पीले सोने का कारोबार चरम पर, बंद खदानों से उठ रही रेत खनिज विभाग गायब

खनिज विभाग की नजरों में सब कुछ ठीक
रिपोर्टर : विनोद साहू
बाड़ी । मध्यप्रदेश सरकार की रेत खनिज नीति स्पष्ट और पारदर्शी न होने के चलते रेत ठेकेदारों ने सिंडीकेट समुह बनाकर रेत के दाम को आसमान पर स्थापित कर दिया।
एक ट्रैक्टर ट्राली में दो सो से सबा दो सो फिट रेत आती हैं और ठेकेदार उसकी रायल्टी के नाम पर लोकल में 4200 रुपये और व्यवसाय के लिए ले जाने की रायल्टी 5200 रुपये वसूलता हैं इसमें ट्राली भरवाई के एक हजार अतिरिक्त लगते हैं । जिससे एक ट्रैक्टर ट्राली रेत बाजार में कम से कम दस हजार रुपए में बामुश्किल मिलती हैं ।
खनिज विभाग की अनदेखी या ठेकेदार हाबी।
रायसेन जिले के अंतिम छोर से नर्मदा नदी निकलती हैं जो सीहोर, नर्मदापुरम ( होशंगाबाद) व नरसिंहपुर जिले से जुड़ी हैं और इन चारों जिलों में रेत ठेकेदार एक राय होकर नर्मदा नदी में कहीं से भी रेत उठा सकते हैं और कहीं की भी रायल्टी थमा देते हैं ।
रेत मौतलसिर रेत खदान की रायल्टी भारकच्छ की ।
सरकार के बनाए नियमों से आम आदमी सड़क पर नहीं चलता फिर तो यह रेत का कारोबार हैं इसमें नियम सरकार के नहीं ठेकेदार के चलते हैं, एक माह से अधिक समय से मौतलसिर रेत खदान चालू हैं और रायल्टी भारकच्छ स्टाक से काटी जा रही।
खनिज अधिकारी रायसेन का कहना है कि रेत ठेकेदार को सरकार ने पूरे नर्मदा नदी का एग्रीमेंट किया जहां से भी रेत सुगमता से उपलब्ध होती वहां से बह उठा सकता हैं ।
अब सवाल उठता हैं कि जब रेत ठेकेदार मनमर्जी और मनचाहे रेत घाट से रेत उठा सकता हैं और कहीं की भी रायल्टी काट सकता हैं तो फिर खनिज विभाग का क्या काम ।



