रबी की बोवनी तेज़, गेहूं का रकबा 35 से 40 हजार हेक्टेयर तक पहुँचा

सिलवानी। क्षेत्र में इस वर्ष हुई पर्याप्त एवं समय पर वर्षा के चलते रबी फसल की बोवनी में उल्लेखनीय तेजी देखने को मिल रही है। कृषि विभाग के अनुसार अब तक 40 हजार हेक्टेयर भूमि में रबी की बोवनी पूरी की जा चुकी है, जबकि विकासखंड में कुल रकबा 57 हजार हेक्टेयर से अधिक है। शेष 17 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में पलेवा के बाद किसान बोवनी की तैयारी में जुटे हैं।
गेहूं का रकबा 15% बढ़ा
हर वर्ष जहां गेहूं का रकबा लगभग 30 हजार हेक्टेयर रहता था, वहीं इस बार किसानों का रुझान बढ़ने से यह क्षेत्रफल 35 से 40 हजार हेक्टेयर तक पहुँच गया है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार सोयाबीन की फसल खराब होने तथा गेहूं के अच्छे बाजार भाव के कारण किसान इस वर्ष गेहूं की बुवाई की ओर अधिक आकर्षित हुए हैं।
चना और मसूर का रकबा करीब 12 हजार हेक्टेयर बताया गया है। अच्छी नमी और अनुकूल मौसम के कारण किसानों ने समय से पहले ही बोवनी प्रारंभ कर दी थी। कई किसान धान कटाई में देरी के बाद दिसंबर के दूसरे सप्ताह तक भी बोवनी करते देखे जा रहे हैं।
सिंचाई के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध
इस वर्ष सामान्य से लगभग 90 प्रतिशत वर्षा होने के कारण सिंचाई के लिए किसी प्रकार की समस्या नहीं है। डैम, तालाब और नहरों में पर्याप्त मात्रा में पानी मौजूद है, वहीं भूजल स्तर भी संतोषजनक है। विकासखंड के कई डैम इस बार लबालब भरे हुए हैं।
कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कि किसान अधिकतर सिंचित वैरायटी वाले बीजों का उपयोग कर रहे हैं। हालांकि सरकारी सोसायटियों पर गेहूं और चने का बीज उपलब्ध न होने से किसानों को बीज निगम और बाजार पर निर्भर रहना पड़ा।
कृषि विभाग का कहना
कृषि विभाग के एसडीओ सुनील मालवीय ने बताया कि विकासखंड में कुल 57 हजार हेक्टेयर में रबी फसल की बोवनी होती है। “इस बार पर्याप्त वर्षा के चलते गेहूं का रकबा करीब 15 प्रतिशत बढ़ा है। अभी कुछ किसान पलेवा के बाद बोवनी कर रहे हैं,” उन्होंने कहा।
सिलवानी क्षेत्र में अनुकूल वातावरण और भरपूर सिंचाई संसाधनों के चलते इस वर्ष गेहूं व दलहन की फसलों से बेहतर उत्पादन की उम्मीद जताई जा रही है।



