पूर्णिमा पर मनाया गया तुलसी विवाह महोत्सव: गाजे बाजे से निकाली बारात, तुलसी विवाह की रस्में निभाई

रिपोर्टर : शिवकुमार साहू
सिलवानी । बारात श्री अयोध्या धाम से श्री श्री 1008 अंनत श्री विभूषित रसिक पीठाधीश्वर महान्त जन्मेजय शरण जी महाराज जानकी घाट,बड़ास्थान अयोध्या धाम से तहसील सिलवानी के ग्राम सांईखेड़ा में मनमोक दूल्हे के रूप में सजे शालिग्राम जी के साथ साधु संत रथों पर सवार ग्राम में आगमन हुआ जो श्री राय मैरिज गार्डन से श्रीहरि विष्णु भगवान/शालीग्राम की बारात गाजे बाजे डीजे के साथ ग्राम के चल समारोह मार्ग से निकलते हुए श्री लक्ष्मीनारायण बड़ा मंदिर आयोजन स्थल पहुंची । सिलवानी तहसील के ग्राम साईखेड़ा में दिनांक 13, 14, 15 नवंबर 2024 को हुआ विशाल आयोजन जहां रही हजारों भक्तों कि भक्ति, श्रद्धा, उत्साह उमंग के साथ ग्राम सांईखेड़ा में तुलसी विवाह,भगवान विष्णु के शालिग्राम स्वरूप और माता तुलसी जी के ग्यारह सौ तुलसी शालिग्राम जोड़ा विवाह का विशाल आयोजन जो श्री लक्ष्मीनारायण बड़ा मंदिर आयोजन स्थल को पहुंची इस दौरान ग्राम में लगभग पिछले एक माह से ग्रामीणों में उत्साह बना हुआ था जिसके चलते माताओं ने अपने अपने घरों के सामने रंगोली सज़ा कर दीप जलाकर कल कलश, फूल बिछा रखे थे महिलाओं ने पुष्प वर्षा कर बारात की अगवानी की। बारात स्वागत में तुलसी पक्ष से श्री लक्ष्मीनारायण बड़ा मंदिर पुजारी शिवकुमार शुक्ला एवम् समस्त ग्रामवासी एवम् क्षेत्रवासियों ने भव्य स्वागत किया स्वागत टीका रश्म के बाद दूल्हे बने श्री हरि विष्णु का मंडप में आगमन हुआ।
विशेष अतिथि में राष्ट्रीय कथा वाचक विपिन बिहारी जी ने माता-पिता एवं गौ माता पर जोर देते हुए अपने-अपने घरों में सेवा भाव रखने को लेकर विशेष जोर दिया उन्होंने मनुष्य समाज को इन बातों पर ध्यान देने को कहा इन से घरों में हमेशा लक्ष्मी की कृपा सुख शांति बनी रहेगी
इसके साथ ही समस्त संत समाज का विशाल समागम हुआ । जिनके दर्शन को समस्त भक्तगण दर्शनों को लालायित दिखे । कार्यक्रम में पूर्व कैबिनेट मंत्री ठाकुर रामपाल सिंह राजपूत, सिलवानी विधायक देवेन्द्र पटेल, एवं बरेली के पूर्व विधायक देवेंद्र पटेल गडरवास ने सम्मिलित हुए और बारातियों का पुष्प अर्पण कर स्वागत किया साथ ही बने जजमानों को शुभकामनाएं प्रेषित की।
नमन महंत देहगांव, आचार्य विपिन तिवारी, आचार्य सत्यम मिश्रा रिंकू शास्त्री के द्वारा वेद मंत्र उच्चारण कर पाणिग्रहण संस्कार संपन्न कराया
तुलसी विवाह से जुड़ी मान्यताएं और कथाएंः
पौराणिक कथा के मुताबिक, एक बार माता तुलसी ने भगवान विष्णु को नाराज़ होकर श्राप दिया था कि वे काला पत्थर बन जाएं. इस श्राप से मुक्ति पाने के लिए भगवान विष्णु ने शालिग्राम पत्थर के रूप में अवतार लिया और तुलसी से विवाह किया।
पद्म पुराण के मुताबिक, तुलसी जी लक्ष्मी का ही रूप हैं और भगवान विष्णु ने शालिग्राम का रूप लिया था।
तुलसी विवाह करने से घर में समृद्धि और सुख बढ़ता है.
तुलसी विवाह करने से पति-पत्नी के बीच प्यार बना रहता है और हर तरह की दिक्कतें दूर हो जाती हैं।
तुलसी विवाह करने से कुंवारी लड़कियों को मनचाहा वर मिलता है। जिस घर में तुलसी का पौधा होता है, वहां मां लक्ष्मी-नारायण की कृपा बनी रहती है।
जिस घर में तुलसी का पौधा होता है, वहां मां लक्ष्मी-नारायण की कृपा बनी रहती है।
भगवान शालिग्राम की पूजा का महत्व
श्रीमद देवी भागवत के अनुसार, कार्तिक महीने में भगवान विष्णु को तुलसी पत्र अर्पण करने से 10,000 गायों के दान का फल प्राप्त होता है। वहीं शालिग्राम का नित्य पूजन करने से भाग्य बदल जाता है। तुलसी दल, शंख और शिवलिंग के साथ जिस घर में शालिग्राम होता है, वहां पर माता लक्ष्मी का निवास होता है।



