आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला मुख्यालय हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
सोमवार 12 अगस्त 2024
12 अगस्त 2024 दिन सोमवार को श्रावण मास के शुक्ल पक्ष कि अष्टमी तिथि है। आज उत्तर भारतीयों का चौथा एवं गुजराती समाज का दूसरा श्रावण सोमवार का पावन व्रत है। श्रावण सोमवार की महिमा तो आपलोगों को कई बार बताया ही है। आज अष्टमी तिथि भी है, अब आप निर्णय करो की श्रवण सोमवार की अष्टमी हो तो कितना पावन और कैसा मुहूर्त बनेगा। आज पुरे श्रावण मास में एक ही सोमवार को शिव मंदिर जाने से सम्पूर्ण श्रावण मास में शिव जी को जल चढ़ाने का सम्पूर्ण फल मिल जाता है। आज हिमाचल प्रदेश में मेला नयनादेवी चिंतपूर्णी के यहाँ होती बहुत ही मनोहारी एवं आकर्षक। आप सभी सनातनियों को “उत्तर भारतीयों के चौथे एवं गुजराती समाज के दूसरे श्रावण सोमवार व्रत” की हार्दिक शुभकामनायें।।
महा मृत्युंजय मंत्र – ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।।
☄️ दिन (वार) – सोमवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से पुत्र का अनिष्ट होता है शिवभक्ति को भी हानि पहुँचती है अत: सोमवार को ना तो बाल और ना ही दाढ़ी कटवाएं ।
सोमवार के दिन भगवान शंकर की आराधना, अभिषेक करने से चन्द्रमा मजबूत होता है, काल सर्प दोष दूर होता है।
सोमवार का व्रत रखने से मनचाहा जीवन साथी मिलता है, वैवाहिक जीवन में लम्बा और सुखमय होता है।
जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए हर सोमवार को शिवलिंग पर पंचामृत या मीठा कच्चा दूध एवं काले तिल चढ़ाएं, इससे भगवान महादेव की कृपा बनी रहती है परिवार से रोग दूर रहते है।
सोमवार के दिन शिव पुराण के अचूक मन्त्र “श्री शिवाये नमस्तुभ्यम’ का अधिक से अधिक जाप करने से समस्त कष्ट दूर होते है. निश्चित ही मनवाँछित लाभ मिलता है।
🌐 शुभ हिन्दू नववर्ष 2024 संवत्सर क्रोधी
📖 संवत्सर (उत्तर) कालयुक्त
🧾 विक्रम संवत 2081 विक्रम संवत
🔮 गुजराती संवत 2080 विक्रम संवत
☸️ शक संवत 1946 शक संवत
☪️ कलि संवत 5125 कलि संवत
🕉️ शिवराज शक 351
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर वर्षा ऋतु
🌤️ मास – श्रावण मास
🌓 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि : सोमवार श्रावण माह के शुक्ल पक्ष सप्तमी तिथि 07:55 AM तक उपरांत अष्टमी
✏️ तिथि स्वामी – अष्टमी तिथि के देवता हैं रुद्र। इस तिथि को भगवान सदाशिव या रुद्रदेव की पूजा करने से प्रचुर ज्ञान तथा अत्यधिक कांति की प्राप्ति होती है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र स्वाति 08:33 AM तक उपरांत विशाखा
🪐 नक्षत्र स्वामी – स्वाति नक्षत्र स्वामी राहु यानि अधंकार है। स्वाति नक्षत्र के देवता पवन देव हैं।
⚜️ योग – शुक्ल योग 04:25 PM तक, उसके बाद ब्रह्म योग
⚡ प्रथम करण : वणिज – 07:55 ए एम तक
✨ द्वितीय करण : विष्टि – 08:48 पी एम तक बव
🔥 सोमवार का शुभ गुलिक कालः-शुभ गुलिक काल 01:42:00 P.M से 02:59:00 P.M बजे तक
⚜️ दिशाशूलः- आज के दिन पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करना चाहिए यदि यात्रा करना ज्यादा आवश्यक हो तो घर से दर्पण देखकर या दूध पीकर जायें।
🤖 राहुकालः- आज का राहु काल 08:31:00 A.M से 09:49:00 A.M बजे तक
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:30:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 06:30:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:23 ए एम से 05:06 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:44 ए एम से 05:49 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:59 ए एम से 12:52 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:38 पी एम से 03:31 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 07:03 पी एम से 07:25 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 07:03 पी एम से 08:08 पी एम
💧 अमृत काल : 01:08 ए एम, अगस्त 13 से 02:53 ए एम, अगस्त 13
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:05 ए एम, अगस्त 13 से 12:48 ए एम, अगस्त 13
🚓 यात्रा शकुन-मीठा दूध पीकर यात्रा करें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ सौं सौमाय नम:।
💁🏻♀️ आज का उपाय-शिवलिंग का नर्मदाजल से अभिषेक करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-पलाश के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार -भद्रा/सोमव्रत/ शिव पूजन/ गवर्नर केजी अम्बेगांवकर जन्म दिवस, भारतीय पुरातत्व के विद्वान् काशीनाथ नारायण दीक्षित स्मृति दिवस, प्रसिद्ध निर्माता-निर्देशक गुलशन कुमार पुण्य तिथि, भारतीय सिनेमा के महानायक अमिताभ बच्चन की माँ तेजी बच्चन जन्म दिवस, भारतीय भौतिक विक्रम साराभाई जन्म दिवस, भारतीय क्रिकेटर ज्ञानेंद्र पांडे जन्म दिवस, अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस, विश्व हाथी दिवस
✍🏼 विशेष:- अष्टमी तिथि को नारियल त्याज्य बताया गया है। अष्टमी तिथि बलवती अर्थात स्ट्रांग तिथि मानी जाती है। इसका मतलब कोई भी विकट कार्य आज आप कर-करवा सकते हैं। इतना ही नहीं अपितु अष्टमी तिथि व्याधि नाशक तिथि भी मानी जाती है। इसका मतलब आज आप कोई भी भयंकर रोगों के इलाज का प्रयत्न भगवान के नाम के साथ करेंगे-करवाएंगे तो निश्चित लाभ होगा। यह अष्टमी तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह अष्टमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है।
🏜️ Vastu Tips 🗽
अच्छे स्वास्थ्य और समृद्धि के लिए बेडरुम दक्षिण-पश्चिम दिशा में होना चाहिए। उत्तर-पूर्व दिशा स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का कारण बनती है, जबकि दक्षिण-पूर्व की ओर मुख वाला बेडरुम पति-पत्नी के बीच झगड़े और लड़ाई का कारण बन सकता है। इसके अलावा, बेड हमेशा कमरे के दक्षिण-पश्चिम कोने में होना चाहिए, जिसका सिर पश्चिम की ओर हो।
👉🏽 बेडरुम डिज़ाइन करते समय ध्यान रखने वाली बातें:
बेड के सामने शीशा या टेलीविजन नहीं होना चाहिए। इसका कारण यह है कि बेड पर सोते समय प्रतिबिंब नहीं देखना चाहिए, क्योंकि इससे गृह क्लेश और झगड़े होते हैं।
बेडरूम की दीवारों को न्यूट्रल या हल्के रंगों से रंगना चाहिए, क्योंकि वे पॉजिटिव एनर्जी लाते हैं। दीवारें काली नहीं होनी चाहिए।
बेडरूम में मंदिर नहीं होना चाहिए।
बेडरूम में पानी या फव्वारे का चित्रण करने वाली पेंटिंग नहीं होनी चाहिए, क्योंकि वे भावनात्मक हानि का कारण बन सकती हैं।
मूड लाइटिंग का उपयोग किया जाना चाहिए, और शांत माहौल बनाने के लिए सुगंधित अगरबत्तियों को जलाया जा सकता है।
🗝️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
पेट के बल सोना स्वास्थ्यवर्धक क्यों नहीं होता?
गलत तरह से सोना अपने आप को बीमारियों के कठघरे में धकेलने के सामान है। अगर हम अच्छी प्रकार से नहीं सोते हैं तो नींद पूरी नहीं होती है और हम अगले दिन थके- थके से रहते हैं नींद पूरी ना होने के कारण हमें शारीरिक व मानसिक कई प्रकार की बीमारियां घेर लेती हैं।
परंतु बात आती है पेट के बल सोने की तो क्या पेट के बल सोना स्वास्थ्यवर्धक क्यों नहीं होता-
पेट के बल सोने से हमारी पीठ पर गलत प्रभाव पड़ता है। जिसके कारण हमारी पीठ में दर्द रहने लगता है।
पेट के बल सोने से हमारी रीढ़ की हड्डी भी ठीक नहीं रहती।
पेट के बल सोने से हमारी पाचन क्रिया पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है।
पेट के बल सोने से हमारे जोड़ों में भी दर्द रहने लगता है।
इसलिए हमेशा सीधा सोना चाहिए ताकि हमारे स्वास्थ्य पर गलत प्रभाव ना पड़े।
☕ आरोग्य संजीवनी 🍶
खांसी और सर्दी से राहत: मुलेठी में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं जो खांसी, गले की खराश, और सर्दी जैसी श्वसन संबंधी समस्याओं से राहत दिलाने में मददगार होते हैं। यह बलगम को पतला करता है और उसे बाहर निकालने में मदद करता है।
प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाता है: मुलेठी में एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने में मदद करते हैं। यह शरीर को संक्रमण से लड़ने में मदद करता है।
गठिया और जोड़ों के दर्द से राहत: मुलेठी में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो गठिया और जोड़ों के दर्द से राहत दिलाने में मददगार होते हैं। यह सूजन को कम करता है और दर्द से राहत देता है।
मुंह के छालों से राहत: मुलेठी में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं जो मुंह के छालों से राहत दिलाने में मददगार होते हैं। यह दर्द और सूजन को कम करता है और छालों को जल्दी ठीक करने में मदद करता है।
त्वचा के लिए फायदेमंद: मुलेठी में एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो त्वचा के लिए फायदेमंद होते हैं। यह त्वचा को मुक्त कणों से होने वाले नुकसान से बचाता है और झुर्रियों और बारीक रेखाओं को कम करता है। यह त्वचा को हाइड्रेटेड रखने में भी मदद करता है।
📗 गुरु भक्ति योग 🕯️
काल भैरव की आराधना के लिए मंत्र है-
।। ॐ भैरवाय नम:।।
बटुक भैरव ‘बटुकाख्यस्य देवस्य भैरवस्य महात्मन:। ब्रह्मा विष्णु, महेशाधैर्वन्दित दयानिधे।।’
अर्थात् ब्रह्मा, विष्णु, महेशादि देवों द्वारा वंदित बटुक नाम से प्रसिद्ध इन भैरव देव की उपासना कल्पवृक्ष के समान फलदायी है। बटुक भैरव भगवान का बाल रूप है। इन्हें आनंद भैरव भी कहते हैं। उक्त सौम्य स्वरूप की आराधना शीघ्र फलदायी है। यह कार्य में सफलता के लिए महत्वपूर्ण है।
उक्त आराधना के लिए मंत्र है- ।।ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाचतु य कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं ॐ।।
भैरव तंत्र(जिसे कुछ विद्वानजन विज्ञान भैरव तंत्र भी कहते हैं) योग में जिसे समाधि पद कहा गया है, भैरव तंत्र में भैरव पद या भैरवी पद प्राप्त करने के लिए भगवान शिव ने देवी के समक्ष 112 विधियों का उल्लेख किया है जिनके माध्यम से उक्त अवस्था को प्राप्त हुआ जा सकता है।
भैरव आराधना से शनि शांत, एकमात्र भैरव की आराधना से ही शनि का प्रकोप शांत होता है। आराधना का दिन रविवार और मंगलवार नियुक्त है। पुराणों के अनुसार भाद्रपद माह को भैरव पूजा के लिए अति उत्तम माना गया है। उक्त माह के रविवार को बड़ा रविवार मानते हुए व्रत रखते हैं। आराधना से पूर्व जान लें कि कुत्ते को कभी दुत्कारे नहीं बल्कि उसे भरपेट भोजन कराएं। जुआ, सट्टा, शराब, ब्याजखोरी, अनैतिक कृत्य आदि आदतों से दूर रहें। दांत और आंत साफ रखें। पवित्र होकर ही सात्विक आराधना करें। अपवित्रता वर्जित है। भैरव चरित्र, भैरव के चरित्र का भयावह चित्रण कर तथा घिनौनी तांत्रिक क्रियाएं कर लोगों में उनके प्रति एक डर और उपेक्षा का भाव भरने वाले तांत्रिकों और अन्य पूजकों को भगवान भैरव माफ करें।
दरअसल भैरव वैसे नहीं है जैसा कि उनका चित्रण किया गया है। वे मांस और मदिरा से दूर रहने वाले शिव और दुर्गा के भक्त हैं। उनका चरित्र बहुत ही सौम्य, सात्विक और साहसिक है।
उनका कार्य है शिव की नगरी काशी की सुरक्षा करना और समाज के अपराधियों को पकड़कर दंड के लिए प्रस्तुत करना।
जैसे एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, जिसके पास जासूसी कुत्ता होता है। उक्त अधिकारी का जो कार्य होता है वही भगवान भैरव का कार्य है।
श्री भैरव के आठ रूप हैं जिसमें प्रमुख रूप से बटुक भैरव, महाकाल भैरव तथा स्वर्णाकर्षण भैरव प्रमुख हैं। जिस भैरव की पूजा करें उसी रूप के नाम का उच्चारण होना चाहिए। सभी भैरवों में बटुक भैरव उपासना का अधिक प्रचलन है।
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⚜️ अष्टमी तिथि के देवता भगवान शिव भोलेनाथ जी माने जाते हैं। इसलिये इस अष्टमी तिथि को भगवान शिव का दर्शन एवं पूजन अवश्य करना चाहिए। आज अष्टमी तिथि में कच्चा दूध, शहद, काला तिल, बिल्वपत्र एवं पञ्चामृत शिवलिंग पर चढ़ाने से भगवान शिव की कृपा सदैव बनी रहती है। घर में कोई रोगी नहीं होता एवं सभी मनोकामनाओं की सिद्धि तत्काल होती है।
मंगलवार को छोड़कर बाकि अन्य किसी भी दिन की अष्टमी तिथि शुभ मानी गयी है। परन्तु मंगलवार की अष्टमी शुभ नहीं होती। इसलिये इस अष्टमी तिथि में भगवान शिव के पूजन से हर प्रकार की सिद्धियाँ प्राप्त होती है। इस अष्टमी तिथि को अधिकांशतः विष्णु और वैष्णवों का प्राकट्य हुआ है। इसलिये आज अष्टमी तिथि में भगवान शिव और भगवान नारायण दोनों का पूजन एक साथ करके आप अपनी सम्पूर्ण मनोकामनायें पूर्ण कर सकते हैं।



