मध्य प्रदेश

स्वामीजी ने भारतीय संस्कृति के महत्व को विश्व में स्थापित किया

सिलवानी । भारत सर्वाधिक युवाओं वाले देशों में से एक है। स्वामी विवेकानंद ने भारतीय संस्कृति और सनातन के महत्व को विश्व में स्थापित किया। उन्होंने कठिन दौर म संन्यास ग्रहण करने के बाद भी शिक्षा ग्रहण करते हुए स्वामी रामकृष्ण परमहंस के मार्गदर्शन में धर्म और आध्यात्मिक ज्ञान का अध्ययन किया। साथ ही विश्व के समक्ष भारत की विशेषताओं को उजागर किया। यह विचार रविवार को नगर के सीएम राइज स्कूल में आयोजित सूर्य नमस्कार कार्यक्रम में वक्ताओं ने व्यक्त किए। कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रगीत वंदे मातरम् से हुई। इस अवसर पर मध्य प्रदेश गान प्रस्तुत कर मुख्यमंत्री के संदेश का प्रसारण भी किया गया। कार्यक्रम के अंत में राष्ट्रगान हुआ।
स्वामी विवेकानंद जी देश के प्रति जागरूक एवं निष्ठावान थे और उनके जीवन से न सिर्फ लोगों को आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है बल्कि राष्ट्रप्रेम की भावना भी प्रज्वलित होती है। उनका मानना था कि प्रेम जीवन है, द्वेष मृत्यु है। जब तक आप खुद पर विश्वास नहीं करते तब तक आप भगवान पर विश्वास नहीं कर सकते। जो कुछ भी तुमको कमजोर बनाता है – शारीरिक, बौद्धिक या मानसिक उसे जहर की तरह त्याग दो। स्वामी विवेकानंद ने कहा था – चिंतन करो, चिंता नहीं, नए विचारों को जन्म दो स्वामी विवेकानन्द की शिक्षाएँ ज्ञान का खजाना हैं। वे आत्मविश्वास, ज्ञान की खोज, आत्म-सुधार, दूसरों की सेवा और सार्वभौमिक भाईचारे के महत्व पर जोर देते हैं। उनका आदर्श वाक्य, “उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए,” आज भी दुनिया भर में लाखों लोगों को प्रेरित करता। भारत की भूमि स्वामी विवेकानंद जैसे महान विचारक एवं राष्ट्र भक्तों के जन्म से गौरान्वित हुई है।
इस अवसर पर भाजपा मंडल अध्यक्ष श्याम साहू, भाजपा नेता विभोर नायक, प्रदीप कुशवाहा, प्राचार्य एनपी शिल्पी, एबीवीपी जय यादव सहित गणमान्य नागरिक, प्रबुद्धजन, शिक्षक एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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