कर्मभूमि मे पुरषार्थ ही हमारी नियति : मुनिश्री

जन्म कल्याणक मे झूम श्रद्धालू
रिपोर्टर सतीश चौरसिया
उमरियापान। तीर्थकर भगवान विश्व के सर्वोत्कृष्ट द्रव्य हैं जिनका पुण्य अकथनीय है जो मोक्ष पाथ के अनुगामी एवं पथ प्रदर्शक भी है उन्हें भी माता के उधर से जन्म लेना पड़ा माता-पिता के आश्रय के बिना मोक्ष का पथ प्रशस्त नही हुआ स्वयंभू होते हुए भी निमित्त का अवलंबन प्राप्त किया स्वयं का उपादान प्रबल है पुरुपार्थ उत्कृष्ट है त्रिलोकी नाथ है जिनका गर्भ तो निश्चय समय पर था पर जन्म का समय अनियमित था चूकि उन्हें कर्मभूमि की कर्म व्यवस्था पर नहीं चलना है वह अनियतवादी है पुरशार्थी है पुरुषार्थ के संदेश वाहक हैं स्वयं के नाथ है फिर भी मोक्ष प्राप्त करने के लिए आश्रय लेना आवश्यक हुआ नवजात शिशु का पांडुक सभी देवों एवं इन्द्रो के द्वारा बड़े-बड़े कलशो के माध्यम से जन्मभिषेक हुआ हजारों नयनो से प्रभु की छवि एवं आभा का दर्शन सभी लोग करते हैं फिर भी तृप्त नहीं हो पाए उक्त आशय के सारगर्भित उद्गार चमत्कारोदय अतिशय तीर्थ क्षेत्र मे विराजमान मुनिश्री सुधासागर जी एवं मुनिश्री प्रसाद सागर जी महाराज ने धर्मसभा मे व्यक्त किये। आगे उन्होंने कहा कि जिनका अंतिम जन्म होता है उस जन्म को जन्म कल्याणक कहा जाता है प्रभु का अंतिम जन्म है अब कभी किसी मां के आंसू एवं रूलाने का कारण नहीं बनेंगे यह जन्म कल्याणक हजारों नेत्रों के समक्ष मनाया गया। श्रद्धा उत्साह समर्पण भक्ति आनंद के साथ मनाया गया। पंचकल्याणक महा महोत्सव के प्रथम दिवस प्रातःअभिषेक शांतिधारा मंडल विधान पूजन जन्मोत्सव आदि की क्रियाएं भक्ति भाव के साथ संपन्न करेंगे तत्पश्चात श्रीजी की भव्य शोभायात्रा जय घोष के साथ नगर भ्रमण के लिए निकल गई दोपहर में श्रीजी का मस्तिका अभिषेक किया गया। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से श्रीमंत सेठ उत्तमचंद जैन कोयला, संतोश जैन, अनुराग जैन, प्रमोद जैन काका, महेन्द्र जैन, शैलेन्द्र जैन, मनोज जैन, राजेश जैन, सत्येन्द्र जैन, डा केएल जैन, प्रशांत जैन, सुरेन्द्र सिंघई, अभयकुमार जैन, विनय जैन, दिनेश जैन, डा सुबोध जैन, प्रदीप जैन, पुष्पेन्द्र मोदी युवा मंडल महिला मंडल के सदस्यो की बडी संख्या मे उपस्थिति रही।



