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Today Panchang आज का पंचांग गुरुवार, 25 दिसम्बर 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
गुरुवार 25 दिसम्बर 2025
मंगल श्री विष्णु मंत्र :-
मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः।
*मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥ ☄️ *दिन (वार) – गुरुवार के दिन तेल का मर्दन करने से धनहानि होती है । (मुहूर्तगणपति)
*गुरुवार के दिन धोबी को वस्त्र धुलने या प्रेस करने नहीं देना चाहिए। *गुरुवार को ना तो सर धोना चाहिए, ना शरीर में साबुन लगा कर नहाना चाहिए और ना ही कपडे धोने चाहिए ऐसा करने से घर से लक्ष्मी रुष्ट होकर चली जाती है ।
*गुरुवार को पीतल के बर्तन में चने की दाल, हल्दी, गुड़ डालकर केले के पेड़ पर चढ़ाकर दीपक अथवा धूप जलाएं । *इससे बृहस्पति देव प्रसन्न होते है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है ।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
👸🏻 शिवराज शक 352
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – उत्तरायण
🌧️ ऋतु – सौर शिशिर ऋतु📆 तिथि – गुरुवार पौष माह के शुक्ल पक्ष पंचमी तिथि 01:43 PM तक उपरांत षष्ठी
📝 तिथी स्वामी – पंचमी के देवता हैं नागराज। इस तिथि में नागदेवता की पूजा करने से विष का भय नहीं रहता, स्त्री और पुत्र प्राप्ति होती है। यह लक्ष्मीप्रदा तिथि हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र धनिष्ठा 08:18 AM तक उपरांत शतभिषा
🪐 नक्षत्र स्वामी – धनिष्ठा नक्षत्र का स्वामी ग्रह मंगल है, धनिष्ठा नक्षत्र के अधिष्ठाता देवता अष्ट वसु (आठ वसु) हैं।
⚜️ योग – वज्र योग 03:13 PM तक, उसके बाद सिद्धि योग
प्रथम करण : बालव – 01:42 पी एम तक
द्वितीय करण : कौलव – 01:47 ए एम, दिसम्बर 26 तक तैतिल
🔥 गुलिक कालः- गुरुवार का (शुभ गुलिक) 09:45:00 से 11:10:00 तक
⚜️ दिशाशूल – बृहस्पतिवार को दक्षिण दिशा एवं अग्निकोण का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से सरसो के दाने या जीरा खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल – दिन – 2:00 से 3:25 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 06:48:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 05:13:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:22 ए एम से 06:17 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या : 05:49 ए एम से 07:12 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:01 पी एम से 12:42 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:05 पी एम से 02:46 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:28 पी एम से 05:56 पी एम
🎆 सायाह्न सन्ध्या : 05:31 पी एम से 06:53 पी एम
💧 अमृत काल : 01:35 ए एम, दिसम्बर 26 से 03:14 ए एम, दिसम्बर 26
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:54 पी एम से 12:49 ए एम, दिसम्बर 26
❄️ रवि योग : 08:18 ए एम से 07:12 ए एम, दिसम्बर 26
🚓 यात्रा शकुन-बेसन से बनी मिठाई खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरुवै नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-शमी पूजन करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – रवि योग/ नाताल/ पंचक जारी/ तुलसी पूजन दिवस/ पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जयन्ती, पंजाब राज्य के मुख्यमंत्री सिकन्दर हयात ख़ान स्मृति दिवस, असम के मुख्यमंत्री सरत चन्द सिंन्हा पुण्य तिथि, सुशासन दिवस, भारत के भू.पू. राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह स्मृति दिवस, दशमपिता श्री गुरु गोबिंद सिंह शहादत दिवस, गुरु गोविंद सिंह जी के चारों पुत्र बाबा अजीत सिंह जी, बाबा जुझार सिंह जी, बाबा ज़ोरावर सिंह जी, बाबा फतेह सिंह जी बलीदान दिवस, काशी हिंदू विश्वविद्यालय स्थापना दिवस, महामना मदन मोहन मालवीय जन्म दिवस
✍🏼 *तिथि विशेष – पञ्चमी तिथि को बिल्वफल त्याज्य बताया गया है। पञ्चमी तिथि को खट्टी वस्तुओं का दान और भक्षण दोनों ही त्याज्य है। पञ्चमी तिथि धनप्रद अर्थात धन देनेवाली तिथि मानी जाती है। यह पञ्चमी तिथि अत्यंत शुभ तिथि भी मानी जाती है। इस पञ्चमी तिथि के स्वामी नागराज वासुकी हैं। यह पञ्चमी तिथि पूर्णा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह पञ्चमी तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ और कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायीनी मानी जाती है। 🗺️ *_Vastu tips* 🗽
इन दिशाओं का भी रखें ध्यान इसके साथ ही वास्तु शास्त्र में आग्नेय कोण (दक्षिण-पूर्व दिशा), वायव्य कोण (उत्तर-पश्चिम दिशा), ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) और नैऋत्य कोण (दक्षिण-पश्चिम) से जुड़े नियम भी बताए गए हैं, जिनका ध्यान रखना जरूरी है। ईशान कोण में पूजा घर, वाटर टैंक या बोरिंग रखना शुभ होता है। वहीं आग्नेय कोण में इलेक्ट्रॉनिक सामान आदि रखा जा सकता है। वायव्य कोण की बात करें तो आप इस दिशा में बेडरूम या गैरेज बनवा सकते हैं। वहीं अगर नैऋत्य कोण में कैश काउंटर, या मशीनें रखने से लाभ मिलता है।
*घर के बाहर करें ये चीजें वास्तु शास्त्र में आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार माना गया है कि खराब व टूटी हुई वस्तुएं नकारात्मकता को बढ़ावा देती हैं। ऐसे में जितना जल्दी हो सके इन चीजों को घर से बाहर कर देना चाहिए। ऐसे में अपने घर में टूटा या खराब पड़ा इलेक्ट्रिक सामान और बंद घड़ी बिल्कुल भी नहीं रखनी चाहिए, क्योंकि इनसे नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है, जिससे घर में लड़ाई-झगड़े बढ़ सकते हैं। ♻️ *जीवनोपयोगी कुंजियां* ⚜️ काली किशमिश खाने के फायदे खून की कमी करे दूर काली किशमिश में आयरन और विटामिन B-कॉम्प्लेक्स अधिक होता है, जो हीमोग्लोबिन बढ़ाने में बहुत मददगार साबित होता है। *हार्मोनल बैलेंस महिलाओं के लिए यह विशेष रूप से अच्छी है, खासकर PCOS या भारी PMS के दौरान। यह महिलाओं के हॉर्मोनल स्वास्थ्य को बूस्ट करने में मदद करता है।
*पेट की सफाई इसमें नेचुरल लैक्सेटिव गुण होते हैं, जो कब्ज को दूर करने में गोल्डन किशमिश से बेहतर काम करते हैं। *स्किन और बालों के लिए इसके एंटीऑक्सीडेंट त्वचा को समय से पहले बूढ़ा होने से बचाते हैं और बालों का झड़ना कम करते हैं।
*गोल्डन किशमिश के फायदे एनर्जी बूस्टर गोल्डन किशमिश एनर्जी बूस्टर की तरह काम रता है। यह शरीर को तुरंत ऊर्जा देने में सहायक है। 🍋‍🟩 आरोग्य संजीवनी 🍋
आंवला के फायदे- आंवला का सेवन करके इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाया जा सकता है। डायबिटीज जैसी साइलेंट किलर बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए भी आंवला काफी ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकता है। आंवला में एंटीऑक्सीडेंट गुण भी अच्छी खासी मात्रा में मौजूद होते हैं। सही मात्रा में और सही तरीके से आंवला को अपने डाइट प्लान का हिस्सा बनाएं और अपनी सेहत को फौलाद सा मजबूत बनाएं।
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फायदेमंद नींबू- नींबू में मौजूद तमाम पोषक तत्व डाइजेशन और गट हेल्थ के लिए काफी ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकते हैं। बॉडी को डिटॉक्स करने के लिए भी नींबू को अपने डाइट प्लान में शामिल किया जा सकता है। शरीर के मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करने के लिए नींबू पानी का सेवन किया जा सकता है।
🌷 *गुरु भक्ति योग* 🌹
प्राचीन समय की बात है। राजा नाभाग के अंबरीष नामक एक प्रतापी पुत्र थे। वे बड़े बीर, बुद्धिमान व तपस्वी राजा थे। वे जानते थे कि जिस धन-वैभव के लोभ में पड़कर प्राणी घोर नरक में जाते हैं वह कुछ ही दिनों का सुख है, इसलिए उनका मन सदैव भगवत भक्ति व दीनों की सेवा में लगा रहता था।
*राज्याभिषेक के बाद राजा अंबरीष ने अनेक यज्ञ करके भगवान विष्णु की पूजा-उपासना की जिन्होंने प्रसन्न होकर उनकी रक्षा के लिए अपने ‘सुदर्शन चक्र’ को नियुक्त कर दिया। एक बार अंबरीष ने अपनी पत्नी के साथ द्वादशी प्रधान एकादशी व्रत करने का निश्चय किया। उन्होंने भगवान विष्णु का पूजन किया और ब्राह्मणों को अन्न-धन का भरपूर दान दिया। *तभी वहाँ दुर्वासा ऋषि का आगमन हो गया। वे परम तपस्वी व अलौकिक शक्तियों से युक्त थे किंतु क्रोधी स्वभाव के कारण उनकी सेवा-सुश्रुसा में विशेष सावधानी अपेक्षित थी।
*अंबरीष ने उनका स्वागत किया और उन्हें श्रेष्ठ आसन पर बिठाया। तत्पश्चात् दुर्वासा ऋषि की पूजा करके उसने प्रेमपूर्वक भोजन ग्रहण करने का आग्रह किया। दुर्वासा ऋषि ने उनका आग्रह स्वीकार कर लिया। किंतु भोजन से पूर्व नित्य कर्मों से निवृत्त होने के लिये वे यमुना नदी के तट पर चले गये। वे परब्रह्म का ध्यान कर यमुना के जल में स्नान करने लगे। *इधर द्वादशी केवल कुछ ही क्षण शेष रह गयी थी। स्वयं को धर्मसंकट में देख राजा अम्बरीष ब्राह्मणों से परामर्श करते हुए बोले.. “मान्यवरों ! ब्राह्मण को बिना भोजन करवाए स्वयं खा लेना और द्वादशी रहते भोजन न करना – दोनो ही मनुष्य को पाप का भागी बनाते हैं। इसलिये इस समय आप मुझे ऐसा उपाय बताएँ, जिससे कि मैं पाप का भागी न बन सकूँ।”
*ब्राह्मण बोले – “राजन ! शास्त्रों मे कहा गया है कि पानी भोजन करने के समान है भी और समान नहीं भी है। इसलिये इस समय आप जल पी कर द्वादशी का नियम पूर्ण कीजिये।” यह सुनकर अंबरीष ने जल पी लिया और दुर्वासा ऋषि की प्रतीक्षा करने लगे। जब दुर्वासा ऋषि लौटे तो उन्होंने तपोबल से जान लिया कि अंबरीष भोजन कर चुके हैं। अत: वे क्रोधित हो उठे और कटु स्वर में बोले.. *“दुष्ट अंबरीष ! तू धन के मद में चूर होकर स्वयं को बहुत बड़ा मानता है। तूने मेरा तिरस्कार किया है। मुझे भोजन का निमंत्रण दिया लेकिन मुझसे पहले स्वयं भोजन कर लिया। अब देख मैं तुझे तेरी दुष्टता का दंड देता हूँ।” क्रोधित दुर्वासा ने अपनी एक जटा उखाड़ी और अंबरीष को मारने के लिए एक भयंकर और विकराल कृत्या उत्पन्न की। कृत्या तलवार लेकर अंबरीष की ओर बढ़ी किंतु वे बिना विचलित हुए मन ही मन भगवान विष्णु का स्मरण करते रहे।
जैसे ही कृत्या ने उनके ऊपर आक्रमण करना चाहा; अंबरीष का रक्षक सुदर्शन चक्र सक्रिय हो गया और पल भर में उसने कृत्या को जलाकर भस्म कर दिया। जब दुर्वासा ऋषि ने देखा कि कि चक्र तेजी से उन्हीं की ओर बढ़ रहा है तो वे भयभीत हो गये।
अपने प्राणों की रक्षा के लिए वे आकाश, पाताल, पृथ्वी, समुद्र, पर्वत, वन आदि अनेक स्थानों पर शरण लेने गये किंतु सुदर्शन चक्र ने उनका पीछा नहीं छोड़ा। घबराकर उन्होंने ब्रह्मा जी से रक्षा की गुहार लगायी। ब्रह्मा जी प्रकट हुए किंतु असमर्थ होकर बोले, “वत्स, भगवान विष्णु द्वारा बनाये गये नियमों से मैं बँधा हुआ हूँ। प्रजापति, इंद्र, सूर्य आदि सभी देवगण भी इन नियमों का उल्लंघन नहीं कर सकते।
हम नारायण की आज्ञा के अनुसार ही सृष्टि के प्राणियों का कल्याण करते हैं। इस प्रकार भगवान विष्णु के भक्त के शत्रु की रक्षा करना हमारे वश में नहीं है।” ब्रह्माजी की बातों से निराश होकर दुर्वासा ऋषि भगवान शंकर की शरण में गये। पूरा वृत्तांत सुनने के बाद महादेव जी ने उन्हें समझाया…
*“ऋषिवर ! यह सुदर्शन चक्र भगवान विष्णु का शस्त्र है जो उनके भक्तजन की रक्षा करता है। इसका तेज सभी के लिए असहनीय है। अतः उचित होगा कि आप स्वयं भगवान विष्णु की शरण में जाएँ। केवल वे ही इस दिव्य शस्त्र से आपकी रक्षा कर सकते हैं और आपका मंगल हो सकता है।” वहाँ से भी निराश होकर दुर्वासा ऋषि भगवान विष्णु की शरण में पहुँचे और उनके चरणों में सिर नवाकर दया की गुहार लगायी। आर्त स्वर में दुर्वासा बोले.. *“भगवन मैं आपका अपराधी हूँ। आपके प्रभाव से अनभिज्ञ होकर मैंने आपके परम भक्त राजा अंबरीष को मारने का प्रयास किया। हे दयानिधि, कृपा करके मेरी इस धृष्टता को क्षमा कर मेरे प्राणों की रक्षा कीजिए।”
*भगवान नारायण ने दुर्वासा ऋषि को उठाया और समझाया, “मुनिवर ! मैं सर्वदा भक्तों के अधीन हूँ। मेरे सीधे-सादे भक्तों ने अपने प्रेमपाश में मुझे बाँध रखा है। भक्तों का एकमात्र आश्रय मैं ही हूँ। अतः मैं स्वयं अपने व देवी लक्ष्मी से भी बढ़कर अपने भक्तों को चाहता हूँ। जो भक्त अपने बंधु-बांधव और समस्त भोग-विलास त्यागकर मेरी शरण में आ गये हैं उन्हें किसी प्रकार छोड़ने का विचार मैं कदापि नहीं कर सकता। *यदि आप इस विपत्ति से बचना चाहते हैं तो मेरे परम भक्त अंबरीष के पास ही जाइए। उसके प्रसन्न होने पर आपकी कठिनाई अवश्य दूर हो जाएगी।” नारायण की सलाह पाकर दुर्वासा अंबरीष के पास पहुँचे और अपने अपराध के लिए क्षमा माँगने लगे।
*परम तपस्वी महर्षि दुर्वासा की यह दुर्दशा देखकर अंबरीष को अत्यंत दुख हुआ। उन्होंने सुदर्शन चक्र की स्तुति की और प्रार्थना पूर्वक आग्रह किया कि वह अब लौट जाय। उनकी स्तुति से प्रसन्न होकर सुदर्शन चक्र ने अपनी दिशा बदल ली और दुर्वासा ऋषि को भयमुक्त कर दिया। जबसे दुर्वासा ऋषि वहाँ से गये थे तबसे राजा अम्बरीष ने भोजन ग्रहण नहीं किया था। वे ऋषि को भोजन कराने की प्रतीक्षा करते रहे। *उनके लौटकर आ जाने व भयमुक्त हो जाने के बाद अम्बरीष ने सबसे पहले उन्हें आदर पूर्वक बैठाकर उनकी विधि सहित पूजा की और प्रेम पूर्वक भोजन कराया। राजा के इस व्यवहार से ऋषि दुर्वासा अत्यंत प्रसन्न हुए और उन्हें अनेकशः आशीर्वाद देकर वहाँ से विदा हुए।
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⚜️ पञ्चमी तिथि में शिव जी का पूजन सभी कामनाओं की पूर्ति करता है। आज पञ्चमी तिथि में नाग देवता का पूजन करके उन्हें बहती नदी में प्रवाहित करने से भय और कष्ट आदि की सहज ही निवृत्ति हो जाती है। ऐसा करने से यहाँ तक की कालसर्प दोष तक की शान्ति हो जाती है। अगर भूतकाल में किसी की मृत्यु सर्पदंश से हुई हो तो उसके नाम से सर्प पूजन से उसकी भी मुक्ति तक हो जाती है।।
⛈️ मास – पौष मास
🌒 *_पक्ष – शुक्ल पक्ष

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