केन्द्र और राज्य सरकारों द्वारा किसानों से विश्वासघात को लेकर सौंपा ज्ञापन
केन्द्र सरकार को उसके लिखित वादों को याद दिलाए
सिलवानी। सोमवार को राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के बैनर तले राष्ट्रपति के नाम तहसीलदार संजय नागवंशी को केन्द्र और राज्य सरकारों द्वारा किसानों से विश्वासघात को लेकर ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले देश के किसानों ने केन्द्र सरकार की किसान विरोधी कानून को रद्द करने न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी हासिल करने और अन्य किसान विरोधी नितियों के खिलाफ एक अभूतपूर्व आंदोलन चलाया। इस आंदोलन के चलते आपके हस्ताक्षर से तीन किसान विरोधी कानूनों को रद्द किया गया। उसके बाद संयुक्त किसान मोर्चा ने 21 नवंबर 2021 को प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर बकाया छह मुद्दों की तरफ उनका ध्यान आकर्षित किया। उसके जबाव में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के सचिव संजय अग्रवाल ने 9 दिसंबर 21 को संयुक्त किसान मोर्चा के नाम एक पत्र लिखा जिसमें उन्होंने कुछ मुद्दों पर सरकार की ओर ये आश्वासन दिए और आंदोलन को वापिस लेने का आग्रह किया। इस पत्र पर भरोसा कर संयुक्त किसान मोर्चा ने दिल्ली बार्डर पर लगे मोर्चों एवं तमाम धरना प्रदर्शनों को 11 दिसंबर 2020 से उठा लेने का आग्रह किया। एक बार फिर देश के किसानों के साथ धोखा हुआ है, भारत सरकार के 9 दिसंबर 2021 के जिस पत्र के आधार पर मोर्चे उठाने का फैसला किया था, सरकार ने उसमें कोई वायदा पूरा नहीं किया। इसलिए पूरे देश के किसानों ने 31 जनवरी 2022 को विश्वासघात दिवस मनाने का फैसला लिया है।
सरकार की कथनी और करनी का अंतर आप स्वयं देख सकत है, पत्र में वायदा था किसान आंदोलन के दौरान किसानों पर दर्ज मुकदमें तत्काल प्रभाव से वापिस लिए जाएंगे। केस वापिस लेने की सहमति उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश , मध्यप्रदेश और हरियाणा सरकार द्वारा प्रदान की गई है। भारत सरकार से संबंधित विभाग और एजेंसियों तथा दिल्ली सहित सभी संघ शासित क्षेत्रों में आंदोलनकारियों एवं समर्थकों पर दर्ज किए गए आंदोलन संबंधित सभी केस भी तत्काल प्रभाव से वापिस लेने की सहमति है। राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ द्वारा दिए गए ज्ञापन के माध्मय से देश के अन्नदाता देश के मुखिया से मांग करते है कि सरकार उनके विश्वास को न तोडे़, सत्ता किसान के धैर्य की परीक्षा लेना बंद करें। केन्द्र सरकार को उसके लिखित वादों को याद दिलाए और इन्हें जल्द से जल्द पूरा कराने की मांग की। इस दौरान रामसेवक गौर, मनोज सिंह, सियाराम रघुवंशी, सीताराम रघुवंशी, इन्द्रेश पटेल, माधोसिंह पटेल, प्रदीप पटेल, शिवकुमार, वीरेन्द्र सिंह, प्रवीण कुमार आदि मौजूद रहे।



