कृषि

बदलते मौसम से किसानों की बढ़ी चिंता, फसलों को नुकसान का खतरा

सिलवानी । क्षेत्र में मौसम के लगातार बदलते मिजाज ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। शुक्रवार दोपहर हुई बारिश और हल्की ओलावृष्टि से खेतों में खड़ी और कटी फसलों को नुकसान पहुंचा है। कई स्थानों पर तेज हवा के कारण पकी हुई गेहूं की फसल गिर गई, जिससे किसानों को समय से पहले कटाई कराने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
शनिवार और रविवार को भी आसमान में बादल छाए रहने से किसानों की परेशानी और बढ़ गई है। जिन किसानों की फसल कटकर खेतों में पड़ी है, वे उसे जल्द से जल्द समेटने में जुट गए हैं ताकि संभावित बारिश से बचाया जा सके।
महंगे हार्वेस्टर से बढ़ा खर्च
ग्राम खमेरा के किसान राम सिंह आदिवासी ने बताया कि मौसम खराब होने की आशंका के कारण उन्हें महंगे किराए पर हार्वेस्टर लेकर गेहूं की कटाई करानी पड़ रही है, जबकि फसल पूरी तरह पक भी नहीं पाई है। उन्होंने कहा कि यदि तेज आंधी या बारिश होती है तो पूरी फसल बर्बाद हो सकती है।
‘खाई और कुएं’ जैसी स्थिति में किसान
ग्राम सिंह पुरी के किसान महेंद्र यादव ने बताया कि किसानों की स्थिति बेहद कठिन हो गई है। उन्हें इस बार अच्छी पैदावार की उम्मीद थी, लेकिन हाल की बारिश और तेज हवा से गेहूं की फसल गिर गई है। इससे दाना हल्का होने की आशंका भी बढ़ गई है, जिससे बाजार में कम दाम मिल सकते हैं।
कटाई और थ्रेसिंग में बढ़ी परेशानी
क्षेत्र में लगभग 50 प्रतिशत फसलों की कटाई हो चुकी है, जबकि बाकी फसलें अभी खेतों में हैं। मौसम बिगड़ने की आशंका के चलते किसान जल्द से जल्द कटाई कराने के लिए हार्वेस्टर चालकों के चक्कर लगा रहे हैं।
वहीं चना और सरसों की फसल की थ्रेसिंग के लिए मजदूरों की मांग बढ़ गई है। मजदूरी दर भी बढ़कर 300-350 रुपये से 450-500 रुपये तक पहुंच गई है, जिससे किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
बारिश से कटी फसलें हुईं खराब
हाल की बारिश से कई जगह फसलें भीग गई हैं। जहां ओलावृष्टि नहीं हुई, वहां भी पानी पड़ने से गेहूं का रंग प्रभावित हुआ है, जिससे उसके दाम कम मिलने की संभावना है।
किसान कमलेश आदिवासी ने बताया कि खेतों में पड़ी चने की फसल भीग चुकी है और अब उसे सुखाने के लिए धूप का इंतजार करना पड़ रहा है। यदि दोबारा बारिश होती है तो फसलों में नमी बढ़ने से दाना खराब होने और कालापन आने का खतरा है।

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