ओवरलोड रेत डंफरों की मनमानी : प्रशासन की लापरवाही से दुर्घटनाओं का खतरा गहराया

सिलवानी। नगर एवं आसपास के क्षेत्रों में रेत से भरे ओवरलोड डंफरों की बेरोकटोक आवाजाही आम नागरिकों के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है। दिनों-दिन बढ़ रही दुर्घटनाओं के बावजूद प्रशासनिक कार्रवाई का अभाव और राजनीतिक रसूख के चलते हालात और भयावह होते जा रहे हैं।
राजनीतिक संरक्षण से बढ़े रेत माफिया के हौसले
स्थानीय लोगों का आरोप है कि ओवरलोड वाहनों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है, जिसके कारण प्रशासन न तो सख्त जांच कर रहा है और न ही जुर्माने की कार्रवाई। परिणामस्वरूप ओवरलोड डंफर सड़क पर धड़ल्ले से दौड़ रहे हैं, जिससे सड़कें क्षतिग्रस्त हो रही हैं और आम लोगों की जान पर भी खतरा मंडरा रहा है।
दुर्घटनाओं में लगातार इजाफा
ओवरलोड वाहनों की रफ्तार और भारी वजन के कारण सड़क हादसों का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है। कई परिवार हादसों का शिकार होकर न्याय की मांग कर रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कार्रवाई लगभग नगण्य है। लोगों का कहना है कि पुलिस और जिम्मेदार विभाग प्रभावी तरीके से सक्रिय नहीं हो पा रहे, जिससे अवैध रेत परिवहन का नेटवर्क और मजबूत होता जा रहा है।
खनिज विभाग की खानापूर्ति
खनिज विभाग के अधिकारियों से जब इस विषय पर बात की जाती है तो उनका जवाब हमेशा एक जैसा रहता है—
“हमें मीडिया के माध्यम से जानकारी मिली है, शीघ्र कार्रवाई की जाएगी।”
हालांकि जमीनी हकीकत यह है कि अब तक विभाग की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। विभाग की यह निष्क्रियता रेत माफिया के हौसले और बढ़ा रही है।
वहीं क्षेत्रवासियों कहना है कि यदि ओवरलोडिंग और अवैध रेत परिवहन पर तुरंत रोक नहीं लगाई गई, तो आने वाले समय में हादसे और बढ़ सकते हैं। सुरक्षा मानकों के खुले उल्लंघन को रोकने के लिए प्रशासन को राजनीतिक दबाव से मुक्त होकर कठोर और निष्पक्ष कार्रवाई करनी होगी।
लोगों का कहना है कि यदि जल्द ही सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो ये ओवरलोड डंफर किसी भी बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं। जनसुरक्षा के लिए प्रशासन की सक्रियता अब अत्यंत आवश्यक हो गई है।



