाब, नदी अथवा बहते जल में दो-चार बूंद दूध डालने से कार्यों में आनेवाली परेशानियाँ दूर होती है। जौ दूध में धोकर नदी में प्रवाहित करने से सौभाग्य की वृद्धि होती है। इस तिथि को पीपल में जल देना परिक्रमा करना मिश्री दूध में मिलाकर अर्घ्य देना अत्यन्त शुभ फलदायी माना जाता है।
ऐसा करने से शनिदेव का प्रकोप कम होता है तथा भगवान नारायण एवं माँ लक्ष्मी कि पूर्ण कृपा प्राप्त होती है। अमावस्या को तुलसी और बिल्वपत्र नहीं तोड़ना चाहिये। आज घर की सफाई करना और कबाड़ बेचना शुभ माना जाता है। अमावस्या को भूलकर भी सम्भोग (स्त्री सहवास) नहीं करना चाहिये। घर के मन्दिर एवं आसपास के नजदीकी मन्दिर में तथा तुलसी के जड़ में सायंकाल में घी का दीपक जलाना चाहिये इससे लक्ष्मी माता प्रशन्न होती हैं।

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