भागवत कथा का दूसरा दिनः प्रभु से बढ़कर कोई सुख और सम्पदा नहीं : शास्त्री
सिलवानी। ग्राम पंचायत सिंगपुरी उचेरा में बालमुकुन्द यादव (बाबूजी), सेवानिवृत्त पोस्ट मास्टर एवं महेंद्र पाल यादव (सरपंच प्रतिनिधि) के द्वारा आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के द्वितीय दिवस श्रद्धा और भक्ति का वातावरण बना रहा। कथा के दौरान अमर कथा एवं शुकदेव जी के जन्म प्रसंग का विस्तार से वर्णन किया गया।
कथा वाचक पंडित रेवाशंकर शास्त्री (मवई वालों) ने कथा की शुरुआत करते हुए कहा कि आप सभी पर ठाकुर जी की विशेष कृपा है, तभी आप श्रीमद् भागवत कथा का रसपान कर पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिन्हें गोविन्द जितना प्रदान करते हैं, उन्हें उतना ही प्राप्त होता है। यदि श्रद्धालु भागवत कथा में प्यासे भाव से, कुछ सीखने और पाने की भावना लेकर आते हैं, तो यह कथा उन्हें बहुत कुछ प्रदान करती है।
उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन सांसारिक भोग-विलास के लिए नहीं, बल्कि कृष्ण भक्ति के लिए मिला है। आज का मानव भगवान की भक्ति छोड़कर विषय-वस्तुओं के भोग में उलझा हुआ है, जबकि मानव जीवन का परम उद्देश्य कृष्ण प्राप्ति है। यदि हम यह दृढ़ निश्चय कर लें कि जीवन में कृष्ण को पाना ही है, तो प्रभु से बढ़कर कोई अन्य सुख, संपत्ति या सम्पदा नहीं है।
पंडित शास्त्री ने कहा कि भागवत कथा श्रवण करने वालों का सदैव कल्याण होता है। कथा के समय स्वयं श्रीकृष्ण भक्तों से मिलने आते हैं। जो भी भागवत के तट पर आकर विराजमान होता है, भागवत उसका सदैव मंगल करती है। यह कथा जाति और मजहब का भेद किए बिना भक्तों को मनवांछित फल प्रदान करती है और जो कुछ न मांगे, उसे मोक्ष की ओर अग्रसर करती है।
कथा के द्वितीय दिवस बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और भक्ति भाव से कथा श्रवण कर पुण्य लाभ अर्जित किया।


