विद्यार्थियों को जैविक खेती, फसल प्रबंधन और मिट्टी परीक्षण का दिया प्रशिक्षण

कृषि को लाभ का धंधा बनाने के लिए कम लागत तकनीकी और पोषक तत्वों की दी जानकारी
रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान। विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ आर्थिक रूप से सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से व्यावसायिक शिक्षा के अंतर्गत कृषि विषय का अध्ययन कर रहे विद्यार्थियों को जैविक खेती का तकनीकी प्रशिक्षण दिया गया । शासकीय आर.के. गौतम उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मुरवारी, जनपद पंचायत ढीमरखेड़ा में आयोजित प्रशिक्षण प्राचार्य संघ रत्न भेलावे के मार्गदर्शन में जैविक कृषि विशेषज्ञ रामसुख दुबे द्वारा प्रदान किया गया।
प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों को कम लागत तकनीक, जीरो बजट फार्मिंग तथा वैज्ञानिक पद्धति अपनाकर कृषि को लाभ का व्यवसाय बनाने की जानकारी दी गई । विद्यार्थियों को फसलों की कृषि कार्यमाला के अनुसार खेती करने की तकनीकी जानकारी देते हुए जलवायु, मौसम, मिट्टी, उन्नत बीज एवं बीज दर, बीज उपचार, जैविक खाद, कीट नियंत्रण, जैविक कीटनाशक, सिंचाई, कटाई, गहाई एवं भंडारण सहित विभिन्न कृषि कार्यों के बारे में विस्तार से समझाया गया।
*पोषक तत्वों और कीट नियंत्रण की दी जानकारी*
प्रशिक्षण में पौधों के लिए आवश्यक पोषक तत्वों का वर्गीकरण करते हुए हवा एवं पानी से प्राप्त होने वाले पोषक तत्व, मुख्य पोषक तत्व, द्वितीयक पोषक तत्व एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों की जानकारी दी गई। साथ ही फसलों में लगने वाले विभिन्न प्रकार के कीटों की पहचान और उनके नियंत्रण के उपाय बताए गए । विद्यार्थियों को काटने वाले, कुतरने वाले, रस चूसक एवं फल छेदक कीटों के बारे में भी जानकारी दी गई।
*मिट्टी परीक्षण के लिए नमूना लेने की विधि बताई*
कृषि विशेषज्ञ रामसुख दुबे ने विद्यार्थियों को मिट्टी परीक्षण के महत्व से अवगत कराते हुए खेत से मिट्टी का नमूना लेने की सही एवं वैज्ञानिक विधि की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मिट्टी की जांच के आधार पर फसल के लिए आवश्यक पोषक तत्वों की पूर्ति की जा सकती है, जिससे अनावश्यक खाद के उपयोग में कमी आती है और खेती की लागत भी कम की जा सकती है।
प्रशिक्षण में जैविक खेती के माध्यम से कृषि लागत कम करने, पैसों की बचत करने तथा बाजार पर निर्भरता घटाने पर विशेष जोर दिया गया। विद्यार्थियों को बताया गया कि वैज्ञानिक एवं जैविक तकनीकों को अपनाकर खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाया जा सकता है ।
प्रशिक्षण को सफलतापूर्वक संपन्न कराने में व्यावसायिक शिक्षक महेंद्र दोहरे ने सहयोग प्रदान किया।



