होलिका पर भद्रा, दहन के लिए सिर्फ सवा घंटा, 17 मार्च को जलेगी होली

सिलवानी। 17 मार्च को होलिका दहन के लिए लोगों के पास केवल एक घंटा 10 मिनट का समय रहेगा। इस दिन दोपहर 1:26 से रात 1:15 तक भद्रा योग रहेगा, जिसे अशुभ माना जाता है। इस वजह से होलिका दहन के लिए सीमित समय होगा। पंडितों का मत है इस दिन रात 8:45 से 9:57 तक जब भद्रा का पुच्छकाल रहेगा, इस समय होलिका दहन किया जा सकता है। होलिका दहन के लिए 1 घंटा 12 मिनट का समय मिलेगा। इस अवधि में दहन नहीं करने पर रात 1:15 बजे के बाद होलिका दहन किया जा सकेगा। नगर में एक दर्जन स्थानों पर होली जलेगी। पंडित भूपेन्द्र शास्त्री के मुताबिक फाल्गुन महीने के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि 17 मार्च को दोपहर से शुरु होगी, जो अगले दिन दोपहर तक रहेगी। उदया तिथि में 18 मार्च को पूर्णिमा रहने पर इसी दिन होली खेली जाएगी। उन्होंने बताया प्रदोष काल और गोधूली बेला में होलिका दहन श्रेष्ठ मानते हैं। जिन्हें रात में होलिका दहन करना है, वे प्रदोष काल में होलिका दहन स्थल पर प्रतीकात्मक रूप में कंडा और दीपक जला दें, फिर भद्रा समाप्त होने पर होलिका दहन करें। इधर होली के त्योहार को लेकर तैयारियां शुरू हो गई है। कोरोना संक्रमण की वजह से दो साल से होली का त्योहार प्रतिकात्मक रूप से मनाया जा रहा था। इस बार कोरोना की तीसरी लहर के बाद सारे प्रतिबंध हटा दिए गए हैं। इसके चलते होली के त्योहार पर खासी धूम रहने की उम्मीद है।
7वें करण का नाम भद्रा
पुराणों के अनुसार भद्रा सूर्य की पुत्री और शनिदेव की बहन है। भद्रा क्रोधी स्वभाव की मानी जाती हैं। उनके स्वभाव को नियंत्रित करने के लिए भगवान ब्रम्हा ने उन्हें कालगणना या पंचांग के एक प्रमुख अंग विष्टिकरण में स्थान दिया है। पंचांग के 5 प्रमुख अंग तिथि, वार, योग, नक्षत्र और करण होते हैं। करण की संख्या 11 होती है। ये चर-अचर में बांटे गए हैं। इन 11 करणों में 7वें करण विष्टि का नाम ही भद्रा है। मान्यता है ये तीनों लोक में भ्रमण करती हैं, जब मृत्यु लोक में होती हैं, तो अनिष्ट करती हैं।


