अगले 6 माह में पूरी होगी 223 करोड की ढीमरखेड़ा माइक्रो उद्ववहन सिंचाई योजना

सांसद हिमाद्री सिंह को विभाग ने दी जानकारी
रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान। भारी लेटलतीफी का शिकार 223 करोड लागत की ढीमरखेड़ा उद्वहन सिंचाई परियोजना अगले 6 माह में यानी जून 2025 में पूरी होगी। जिसके बाद किसानों को योजना के माध्यम से खेतों में सिंचाई सुविधा का लाभ मिलेगा। यह जानकारी शहडोल सांसद हिमाद्री सिंह द्वारा संभागीय बैठक जबलपुर में दिए गये सुझाव पत्र में विभागीय अधिकारियों ने प्रतिवेदन में कही गई है। जिसमें विभाग द्वारा अवगत कराया गया कि कार्य हेतु पर्यावरण स्वीकृति 2018 में वन विभाग की स्वीकृति, 2020 में रेलवे क्रासिंग स्वीकृति मई 2022 में प्राप्त होने से कार्य विलंब से प्रारंभ हो पाया । शासन द्वारा धीमी प्रगति पर निर्माण एजेंसी पर 10 प्रतिशत शास्ति अधिरोपित की गई है । वर्तमान में 97 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो गया है। तथा पूर्णतः लक्ष्य जून 2025 है। सासंद प्रतिनिधि पदमेश गौतम ने बताया कि सांसद हिमाद्री सिंह द्वारा समीक्षा बैठक में तहसील बड़वारा में उपखंड अधिकारी की पदस्थापना, ढीमरखेड़ा क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित ग्रामों की क्षतिग्रस्त प्रधानमन्त्री सड़कों एवं पुलों का जीर्णोद्धार, उमरियापान में बाढ़ के कारण नष्ट हो चुके पान बरेजों की राहत राशि, भारत के भौगौलिक मध्य केंद्र बिन्दु करौंदी के आसपास की भूमि को कब्ज़ा मुक्त कराने, राजस्व निरीक्षक मंडल खमतरा में राजस्व न्यायालय स्थापित किए जाने, ढीमरखेड़ा में किसानो के लिए उर्वरक भंडारण हेतु डबल लॉक केंद्र स्थापित करने, ग्राम बड़वारा एवं खमतरा में कौशल विकास केंद्र स्थापित किए जाने, किसानों को कृषि कार्य हेतु एक शिफ्ट में लगातार 10 घंटे विद्युत प्रदान करने, पानउमरिया उपमंडी को कृषि मंडी के रूप में परिवर्तित किए जाने के संबंध में जानकारी चाही गई है। जिस पर संबंधित विभाग के अधिकारियों ने बिंदुवार प्रतिवेदन दिया है। गौरतलब है उक्त सिंचाई योजना के तहत ढीमरखेड़ा तहसील क्षेत्र के 96 गांवों में खेतों तक नर्मदा का पानी पहुंचाने के लिए 120 किलोमीटर पाइपलाइन के माध्यम से करीब 11419 हजार हेक्टेयर भूमि में सिंचाई का लक्ष्य रखा गया है। नर्मदा दांयी तट नहर में पंप हाउस स्थापित कर मशीनों के माध्यम से पानी को लिफ्ट कर पाइपों के माध्यम से खेतों तक पहुंचाने की योजना है । प्रोजेक्ट में 1.1 मीटर व्यास से लेकर 0.3 मीटर व्यास की पाइप लाइन बिछाने का काम चल रहा है। इस परियोजना में 6.85 मेगावाट क्षमता के विद्युत पंप स्थापित करना, चार स्थानों पर पंप हाउस का निर्माण शामिल हैं। पम्पों से पांच हजार लीटर पानी प्रति सेकेंड सप्लाई किया जाना है । माइको उद्वहन परियोजना का निर्माण चार जोन में किया जा रहा है। खमतरा स्कीम, कोठी स्कीम, जिर्री और सैलारपुर स्कीम इसमें शामिल है । कोठी स्कीम के तहत 22 गांवो की 3728 हेक्टेयर भूमि में सिंचाई का लक्ष्य रखा गया है। इसी तरह से खमतरा स्कीम के तहत 34 गांवों की 5045 हेक्टेयर, जिर्री स्कीम में 19 गांवों की 3272 हेक्टेयर, सैलारपुर स्कीम में 3914 हैक्टेयर भूमि में सिंचाई का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।



