संस्कार बनाने वाला कोई धर्म है तो वह सनातन धर्म है, सनातन संस्कृति में ही माता पिता को भगवान का रुप मानकर पूजा जाता है: कथा व्यास जगद्गुरु रामस्वरूपाचार्य जी महाराज
श्रीराम कथा चतुर्थ दिवस
सिलवानी। नगर के हेलीपैड ग्राउंड पर आयोजित श्री रामकथा के चतुर्थ दिवस पर कथा व्यास जगद्गुरु रामस्वरूपाचार्य जी महाराज ने भगवान श्री राम की कथा का विस्तार करते हुए कहा कि भगवान हमेशा ही अपनी भक्तों की रक्षा के लिए और धर्म स्थापना के लिए इस धरा धाम में जन्म लेते है। संत, ग्रंथ, सत्संग व भक्त मिलन भगवान की कृपा से ही संभव हो पाते है। मानव यदि संत, ग्रंथ व सत्संग का लाभ लेना चाहता है व जीवन को सुखी समृद्व बनाना चाहता है तो उसे सत्य के रास्ते का अनुशरण कर धर्म रुपी आचरण को जीवन का हिस्सा बनाना होगा। राम कथा का रसपान कराते हुए उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम ने जहां संसार को मर्यादा का पाठ पढ़ाया। वहीं भगवान श्रीकृष्ण ने सांसर को कर्मयोग का पाठ पढ़ाया और गीता का ज्ञान दिया। जो मनुष्य भारतीय संस्कारों का अनुसरण करता है। उसका जीवन हमेशा अलौकिक आनंद को प्राप्त होता है। जगद्गुरु द्वारा श्रद्वालुओं को संबोधित करते हुए बताया कि राम कथा संजीवनी के समान है जिसके श्रवण से मनुष्य की नीजन रुपी नौका पार हो जाती है। जीवन में आनंद की प्राप्ति चाहते है तो रामकथा और श्रीकृष्ण ने गीता में जो कहा है उसे जीवन में आत्मसात करो। तभी जीवन सुख शांति मय हो सकता है। संस्कार बनाने वाला कोई धर्म है तो वह सनातन धर्म है सनातन संस्कृति में ही माता पिता को भगवान का रुप मानकर पूजा जाता है। टूटते परिवारों का जिक्र करते हुए इस पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आज परिवार से संस्कार विदा हो रहे। रिश्ते निभते नहीं हैं। सहनशीलता और झुकने की क्षमता समाप्त हो गई है। लिहाजा घर-घर में आए दिन परिवारों मे आपसी मतभेद देखने को मिलते है हमें अपने परिवारों में संस्कार बढ़ाने होंगे। बेटा-बेटियों को बचपन से ही संस्कार सिखाने होंगे और आज घोर के कलयुग में सभी को संस्कृति के साथ रहना होगा।
आत्मिक कल्याण का मुख्य साधन है भगवान की भक्ति: अशोक दास जी
कथा सानिध्य श्री 1008 मानस रत्न श्री अशोक दास जी रामायणी ने कहा कि भक्त जब भगवान की दिखावा और आडंबर से दूर रह कर भक्ति करता है तो भगवान उस की भक्ति से सदैव ही प्रसन्न रहते हैं। भगवान प्रसन्न होने के साथ ही भक्त का जीवन संवारने के साथ ही मृत्यु भी संवार देते है। आवश्यकता इस बात की है कि व्यक्ति सच्चे मन से निस्वार्थ भाव से भगवान की भक्ति करता रहे। दिखावा और आडंबर से दूर रहे। तभी वह भगवान को पा सकता है। अन्यथा उसका जीवन कठिनाईयों में रह सकता हैं। व्यक्ति को चाहिए कि वह प्रतिदिन कम से कम एक घंटा प्रभु स्मरण करें। भगवान हमेशा ही भक्त के सात्विक भाव से मिलते है। ना कि धन और दौलत से।
श्रीराम कथा मंच संचालक नगर खेड़ापति नरेश शास्त्री ने कहा कि रामचरितमानस का पाठ करने से भगवान की भक्ति की वर्षा हो जाएगी और ह्रदय अयोध्या और वृंदावन हो जाएगा। नरेश शास्त्री श्रद्वालुओं को रामकथा भगवान की वाणी का रसा स्वादन करा रहे थे।
आज के बालक ही भारत देश का भविष्य है, उन्हें संस्कारित किया जाना आवष्यक
भारत राष्ट्र गौरव सम्मान से सम्मानित राष्ट्रीय संत पं. अभिषेक कृष्ण शास्त्री जी द्वारा राम कथा का भक्तों को रामचरित मानस का दिव्य रस पान कराया। उन्होंने कहा कि बच्चों को प्रत्येक क्षेत्र में संस्कारित किया जाना चाहिए। संस्कारित किए गए बच्चे ही भारत देश का भविष्य है। जब तक बालकों को संस्कारित नहीं किया जाएगा तब तक भारत देश के स्वच्छ, स्वस्थ्य व सुंदर की कल्पना नहीं की जा सकती है। माता पिता व अभिभावकों को चाहिए कि वह बालकों को धार्मिक संस्कार देने के साथ ही पारिवारिक, सामाजिक सहित अन्य सकारात्मक संस्कार दिए जाए।





