Today Panchang आज का पंचांग गुरुवार, 22 अगस्त 2024
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला मुख्यालय हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
गुरुवार 22 अगस्त 2024_
22 अगस्त 2024 दिन गुरुवार को भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि है। आज बहुला संकष्टी श्रीगणेश चतुर्थी का पावन व्रत है। आज भगवान श्रीगणेश जी की पूजा सनातनी माताओं बहनों द्वारा अपने पुत्रों के दीर्घायु हेतु किया जाता है। गणपति पूजन के उपरान्त रात्रि (08:20 PM) पर चन्द्रमा के निकलने पर उन्हें देखकर अर्घ्य देकर ही अपना व्रत खोलती हैं। आज कज्जली (कजरी) का भी पावन पर्व है। आज गौ पूजन एवं सिन्धी लोगों का तीजड़ी व्रत भी है। आज जैन समाज के लोगों का भी तीज व्रत है। आज विशालाक्षी देवी की यात्रा भी है। आप सभी सनातनियों को “बहुला संकष्टी श्रीगणेश चतुर्थी के पावन व्रत” की हार्दिक शुभकामनायें।।
मंगल श्री विष्णु मंत्र :-
मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः।
मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥
☄️ दिन (वार) – गुरुवार के दिन तेल का मर्दन करने से धनहानि होती है । (मुहूर्तगणपति)
गुरुवार के दिन धोबी को वस्त्र धुलने या प्रेस करने नहीं देना चाहिए।
गुरुवार को ना तो सर धोना चाहिए, ना शरीर में साबुन लगा कर नहाना चाहिए और ना ही कपडे धोने चाहिए ऐसा करने से घर से लक्ष्मी रुष्ट होकर चली जाती है ।
गुरुवार को पीतल के बर्तन में चने की दाल, हल्दी, गुड़ डालकर केले के पेड़ पर चढ़ाकर दीपक अथवा धूप जलाएं ।
इससे बृहस्पति देव प्रसन्न होते है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है ।
🌐 शुभ हिन्दू नववर्ष 2024 संवत्सर क्रोधी
📖 संवत्सर (उत्तर) कालयुक्त
🧾 विक्रम संवत 2081 विक्रम संवत
🔮 गुजराती संवत 2080 विक्रम संवत
☸️ शक संवत 1946 शक संवत
☪️ कलि संवत 5125 कलि संवत
🕉️ शिवराज शक 351_
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर वर्षा ऋतु
🌤️ मास – सौर शरद ऋतु प्रारम्भ
🌔 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – गुरुवार भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष तृतीया तिथि 01:46 PM तक उपरांत चतुर्थी
✏️ तिथि स्वामी : तृतीया तिथि के देवता हैं यक्षराज कुबेर। इस तिथि में कुबेर का पूजन करने से व्यक्ति धनवान बन जाता है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र उत्तरभाद्रपदा 10:05 PM तक उपरांत रेवती
🪐 नक्षत्र स्वामी – उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के स्वामी शनिदेव हैं और राशि मीन है, जिसके स्वामी देवताओं के गुरु बृहस्पति देव हैं।
⚜️ योग – धृति योग 01:10 PM तक, उसके बाद शूल योग
⚡ प्रथम करण : विष्टि – 01:46 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : बव – 12:10 ए एम, अगस्त 23 तक बालव
🔥 गुलिक कालः- गुरुवार का (शुभ गुलिक) 03:33:00 से 05:08:00 तक
⚜️ दिशाशूल – बृहस्पतिवार को दक्षिण दिशा एवं अग्निकोण का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से सरसो के दाने या जीरा खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल – दिन – 1:30 से 3:00 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:37:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 06:23:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:26 ए एम से 05:10 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:48 ए एम से 05:54 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:58 ए एम से 12:50 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:34 पी एम से 03:25 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:53 पी एम से 07:15 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 06:53 पी एम से 07:59 पी एम
💧 अमृत काल : 05:47 पी एम से 07:13 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:02 ए एम, अगस्त 23 से 12:46 ए एम, अगस्त 23
⭐ सर्वार्थ सिद्धि योग : 10:05 पी एम से 05:55 ए एम, अगस्त 23
🚓 यात्रा शकुन-बेसन से बनी मिठाई खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरुवै नम:।
🤷🏻 आज का उपाय-गणेश मंदिर में बूंदी के लड्डू चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
❄️ पर्व एवं त्यौहार – सौर शरद ऋतु प्रारम्भ/ कज्जली (कजरी) तीज/श्री गणेश संकष्टी चतुर्थी (चंद्रोदय रात्रि 9:00 बजे)/ सर्वार्थ सिद्धि योग/ पंचक जारी/ बहुला चतुर्थी व्रत/ हरिशंकर परसाई जयन्ती, सनातन धर्म में उदया तिथि मान भगवान कल्कि जयंती, देवदूत दिवस, राष्ट्रीय पशु चिकित्सक के पास अपनी बिल्ली ले जाने का दिन, राष्ट्रीय टूथ फेयरी दिवस, विश्व प्लांट मिल्क दिवस, भारतीय कांग्रेस स्थापना दिवस, राष्ट्रीय सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट दिवस
✍🏼 विशेष – तृतीया तिथि में नमक का दान तथा भक्षण दोनों ही त्याज्य बताया गया है। तृतीया तिथि एक सबला अर्थात बल प्रदान करने वाली तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं यह तृतीया तिथि आरोग्यकारी रोग निवारण करने वाली तिथि भी मानी जाती है। इस तृतीया तिथि की स्वामिनी माता गौरी और इसके देवता कुबेर देवता हैं। यह तृतीया तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह तृतीया तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभफलदायिनी मानी जाती है।
🏘️ Vastu tips 🏚️
करें ये आसान उपाय
पति-पत्नी के झगड़े को दूर करने के लिए देवों के देव महादेव और माता पार्वती की नियमित रूप से पूजा करें। पूजा के समय घी का दीपक जलाकर रिश्ते मधुर हेतु कामना करें। इस उपाय को करने से पति-पत्नी के बीच तकरार नहीं होती है। अगर आपके पास पर्याप्त समय है, तो शिव चालीसा का पाठ करें।
शुक्रवार का दिन मां दुर्गा और लक्ष्मी को समर्पित होता है। इस दिन मंदिर जाकर मां लक्ष्मी को गुलाब का फूल और श्रृंगार का सामान अर्पित करें। साथ ही सफेद रंग की मिठाई माता को भेंट करें। इस उपाय को करने से रिश्ते मधुर होते हैं।
पति-पत्नी के रिश्ते मधुर करने के लिए गुरुवार के दिन हल्दी की गाठों को पीले रंग के कपड़े में बांध दें। इसके पश्चात हाथ में रख ‘ऊं नमो भगवते वासुदेवाय नमः’ मंत्र का जाप करें। अब हल्दी भगवान विष्णु को अर्पित कर दें।
❇️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
बच्चों के लिए, लवण भास्कर चूर्ण एक अत्यंत प्रभावी उपाय है। यह आयुर्वेदिक चूर्ण विभिन्न लवणों और जड़ी-बूटियों से मिलकर बना है, जो न केवल पाचन में सुधार करता है बल्कि भूख को भी बढ़ाता है। इसमें पाए जाने वाले घटक, जैसे कि सोंठ, मरीच, पिप्पली, और पंचलवण, बच्चों के पेट को आराम देते हैं और कब्ज जैसी समस्याओं को दूर करते हैं। यह चूर्ण बच्चों के लिए सुरक्षित और प्रभावी होता है, जिससे उनका पेट साफ रहता है और वे स्वस्थ रहते हैं।
वयस्कों में अविपत्तिकर चूर्ण इस प्रकार की समस्याओं के लिए अत्यधिक लाभकारी है। इसमें लवंग (लौंग) के अलावे हरीतकी, बिभीतक, आमलकी, पिप्पली, शुंठी, और वासा जैसे तत्व शामिल होते हैं, जो पित्त दोष को संतुलित करते हैं और गैस्ट्रिक समस्याओं से राहत दिलाते हैं। इस चूर्ण का नियमित सेवन न केवल पाचन को बेहतर बनाता है बल्कि अल्सर जैसी समस्याओं में भी राहत प्रदान करता है। इसके अलावा, यह चूर्ण शरीर के अन्य अंगों, जैसे कि लिवर और किडनी, को भी स्वस्थ बनाए रखने में सहायक होता है।
🍵 आरोग्य संजीवनी 🍶
एड़ी दर्द का इलाज आमतौर पर, एड़ी का दर्द गैर-सर्जिकल उपचार के साथ समय के साथ बेहतर हो जाता है। उपचार का मुख्य उद्देश्य दर्द और सूजन को कम करना, पैर के लचीलापन को बेहतर बनाना, और हील पर तनाव और दबाव को कम करने पर केंद्रित होता है। इन उपचारों में शामिल हैं:
व्यायाम: पिंडली की मांसपेशियों को स्ट्रेच करने वाले व्यायाम एड़ी के दर्द को कम करने और रिकवरी करने में मदद कर सकते हैं।
नंगे पैर चलने से बचें: बिना जूते पहने चलने से आपके प्लांटर फैशिया पर अत्यधिक तनाव और दबाव पड़ता है।
बर्फ़ लगाना: दिन में कई बार एड़ी पर 20 मिनट के लिए बर्फ़ की सिकाई करने से सूजन कम हो सकती है। एड़ी की त्वचा पर सीधे बर्फ़ लगाने की बजाए अपनी हील और बर्फ़ के बीच एक पतला तौलिया रखना फायदेमंद होगा।
गतिविधियों को सीमित करें: अपनी एड़ी को आराम देने के लिए दौड़ने और उछलने जैसी शारीरिक गतिविधियों को कम करें।
जूतों में परिवर्तन: अच्छे आर्क सपोर्ट, हील लिफ्ट और शू इन्सर्ट वाले जूते एड़ी दर्द को कम करने में मदद करते हैं।
दवाएँ: – मुँह से लिए जाने वाली गैर-स्टेरॉइडल एंटी-इंफ्लेमेट्री दवाएं (एनएसएआईडी) एड़ी के दर्द और सूजन को कम करने में मदद करती हैं।
पैडिंग, टेपिंग और स्ट्रैपिंग: जूते में पैड डालने से एड़ी के दर्द में आराम मिल सकता है। टेपिंग और स्ट्रैपिंग भी फैशिया पर तनाव को कम करके पैर को आराम देते हैं।
ऑर्थोटिक उपकरण: जूते में फिट होने वाले विशेष ऑर्थोटिक उपकरण अंतर्निहित संरचनात्मक असामान्यताओं को सही करके पैर दर्द में आराम देते हैं।
इंजेक्शन थेरेपी: आपके डॉक्टर सूजन को कम करने और दर्द को आराम देने के लिए कॉर्टिकोस्टेरॉयड इंजेक्शन की सलाह दे सकते हैं।
📖 गुरु भक्ति योग_ 🕯️
एक दिन सभी ऋषि-मुनियों में इस बात को लेकर बहस हुई थी कि परब्रम्ह हैं भी या नहीं? कौन है जो इस सृष्टि को चलाता है? अगर कोई है तो उसका रूप कैसा है? उसकी पहचान होनी चाहिए. जब इस बहस का कोई परिणाम नहीं निकला तो सभी ऋषि- मुनि ब्रम्हाजी के पास पहुंचे. मेरु शिखर पर ब्रम्हाजी का निवास था. सभी ऋषि-मुनि विशाल भवन में ब्रम्हाजी के सामने पहुंचे. उन्होंने ऋषि- मुनियों से पूछा, ‘आप सभी एक साथ यहां किस उद्देश्य से आए हैं?’ ऋषि-मुनियों ने कहा, ‘हम सभी अज्ञान के अंधकार में डूब गए हैं. परम तत्व की जानकारी पाना चाहते हैं.’ब्रम्हाजी ने आंखें बंद करके रुद्र बोला और इसके बाद तुरंत ही बोले, ‘अगर आप इन प्रश्नों के उत्तर जानना चाहते हैं तो मैंने एक व्यवस्था की है. मैंने एक चक्र फेंका था, जहां वह गिरा, वहां चक्र की नेमि के कारण एक वन बन गया है. उसे नैमिषारण्य यानी नैमिष वन कहा गया है.आप सभी वहां जाएं, वहां यज्ञ करना. तब वायुदेव वहां आएंगे, आप वायुदेव से ये प्रश्न पूछना और वे आपकी शंकाओं का समाधान करेंगे.’ ब्रम्हाजी ने ऋषि-मुनियों को जैसा बताया, उन्होंने वैसा ही किया. वायुदेव से ऋषियों की चर्चा होती है तो उनको अपनी शंकाओं का उत्तर मिल जाता है.
सीख -अगर कोई हमारे पास जीवन से संबंधित गंभीर प्रश्न लेकर आए तो सबसे पहले हमें उसके लिए भूमिका तैयार करनी चाहिए. गहरी बातों के लिए स्थान अलग ही होते हैं. राजसभा में बैठकर धर्म-आध्यात्म की चर्चा नहीं की जा सकती है. ऐसी बातों के लिए वन श्रेष्ठ होते हैं।
यज्ञ का अर्थ होता है, एक धार्मिक अनुशासन, जिससे वातावरण शुद्ध होता है. वायुदेव ऋषियों से बहुत अधिक जुड़े हुए हैं, इसलिए वे बहुत अच्छे से समझा सकते हैं. वक्ता और श्रोता के बीच तालमेल अच्छा होगा तो हर प्रश्न का सही उत्तर मिल सकता है।
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⚜️ तृतीया तिथि केवल बुधवार की हो तो अशुभ मानी जाती है। अन्यथा इस तृतीया तिथि को सभी शुभ कार्यों में लिया जा सकता है। आज तृतीया तिथि को माता गौरी की पूजा करके व्यक्ति अपनी मनोवाँछित कामनाओं की पूर्ति कर सकता है। आज तृतीया तिथि में एक स्त्री माता गौरी की पूजा करके अचल सुहाग की कामना करे तो उसका पति सभी संकटों से मुक्त हो जाता है। आज तृतीया तिथि को भगवान कुबेर जी की विशिष्ट पूजा करनी चाहिये। देवताओं के कोषाध्यक्ष की पूजा आज तृतीया तिथि को करके मनुष्य अतुलनीय धन प्राप्त कर सकता है।
तृतीया तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति मानसिक रूप से अस्थिर होता है अर्थात उनकी बुद्धि भ्रमित होती है। इस तिथि का जातक आलसी और मेहनत से जी चुराने वाला होता है। ये दूसरे व्यक्ति से जल्दी घुलते मिलते नहीं हैं बल्कि लोगों के प्रति इनके मन में द्वेष की भावना भी रहती है। इनके जीवन में धन की कमी रहती है, इन्हें धन कमाने के लिए काफी मेहनत और परिश्रम करना पड़ता है।



