राष्ट्रहित सर्वोपरि, स्वहित बाद में : नवीन जोशी

सिलवानी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का मूल उद्देश्य समाज को संगठित कर राष्ट्र को परम वैभव तक पहुँचाना है। यह विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विदिशा विभाग के विभाग कार्यवाह नवीन जोशी ने संघ शताब्दी वर्ष के निमित्त आयोजित प्रमुख जन गोष्ठी को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि भारत वह देश है, जिसने विश्व को अंक ज्ञान, संगीत, शिक्षा तथा परिवार व्यवस्था जैसी अमूल्य धरोहरें प्रदान की हैं। इसके बावजूद भारत को लगभग एक हजार वर्षों तक पराधीनता का कष्ट सहना पड़ा। कठिन संघर्षों के बावजूद भारत ने अपनी सांस्कृतिक पहचान को जीवित रखा और पुनः आत्मगौरव की ओर अग्रसर हुआ।
अपने संबोधन में जोशी ने हिंदू समाज की एकता, सांस्कृतिक पहचान, धर्म के व्यापक अर्थ, सामाजिक समरसता तथा संगठन की भूमिका जैसे विषयों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने समाज को जोड़ने वाली हिंदू पहचान, ‘स्व’ के बोध और गुण सम्पन्न समाज के निर्माण की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की कार्यपृष्ठभूमि, उसकी कार्यपद्धति तथा समाज में किए जा रहे सकारात्मक और रचनात्मक प्रयासों की जानकारी भी दी। यह संबोधन विचार, दृष्टि और दिशा—तीनों को समझने की दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विदिशा विभाग के विभाग कार्यवाह नवीन जोशी एवं जिला कार्यवाह राजेंद्र सिंह राजपूत मंचासीन रहे। इस अवसर पर खण्ड एवं नगर सिलवानी के सभी स्वयंसेवक तथा समाज के प्रबुद्धजन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।



