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Today Panchang आज का पंचांग बुधवार, 24 जुलाई 2024

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला मुख्यालय हरियाणा मो. 9812224501
जय श्री हरि
🧾 आज का पंचांग 🧾
बुधवार 24 जुलाई 2024
ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात ।।
☄️ दिन (वार) – बुधवार के दिन तेल का मर्दन करने से अर्थात तेल लगाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है धन लाभ मिलता है।
बुधवार का दिन विघ्नहर्ता गणेश का दिन हैं। बुधवार के दिन गणेश जी के परिवार के सदस्यों का नाम लेने से जीवन में शुभता आती है।
बुधवार के दिन गणेश जी को रोली का तिलक लगाकर, दूर्वा अर्पित करके लड्डुओं का भोग लगाकर उनकी की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
🌐 संवत्सर क्रोधी
📖 संवत्सर (उत्तर) कालयुक्त
🧾 विक्रम संवत 2081 विक्रम संवत
🔮 गुजराती संवत 2080 विक्रम संवत
☸️ शक संवत 1946 शक संवत
☪️ कलि संवत 5125 कलि संवत
🕉️ शिवराज शक 351_

☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर वर्षा ऋतु
🌤️ मास – श्रावण मास
🌔 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – बुधवार श्रावण माह के कृष्ण पक्ष तृतीया तिथि 07:30 AM तक उपरांत चतुर्थी तिथि 04:40 AM तक उपरांत पंचमी
✏️ तिथि स्वामी : तृतीया तिथि के देवता हैं यक्षराज कुबेर। इस तिथि में कुबेर का पूजन करने से व्यक्ति धनवान बन जाता है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र शतभिषा 06:14 PM तक उपरांत पूर्वभाद्रपदा
🪐 नक्षत्र स्वामी – शतभिषा नक्षत्र स्वामी राहु है वहीं राशि स्वामी शनि है। तथा नक्षत्र देवता वरुण देव जी है।
⚜️ योग – सौभाग्य योग 11:10 AM तक, उसके बाद शोभन योग
प्रथम करण : विष्टि – 07:30 ए एम तक बव – 06:04 पी एम तक
द्वितीय करण : बालव – 04:39 ए एम, जुलाई 25 तक कौलव
🔥 गुलिक काल : – बुधवार को शुभ गुलिक 10:30 से 12 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – बुधवार को उत्तर दिशा में दिशा शूल होता है ।इस दिन कार्यों में सफलता के लिए घर से सुखा / हरा धनिया या तिल खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल : – बुधवार को राहुकाल दिन 12:00 से 1:30 तक । राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:21:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 06:39:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:15 ए एम से 04:57 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:36 ए एम से 05:38 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : कोई नहीं
🔯 विजय मुहूर्त : 02:44 पी एम से 03:39 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 07:17 पी एम से 07:38 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 07:17 पी एम से 08:19 पी एम
💧 अमृत काल : 11:39 ए एम से 01:07 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:07 ए एम, जुलाई 25 से 12:49 ए एम, जुलाई 25
🚓 यात्रा शकुन – हरे फ़ल खाकर अथवा दुध पीकर यात्रा पर निकले।
👉🏽 आज का मन्त्र – ॐ ब्रां ब्रीं ब्रों स: बुधय नमः।
💁🏻 आज का उपाय – गणेश मंदिर में मोदक चढ़ाएं।
🌳 वनस्पति तंत्र उपाय – अपामार्ग के वृक्ष में जल चढ़ाएं ।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – श्रीगणेश संकट चतुर्थी व्रत/ चन्द्रोदय 09.40/ पंचक जारी/ राष्ट्रीय थर्मल इंजीनियर दिवस, राष्ट्रीय टकीला दिवस, भारतीय अभिनेता मनोज कुमार जन्म दिवस, भारतीय व्यवसायी अज़ीम प्रेमजी जन्म दिवस, राष्ट्रीय ड्राइव-थ्रू दिवस और राष्ट्रीय चचेरे भाई दिवस, भूतपूर्व मुख्यमंत्री केशुभाई पटेल जन्म दिवस
✍🏼 विशेष – तृतीया तिथि में नमक का दान तथा भक्षण दोनों ही त्याज्य बताया गया है। तृतीया तिथि एक सबला अर्थात बल प्रदान करने वाली तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं यह तृतीया तिथि आरोग्यकारी रोग निवारण करने वाली तिथि भी मानी जाती है। इस तृतीया तिथि की स्वामिनी माता गौरी और इसके देवता कुबेर देवता हैं। यह तृतीया तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह तृतीया तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभफलदायिनी मानी जाती है।
🏘️ Vastu tips 🏚️
ईशान कोण का धार्मिक महत्व
धार्मिक दृष्टि से ईशान कोण को देवताओं का निवास स्थल माना जाता है। इसीलिए ईशान कोण में घर या दफ्तर का पूजा स्थल बनाने की सलाह ज्योतिष आचार्य श्री गोपी राम द्वारा दी जाती है, और इस दिशा में बैठकर पूजा करने को कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिशा में हमेशा सकारात्मक ऊर्जा का संचार बना रहता है। इसलिए वास्तु शास्त्र में भी और धर्म शास्त्रों में भी इस दिशा को बेहद शुभ और मंगलकारी माना गया है। अगर आप इस दिशा में साफ-सफाई बनाकर रखते हैं, घर का पूजा स्थल यहां बनाते हैं तो आपके जीवन में भी सकारात्मकता बनी रहती है।
ईशान कोण से जुड़ी कुछ जरूरी बातें
ईशान कोण देवताओं की दिशा है इसलिए बाथरूम, जुते-चप्पल रखने की जगह, स्टोर रूप इस जगह नहीं बनाना चाहिए।
इस दिशा भारी चीजें रखने से भी आपको बचना चाहिए।
यह जगह जितनी खुली और साफ रहेगी उतना आपको लाभ होगा।
इस दिशा में देवी-देवताओं की तस्वरी रखने से लाभ मिलता है।
❇️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
◆ किडनी – भूलकर भी खड़े होकर गिलास का पानी ना पिये। गिलास एक रेखीय होता है तथा इसका सर्फेसटेन्स अधिक होता है । गिलास अंग्रेजो ( पुर्तगाल) की सभ्यता से आयी है अतः लोटे का पानी पियें, लोटे का कम सर्फेसटेन्स होता है।
◆ अस्थमा , मधुमेह , कैंसर से गहरे रंग की वनस्पतियाँ बचाती हैं।
◆ वास्तु के अनुसार जिस घर में जितना खुला स्थान होगा उस घर के लोगों का दिमाग व हृदय भी उतना ही खुला होगा।
◆ परम्परायें वहीँ विकसित होगीं जहाँ जलवायु के अनुसार व्यवस्थायें विकसित होगीं।
◆ पथरी – अर्जुन की छाल से पथरी की समस्यायें ना के बराबर है।
◆ RO का पानी कभी ना पियें यह गुणवत्ता को स्थिर नहीं रखता । पानी की सफाई के लिए सहिजन की फली सबसे बेहतर है।
◆ सोकर उठते समय हमेशा दायीं करवट से उठें या जिधर का स्वर चल रहा हो उधर करवट लेकर उठें।
◆ पेट के बल सोने से हर्निया, प्रोस्टेट, एपेंडिक्स की समस्या आती है।
◆ भोजन के लिए पूर्व दिशा , पढाई के लिए उत्तर दिशा बेहतर है।
◆ HDL बढ़ने से मोटापा कम होगा LDL व VLDL कम होगा।* ◆ गैस की समस्या होने पर भोजन में अजवाइन मिलाना शुरू कर दें। 💉 आरोग्य संजीवनी 🩸
रात को आधा चम्मच त्रिफला एक कप पानी में डाल कर रखें!सुबह कपड़े से छान कर इस जल से आंखें धोएं, चश्मा उतर जाएगा। छानने के बाद जो पाउडर बचे उसे फिर एक गिलास पानी में डाल कर रख दें!रात को पी जाएं!पेट साफ होगा कोई रोग एक साल में नहीं रहेगा
रात का भिगोया आधा चम्मच कच्चा जीरा सुबह खाली पेट चबा कर वही पानी पिएं एसिडिटी खतम!
चौथाई चम्मच दालचीनी का कुल उपयोग दिन भर में किसी भी रूप में करने पर निरोगता अवश्य होगी!
सर्दियों में नाखून के बराबर जावित्री कभी चूसने से सर्दी के असर से बचाव होगा!
सर्दी में बाहर जाते समय 2 चुटकी अजवायन मुहं में रखकर निकलिए सर्दी से नुकसान नहीं होगा!
रस निकले नीबू के चौथाई टुकड़े में जरा सी हल्दी! नमक फिटकरी रख कर दांत मलने से दांतों का कोई भी रोग नहीं रहेगा!
कभी – कभी नमक – हल्दी में 2 बून्द सरसों का तेल डाल कर दांतों को उंगली से साफ करें दांतों का कोई रोग टिक नहीं सकता!
बुखार में 1 लीटर पानी उबाल कर 250 ml कर लें, साधारण ताप पर आ जाने पर रोगी को थोड़ा थोड़ा दें, दवा का काम करेगा!
सुबह के खाने के साथ घर का जमाया देशी गाय का ताजा दही जरूर शामिल करें! प्रोबायोटिक का काम करेगा!
📖 गुरु भक्ति योग_
🕯️
शिव पुराण में शिव को विद्येश्वर भी कहा गया हैं इसका अर्थ हैं सारी विद्याओं के मालिक देवताओं के गुरु बृहस्पति, दैत्यों के गुरु शुक्राचार्य और पूरे मानव समाज को बनाने वाले सप्तऋषियों के गुरु भगवान शिव ही हैं। इन्हें आदिगुरु माना गया हैं- योग, ज्योतिष, तंत्र और चिकित्सा ये सारी विद्याएं शिव की ही हैं। एक पौराणिक कहानी हैं कि- समुद्र मंथन के बाद जब भगवान विष्णु ने देवताओं को मोहिनी रूप बनाकर सारा अमृत पिला दिया तो दैत्य न्याय के लिए शिव के पास पहुंचे ”शिव के लिए सभी समान थे” दैत्यों के राजा बलि ने भगवान शिव को पूरी बात बताई और ये कहा कि- देवताओं ने सारा अमृत पी लिया और अमर हो गए अब वो हम दैत्यों के लिए खतरा हो गए हैं। भगवान शिव ने पूरी स्थिति को समझा और ये कहा कि- देवताओं को ऐसा नहीं करना चाहिए था अगर बात अमृत को बराबर बांटने की हुई थी तो उन्हें इस बात पर खरा उतरना था भगवान शिव ने दैत्यों के गुरु शुक्राचार्य को उस समय मृत संजीवनी विद्या दी जिससे वो किसी ऐसे व्यक्ति को भी जिंदा कर सकते थे जिसे मारकर जला दिया गया हो और सिर्फ राख ही बची हो उस राख से भी फिर उस व्यक्ति को जिंदा किया जा सकता था।
शिव नीलकंठ यानी जिसका गला नीला हो ये कहानी भी समुद्र मंथन की ही हैं- जब देवता और दानवों ने समुद्र का मंथन शुरू किया तो सबसे पहले उसमें से “हलाहल” नाम का विष निकला ये जहर इतना तेज था कि सृष्टि का विनाश होने लगा तब भगवान विष्णु ने सारे देवताओं और दानवों को भगवान शिव से प्रार्थना करने की सलाह दी सबकी रक्षा के लिए शिव आगे आए और सारा विष पी गए उसे ना मुंह में रखा ना ही पेट में उतारा बस गले में अटका लिया विष के असर से उनका गला नीला पड़ गया और वे नीलकंठ कहलाए। वास्तव में ये नीला रंग ये विष बुराई का प्रतीक हैं, शिव नीलकंठ हैं- {क्योंकि वे बुराई को स्वीकार करने के बाद उसे अपने गले में ही रोक लेते हैं ना बाहर निकालते हैं कि दुनिया पर उसका कोई बुरा असर हो ना ही उसे खुद अपने पेट तक जाने देते हैं जिससे कि उनके शरीर पर उसका कोई बुरा असर हो} शिव का नीलकंठ स्वरूप ये सिखाता हैं कि- आप बुराई का असर ना खुद पर होने दें ना ही समाज में फैलने दें उसे ऐसी जगह रोक लें जहां से वो आगे ना बढ़ पाए इस काम में जो भी सक्षम हैं वो शिव का ही रूप हैं।
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⚜️ तृतीया तिथि केवल बुधवार की हो तो अशुभ मानी जाती है। अन्यथा इस तृतीया तिथि को सभी शुभ कार्यों में लिया जा सकता है। आज तृतीया तिथि को माता गौरी की पूजा करके व्यक्ति अपनी मनोवाँछित कामनाओं की पूर्ति कर सकता है। आज तृतीया तिथि में एक स्त्री माता गौरी की पूजा करके अचल सुहाग की कामना करे तो उसका पति सभी संकटों से मुक्त हो जाता है। आज तृतीया तिथि को भगवान कुबेर जी की विशिष्ट पूजा करनी चाहिये। देवताओं के कोषाध्यक्ष की पूजा आज तृतीया तिथि को करके मनुष्य अतुलनीय धन प्राप्त कर सकता है।
तृतीया तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति मानसिक रूप से अस्थिर होता है अर्थात उनकी बुद्धि भ्रमित होती है। इस तिथि का जातक आलसी और मेहनत से जी चुराने वाला होता है। ये दूसरे व्यक्ति से जल्दी घुलते मिलते नहीं हैं बल्कि लोगों के प्रति इनके मन में द्वेष की भावना भी रहती है। इनके जीवन में धन की कमी रहती है, इन्हें धन कमाने के लिए काफी मेहनत और परिश्रम करना पड़ता है।

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