डीएपी के लिए भटक रहे एक महीने से किसान, खुलेआम बिलोचियों की बहार, 1850 में बेंच रहे

तीन बार आ चुके तहसील कार्यालय
न पक्ष के नेता किसानों के साथ न विपक्ष के नेता ।
रिपोर्टर : विनोद साहू
बाड़ी । इसे क्षेत्र के किसानों की खुश नसीबी कहे या बदनसीबी की क्षेत्र हमेशा दो दशक से सरकार के साथ कंधें से कंधा मिलाकर भाजपा सरकार के साथ खड़ा रहा हैं विषम परिस्थितियों में भी क्षेत्रीय विधायक को सम्मानजनक पिछला रिकॉर्ड तोड़ते हुए जिताया और लोकसभा चुनाव में क्षेत्रीय सांसद के रुप में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान को देश में दूसरे नंबर की प्रचंड मतों से जीत दिलाई जो आज केन्द्रीय सरकार में कृषि मंत्री बने हुए हैं और क्षेत्र के किसानों की बदकिस्मती देखिए की एक माह में तीन बार तहसील कार्यालय आकर भी उन्हें पांच बोरी डीएपी रात रात भर जागकर भी नसीब नहीं हो रही ।
किसानों ने लगाया ब्लेक का आरोप ।
किसानों ने कहा कि खुलेआम बिलोचिये 1800 सो से 1850 रुपए में यह डीएपी कहां से उपलब्ध हो रही यह ब्लेक में कैसे आ रही क्योंकि इस खेल में दबंग राजनेता और दबंग किसानों की मूक सहमति नजर आ रही है।
न पक्ष न विपक्ष किसान बेसहारा।
तीन बार तहसील कार्यालय में किसानों के पक्ष में समाजसेवी ही खड़े नजर आये न कोई विपक्ष का नेता किसानों के साथ खड़ा हैं और न पक्ष का नेता। क्योंकि इन्हें एक फोन पर भरपूर डीएपी यूरिया खाद उपलब्ध हो जाता हैं जिससे यह अज्ञातवास पर साधना के लिए भूमिगत हो जाते हैं।
दूसरी तरफ तहसील कार्यालय में तहसीलदार महोदय विश्वास दिलाते हैं कि डीएपी की कमी के चलते यह स्थिति बन रही है अभी दो गाड़ी आई हैं जो कल से बटेंगी लेकिन किसानों की जमीन खाली पड़ी हैं जितनी भी देर होगी किसान उतना ही परेशान होगा ।
आश्चर्य जनक किंतु सत्य।
ऐसा नहीं हैं कि क्षेत्र के नेता भूमिहीन हो अमूमन सभी नेता बड़े किसान हैं और उन्हें कभी डबल लाक गोदाम में खड़े नहीं देखा और न उन्हें डीएपी खाद यूरिया की कमी आई । ऐसे में वास्तविक किसान ही जमीनी स्तर पर महज दो पांच बोरी डीएपी के लिए एक महीने से जद्दोजहद करते नजर आ रहे हैं।



