जब राष्ट्र और धर्म की बात आये तो सभी मतभेद भुलाकर एक हो जाओ : पंडित भूपेन्द्र शास्त्री

सिलवानी । अंचल के ग्राम गैलपुर में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है, व्यास पीठ पर विराजमान पंडित भूपेन्द्र शास्त्री ने कहा कि हमारी संस्कृति विश्व की श्रेष्ठ संस्कृति है, जिसमें विभिन्न विचारधारा, जाति, मतान्तर को 5 मानने वाले लोग हैं, लेकिन जब राष्ट्र और धर्म की बात आये तो हम सभी को एक होकर समर्पित रहने की आवश्यकता है, यही हमारा राष्ट्रीय कर्तव्य है। हम चाहे अनेक विचारधाराओं से संबंधित हैं, लेकिन राष्ट्र के लिए हमारी एक विचारधारा है और हम अपने सनातन मूल्यों को नहीं त्यागेंगे, इनकी रक्षा के लिए सदैव तत्पर क रहेंगे। यह हमारा परम धर्म है, चाहे आप किसी भी भाषा को बोलने वाले हों, आपकी पूजा पद्धति कोई भी हो, लेकिन राष्ट् की बात जब आए तो अपने प्राणों की आहुति देने के लिए हमको तैयार रहने की आवश्यकता है। आगे पंडित शास्त्री जी न ने कहा कि भगवान श्री कृष्ण के द्वारा कंस का वध करने के बाद उनके माता-पिता को कारागार से मुक्त किया गया। जिससे माता-पिता बहुत आनंदित हुए। उन्होंने आगे कहा कि उद्धव और गोपियों के संवाद में गोपियों के प्रेम की विजय होती है। पं उद्धव जी निर्गुण ब्रह्म का उपदेश गोपियों को देने के लिए गए थे, लेकिन गोपियाँ सगुण उपासक थीं, प्रबल प्रेम के बसीभूत होकर, भगवान की भक्ति में संलग्न रहती थीं, वह उद्धव जी से कहती हैं कि, आपका जो निर्गुण ब्रह्म है, हम उसको समझ नहीं पा रहे, हम तो अपने कृष्ण के प्रति समर्पित हैं। कृष्ण ही हमारे सखा भाई बंधु आराध्य सभी कुछ हैं। सगुण भक्ति का विस्तृत वर्णन शास्त्री जी के द्वारा किया गया, कि किस प्रकार भगवान की सगुण भक्ति से हमारा उद्धार हो जाता है। आगे पंडित शास्त्री जी ने कहा कि भगवान श्री कृष्ण का विवाह रुक्मणी जी के साथ हुआ, रुक्मणी जी के परिवार वाले उनका विवाह भगवान श्री कृष्ण से नहीं करना चाहते थे, तो भगवान श्री कृष्ण को रुक्मणी जी ने संदेश भेजा, तो संदेश को प्राप्त करके, भगवान श्री कृष्ण रुक्मणी जी को अपने साथ लेकर जाते हैं, उनका सानंद विवाह संपन्न होता है। आगे पंडित शास्त्री जी ने कहा कि भगवान श्री कृष्ण की भक्ति के माध्यम से हम अपने जीवन में सुख समृद्धि प्राप्त कर सकते हैं। वर्तमान समय में कार्तिक मास चल रहा है, इस कार्तिक मास में हमको भगवान श्री कृष्ण का कीर्तन करते रहना चाहिए। पवित्र कार्तिक मास में प्रातः शीघ्र स्नान करके, भगवान नारायण की आराधना में स्वयं को संलग्न कर लेना चाहिए। जिससे हमारे लिए भगवान की कृपा प्राप्त हो सके। उन्होंने कहा कि समस्त मासों में कार्तिक मास का विशेष महत्व है। इस माह में पवित्र नदियों में स्थान करने का विशेष महत्व है, व्यक्ति को चाहिए कि हम लोग नर्मदा अंचल में रहते हैं, इसलिए नर्मदा नदी में स्नान करें, अथवा गंगा जी में समर्थ के अनुसार स्नान करने के लिए जाएं। जिससे कि हमारे जीवन में सात्विकता का समावेश हो सके, भगवान की भक्ति का भाव जागृत हो सके। पवित्रता पूर्वक रहकर, हम अपने जीवन का कर्तव्य परायणता से निर्वाह कर सकें। कार्तिक मास का विशेष महत्व है, इसमें भगवान नारायण की पूजन, अर्चन से समस्त गृहस्थ लोग अपना कल्याण कर सकते हैं।

