सब्जी उत्पादन की ओर बढ़ रहा किसानों का रुझान
व्यूरो चीफ : शब्बीर अहमद
बेगमगंज । क्षेत्र के किसान सोयबीन, धान और गेहूं की परंपरागत खेती की बढ़ती लागत और घटते लाभ की वजह से इससे मुंह मोड़ रहे हैं। सब्जियों के दिनों दिन महंगी होने और इसकी खेती करने वाले किसानों को मोटा मुनाफा कमाते देख परंपरागत खेती करने वाले किसानों का रुझान भी अब सब्जी की खेती की ओर बढ़ रहा है। उद्यान विभाग इसे सुखद संकेत मान रहा है। किसानों का कहना है कि सब्जी की खेती के भंडारण की व्यवस्था हो तो और अधिक लाभ कमाया जा सकता है।
चुरक्का परासरी के किसान पुष्पेंद्र कुशवाहा ने परंपरागत खेती को छोड़कर 1 एकड़ में टमाटर आधा एकड़ मे़ सेम, 1 एकड़ मैं बैगन की फसल ली है जिससे वह प्रतिदिन 10 से ₹15000 की बिक्री प्रतिदिन कर रहे हैं। क्षेत्र के अन्य किसानों को देखकर उन्हें या फिर ना मिली उन्होंने भरेरु के सफल किसान सुरेंद्र सिंह कुशवाहा से प्रेरित होकर यह कदम उठाया। तहसील में सब्जी की खेती किसानों की समृद्धि का द्वार खोल रही है। सब्जी की खेती का रकबा हर साल बढ़ रहा है। इसे बढ़ावा देने के लिए उद्यान विभाग बीज और उर्वरक आदि पर अनुदान देने के साथ सब्जी की खेती के लिए प्रशिक्षण भी देता है। इसका असर दिखाई देने लगा है। तहसील के भुरेरू, कल्याणपुर, चौका, खैरी, भोजपुर, कीरतपुर, कोकलपुर, हप्सिली, कोलुआ, ध्वाज, खेजड़ा, बिजोरा, सागोनी, माला, चंदोरिया, मानपुर, ढिमरोली, महुआ खेड़ा घोघरी, खजुरिया, सेमरा, कोहनिया सहित विभिन्न क्षेत्रों के किसान बड़े पैमाने पर आलू, गोभी, करेला, लौकी, मिर्च, आलू और भिंडी आदि सीजनल सब्जियां उगा कर अच्छा लाभ कमा रहे हैं। यही कारण है कि सोयाबीन,धान व गेहूं की परंपरागत खेती करने वाले किसान भी उनसे प्रेरणा लेकर अब सब्जी की खेती की ओर मुड़ रहे हैं।
जनपद क्षेत्र के भुरेरु निवासी सब्जी उत्पादक किसान सुरेन्द्र कुशवाहा का कहना है कि बैंगन, हरी मिर्च टमाटर तथा बंद गोभी सहित अन्य सब्जियों से अच्छी आय हो जा रही है। यह जरूर है कि भंडारण की व्यवस्था नहीं होने से इसे अधिक समय तक रख नहीं सकते हैं।
शहर के रामनगर इलाके में सब्जी उत्पादक किसान जोगी दोनों पैरों से विकलांग है मुकेश पटेल उन्होंने भी खेती के क्षेत्र में कई आविष्कार कर जिले व प्रदेश से कई पुरस्कार हासिल किए हैं वह कई लोगों को रोजगार देकर सब्जी उत्पादन में प्रेरणा स्त्रोत बने हुए हैं। स्वयं तो लाभ कमा ही रहे हैं दूसरों को रोजगार देने का जरिया भी बने हैं। उनका कहना है कि माता-पिता परंपरागत खेती करते थे जिससे खर्चा ही मुश्किल से निकल पाता था जब से सब्जी उत्पादन एवं वैज्ञानिक तरीके से खेती शुरू की है तब से खेती लाभ का धंधा बन गई है।
उद्यान अधिकारी रमाकांत शर्मा ने बताया कि जैविक खेती एवं सब्जी उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए उद्यान विभाग की तरफ से बीज, उर्वरक अनुदान पर दिया जाता है। किसानों को समय-समय पर प्रशिक्षण दिया जाता है। आलू और प्याज के लिए भंडारण की सुविधा है। अन्य हरी सब्जियों के भंडारण करने पर विचार किया जा रहा है।



