सडक दुर्घटनाओं मे इजाफा, नही भरे जा रहे गड्डे, प्राधिकरण निष्क्रिय

रिपोर्टर : कुंदनलाल चौरसिया
गौरझामर । भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अंतर्गत नेशनल हाईवे 44 कश्मीर से कन्याकुमारी को आपादमस्तक जोडने वाला देश का सबसे लम्बा व सबसे व्यस्तम मार्ग अपने निर्माण काल से लेकर अब तक पहली बार लोगो ने इतनी दयनीय हालत मे देखा है आज स्थिति यह है की गौरझामर, घोसीपट्टी, बरकौटी, सुरखी, चितौरा, सागर से लेकर मालथौन व देवरी से लेकर नरसिहपुर तक इसके परखच्चे उड गये है एन एच 44 जैसे अति विशिष्ट मार्ग की पुरानी डामर परतें की परतें उखडती जा रही है इससे कटाव बनने व पूरी सडक पर गहरे व चौडे होते जा रहे गड्ढो के कारण सडक अपना वास्तविक स्वरूप खोती जा रही है तमाम सुविधाये होने के बाद भी प्राधिकरण की निष्क्रियता लोगो की समझ से बाहर है सडक की खस्ता हालत देखकर लगता है जैसे हम सोलहवी सदी मे वापस पहुंच गये है लम्बी दूरी की यात्रा करने वाले वाहनो की स्थिति यह है की वह भयानक गडढो के कारण उन्हे बचा बचाकर सर्पाकार वाहन चलाना पड रहा है। गडढो के बचाने के चक्कर मे धीमी रफ्तार की बजह गंतव्य स्थान पर समय पर नही पहुंच पाते, बडे बडे गडढो को बचाने मे अनेको सडक हादसे हो रहे है वाहनो मे टूट-फूट होने टायरो के गडढो मे गिरने से धडाम की आवाज मे फटने की घटनाये आम हो गई है। लोगो का कहना है कि प्राधिकरण व्दारा टोल प्लाजा के माध्यम से रोज करोडो रूपये टैक्स के रुप मे बसूलने के बाद भी उन्हे अच्छी सडक नसीब नही हो रही है एन एच 44 की यह बदहाली विगत एक वर्ष से देखी जा रही है ठेकेदारी प्रथा से हो रहा सडक मरम्मत का धीमा काम ऊंट के मुंह में जीरा सावित हो रहा है काम के लोक निर्माण विभाग की तरह होने से आगे पाट पीछे सपाट देखने को मिल रहा है घटिया मसाले से भरे जा रहे गड्ढे कुछ दिनों मे पुन, यथावत रुप मे आकर आंखे तरेरने लगते है वाहन चालको का कहना है की इस ओर केन्दीय सडक मंत्री को भी देखना चाहिये।



