
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शुक्रवार 20 मार्च 2026
ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥
🌌 *दिन (वार) – शुक्रवार के दिन दक्षिणावर्ती शंख से भगवान विष्णु पर जल चढ़ाकर उन्हें पीले चन्दन अथवा केसर का तिलक करें। इस उपाय में मां लक्ष्मी जल्दी प्रसन्न हो जाती हैं।
*शुक्रवार के दिन नियम पूर्वक धन लाभ के लिए लक्ष्मी माँ को अत्यंत प्रिय “श्री सूक्त”, “महालक्ष्मी अष्टकम” एवं समस्त संकटो को दूर करने के लिए “माँ दुर्गा के 32 चमत्कारी नमो का पाठ” अवश्य ही करें । *शुक्रवार के दिन माँ लक्ष्मी को हलवे या खीर का भोग लगाना चाहिए ।
शुक्रवार के दिन शुक्र ग्रह की आराधना करने से जीवन में समस्त सुख, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है बड़ा भवन, विदेश यात्रा के योग बनते है।
🔮 *शुभ हिन्दू नववर्ष 2026 विक्रम संवत : 2083 सिद्धार्थी विक्रम : 1969 शर्वरी*
🌐 रौद्र संवत्सर विक्रम संवत 2083,
✡️ शक संवत 1948 (पराभव संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2082 पिङ्गल
☸️ काली सम्वत् 5127
🕉️ संवत्सर (बृहस्पति) पराभव
☣️ आयन – उत्तरायण
☂️ ऋतु – सौर बसंत ऋतु
☀️ मास – चैत्र मास
🌒 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – शुक्रवार चैत्र माह के शुक्ल पक्ष द्वितीया तिथि 02:31 AM तक उपरांत तृतीया
✏️ तिथि स्वामी – द्वितीय तिथि (दूज) के स्वामी ब्रह्मा जी हैं, जिन्हें विधाता भी कहा जाता हैं, इसका विशेष नाम ‘सुमंगला’ है। यह भद्रा संज्ञक तिथि है।
💫 नक्षत्र- नक्षत्र रेवती 02:27 AM तक उपरांत अश्विनी
🪐 नक्षत्र स्वामी – रेवती नक्षत्र के स्वामी ग्रह बुध हैं। रेवती नक्षत्र के अधिष्ठाता देवता पूषा या पूषण हैं।
⚜️ योग – ब्रह्म योग 10:14 PM तक, उसके बाद इन्द्र योग
⚡ प्रथम करण : बालव 03:44 PM तक
✨ द्वितीय करण : कौलव 02:31 AM तक, बाद तैतिल
🔥 गुलिक काल : – शुक्रवार को शुभ गुलिक प्रात: 7:30 से 9:00 तक
⚜️ दिशाशूल – शुक्रवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से दही में चीनी या मिश्री डालकर उसे खाकर जाएँ
🤖 राहुकाल -दिन – 11:13 से 12:35 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 06:13:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 06:09:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:50 ए एम से 05:38 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:14 ए एम से 06:25 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:05 पी एम से 12:53 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 02:30 पी एम से 03:18 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:30 पी एम से 06:54 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या : 06:32 पी एम से 07:43 पी एम
💧 अमृत काल : 12:13 ए एम, मार्च 21 से 01:43 ए एम, मार्च 21
🐃 निशिता मुहूर्त : 12:04 ए एम, मार्च 21 से 12:52 ए एम, मार्च 21
⭐ सर्वार्थ सिद्धि योग पूरे दिन
🌊 अमृत सिद्धि योग : 06:25 ए एम से 02:27 ए एम, मार्च 21
🚓 यात्रा शकुन-शुक्रवार को मीठा दही खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-लक्ष्मी मन्दिर में खीर चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-गूलर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – चैत्र प्रारम्भ दक्षिण/ झूलेलाल जयन्ती/ वसन्त सम्पात/ चन्द्र दर्शन/ पञ्चक समाप्ति 26.27/ ईद अल-फितर/ खगोलीय वसंत ऋतु प्रारंभ/ गण्ड मूल/ सर्वार्थ सिद्धि योग/ अमृत सिद्धि योग/ आडल योग/ विडाल योग/ विश्व मौखिक स्वास्थ्य दिवस, सामाजिक अधिकारिता स्मृति दिवस, राजस्थान के इतिहासकार कर्नल टॉड जन्म दिवस, अभिनेत्री कंगना रनौत जन्म दिवस, राजस्थान के इतिहासकार कर्नल टॉड जन्म दिवस, प्रसिद्ध भारतीय पार्श्वगायिका अलका याग्निक जयन्ती, मुगल बादशाह दारा शिकोह जयन्ती, दिल्ली सल्तनत के सुल्तान मोहम्मद बिन तुगलक स्मृति दिवस, स्व दल गोविंद जयन्ती, भारतीय ऑलराउंडर गेंदबाज मदन लाल जन्म दिवस, विश्व गौरैया दिवस, डच ईस्ट इंडिया कंपनी स्थापना दिवस, अंतर्राष्ट्रीय खुशी दिवस (International Day of Happiness)
✍🏼 *तिथि विशेष – द्वितीय तिथि को कटोरी फल का तथा तृतीया तिथि है नमक का दान और भक्षण दोनों ही त्याज्य है। द्वितीय तिथि सुमंगला और कार्य सिद्धकारी तिथि मानी जाती है। इस द्वितीय तिथि के स्वामी भगवान ब्रह्मा जी को बताया गया है। यह द्वितीय की तिथि भद्रा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह द्वितीय तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायिनी होती है। 🏘️ *_Vastu tips* 🏚️
वास्तु शास्त्र में आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार, घर की रसोई में पूरे जहां परिवार के लिए भोजन तैयार किया जाता है, इसलिए इसका संबंध सीधे स्वास्थ्य, सुख और समृद्धि से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि रसोई घर में मां अन्नपूर्णा का वास होता है, जिन्हें अन्न और पोषण की देवी माना जाता है। इसी वजह से किचन को साफ सुथरा और पवित्र रखना जरूरी माना जाता है।
*किचन में जूते चप्पल पहनना क्यों माना जाता है गलत जूते-चप्पल बाहर की धूल मिट्टी और नकारात्मक ऊर्जा को अपने साथ लेकर आते हैं। जब कोई व्यक्ति जूते पहनकर किचन में प्रवेश करता है तो यह अशुद्धियां भी किचन में पहुंच जाती हैं। इससे रसोई की पवित्रता प्रभावित होती है और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह भी कम हो सकता है। इसलिए पारंपरिक रूप से किचन में जूते और चप्पल पहनकर जाने से बचने की सलाह दी जाती है। 🔰 *जीवनोपयोगी कुंजियां* ⚜️ 🔴 सीनियर्स को किन नट्स से बचना चाहिए?
सुपारी (Betel Nut) WHO ने इसे कैंसर का कारण माना है।* मसूड़ों और दांतों को नुकसान, हार्ट और मेटाबॉलिज़्म पर बुरा असर।*
पैकेज्ड/फ्राइड नट्स नमक, मसाले और तेल से भरे ये नट्स हाई BP, स्ट्रोक और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ाते हैं।* हमेशा रॉ या ड्राई रोस्टेड नट्स चुनें।*
काजू हाई कैलोरी और सैचुरेटेड फैट वाला नट।* ज़रूरत से ज़्यादा खाने पर कोलेस्ट्रॉल और किडनी स्टोन का रिस्क।*
डायबिटीज़ वाले बुजुर्गों के लिए नुकसानदेह।* मैकडेमिया और पीकंस हाई कैलोरी और हाई फैट वाले इंपोर्टेड नट्स।*
*ज़्यादातर चॉकलेट या नमक कोटिंग में बिकते हैं, जो इन्हें और भी अनहेल्दी बना देते हैं। 🍋🟩 *आरोग्य संजीवनी* 🥑 सेलेनियम थायराइड हार्मोन को सक्रिय रूप में बदलने में मदद करता है और ग्रंथि को ‘ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस’ से बचाता है।*
फायदा: यह विशेष रूप से हाशिमोटो जैसी ऑटोइम्यून समस्याओं में प्रभावी है।* प्राकृतिक स्रोत: ब्राजील नट्स (दिन में सिर्फ 2 काफी हैं), अंडे और सूरजमुखी के बीज। जिंक थायराइड हार्मोन के उत्पादन और उनके रिसेप्शन दोनों के लिए आवश्यक है। जिंक की कमी से हार्मोन का स्तर गिर सकता है। स्रोत: कद्दू के बीज, छोले, और नट्स। विटामिन D3 अध्ययनों से पता चला है कि थायराइड की समस्याओं (खासकर हाइपोथायरायडिज्म) से जूझ रहे अधिकांश लोगों में विटामिन D की कमी होती है।*
फायदा: यह इम्यून सिस्टम को मजबूत करता है और थायराइड सूजन को कम करने में मदद कर सकता है।
मैग्नीशियम थायराइड हार्मोन T_4 को सक्रिय T_3 में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह थकान और मांसपेशियों के दर्द जैसे लक्षणों को कम करने में भी सहायक है।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
बुरी आत्माओं या भूतों से परेशानी के लिए पिशाच पीड़ा ज्योतिषीय योग हैं। इन योगों को प्रमुख ज्योतिषीय पाठ के रूप में कम जाना जाता है जैसे कि पराशर होरा शास्त्र आदि ने इन पर चर्चा नहीं की है। उनके होरा शास्त्र में ऋषि पाराशर ने विस्तृत रूप से समझाया है, हालांकि पिछले जीवन शापों के लिए ज्योतिषीय योग-पूर्वा-जनम-शाप-व्यसन ’में हैं। पराशर होरा शास्त्र के अध्याय संख्या 84 में उन 70 योगों की चर्चा की गई है जो पिछले जन्म के शापों के कारण होते हैं जो वर्तमान जन्म में संतानहीनता देते हैं। आजकल ज्योतिषियों ने इसके लिए-पितृ-दोष ’शब्द का उपयोग करना शुरू कर दिया है और उनके सार को समझे बिना इन योगों को सरल बना दिया है। पूर्व जन्म से पिता द्वारा शाप के लिए 11 योग, माता से आने वाले श्राप के लिए 13 योग, भाई से श्राप के लिए 13 योग, मामा द्वारा शाप के लिए 4 योग, ब्राह्मण (पुजारी) के लिए 7 योग, 11 योग हैं। पत्नी (पति या पत्नी) और 9 योगों से शाप का वर्णन करते हैं जो पिछले जीवन में पिशाच पीड़ा या आत्मा द्वारा अभिशाप की व्याख्या करते हैं। ये योग मुख्य रूप से संतानहीनता के लिए हैं।* ऋषि पराशर ने अपने ‘होरा शास्त्र’ में इन पिछले जीवन शापों के प्रभाव को दूर करने के लिए ज्योतिषीय उपाय भी दिए हैं। इन ज्योतिषीय उपायों में दान, मंत्र जाप, पूजा, यन्त्र, वृक्ष लगाना, तीर्थों के लिए जाना, गाय और ब्राह्मण की सेवा करना आदि हैं, ऋषि पाराशर ने विशेष रूप से संकेत दिया है कि अपने चार्ट में इन योगों को रखने वाले को स्वयं इन उपायों को करना चाहिए। पाराशर ने कहीं भी उल्लेख नहीं किया है कि कोई व्यक्ति पूजा या मंत्र जापम करने के लिए एक पुजारी को रख सकता है। पिछले जन्म के ये श्राप हमारे अपने बुरे कर्मों के कारण होते हैं, जिन्हें हम धैर्यपूर्वक समाप्त करके या शुद्ध हृदय से प्रशस्त कर्म (तपस्या) करके प्राप्त कर सकते हैं। ऋषि पराशर ने हमारे ऊपर पूजा करने के लिए किसी रत्न को पहनने या किसी को अनुबंध देने की सिफारिश नहीं की है। आधुनिक युग के ज्योतिषियों ने ऋषि पाराशर द्वारा दिए गए इन पूर्वा शाप शरlप ’योगों की देखरेख की है और कुंडली में उन्हें पितृ दोष’ के रूप में संबोधित करना शुरू कर दिया है, जो कुछ घरों में राहु की नियुक्ति का संकेत देते हैं। वास्तव में ऋषि पराशर ने पिछले जीवन बुरे कर्मों के कारण शाप देने के लिए 70 योगों का उल्लेख किया है जो वर्तमान जन्म में संतान को नकार सकते हैं।*
शनि-राहु या शनि-केतु की युति होती है तो इस युति को प्रेत शाप योग कहते हैं। दूसरा यह कि राहु अथवा केतु का चतुर्थ या दूसरे स्थान से संबंध होने पर या लग्न के अंश के समीप होने पर भी ये योग बनता है।* “लग्न में राहु के साथ चंद्रमा पीड़ित और 1/5/9 घरों में अशुभ ग्रहों को पिसाच योग देता है”। चंद्रमा के अलावा राहु के साथ सूर्य लग्न में 1/5/9 घरों में रखे गए अशुभ ग्रहों के साथ इस खतरनाक योग का निर्माण करते हैं।*
बुरी आत्माओं से पीड़ित लोगों की कुंडली का अध्ययन करने के ज्योतिषीय संयोजन को राशी, नवमांश और त्रिशमांश चार्ट में जांचना चाहिए।* अशुभ ग्रहों राहु, मंगल और शनि से पीड़ित घर बुरी आत्माओं से परेशानी दे सकते हैं।*
सामान्य लक्षण
चंद्रमा के साथ 1 घर राहु के साथ और 5 वें और 9 वें किसी भी अशुभ ग्रहों स्थिति के साथ जुड़ने से बुरी आत्मा की समस्या पैदा होती है।* संक्रमण की स्थिति भी यही समस्या पैदा कर सकती है।*
यदि दुष्ट ग्रह शनि, मंगल और राहु की युति हो तो जातक बुरी आत्माओं के कारण समस्या का सामना करता है।* यदि शनि, राहु, केतु या मंगल में से कोई भी ग्रह जातक की जन्म कुंडली के 7 वें घर में पड़ता है, तो व्यक्ति बुरी आत्माओं के कारण परेशान रहता है।*
प्रभाव
पारिवारिक संबंधों को नष्ट कर देता है।* अपने लोगों को चोट पहुंचlता है।*
मतिभ्रम करेगा।* नकारात्मकता को आकर्षित करता है*
असामान्य और अजीब व्यवहार
जातक अत्यंत शक्तिशाली बनता है। असंभव कार्य आसानी से कर सकता है। अचानक चिल्लाना शुरू कर देता है।नियंत्रण से बाहर हो जाता है।कठोर और अशिष्ट व्यवहार करता है। तेजी से और श्रवण साँस लेता है।भूख और प्यास से रहित हो जाता है।* उपचार
भगवान शिव की पूजा करें और 1100 बार शिव मंत्र का जाप करें।*
हर सोमवार को नींबू, 21 मुनक्के, 1 मुखी रुद्राक्ष शिवलिंग पर चढ़ाएं।* रुद्राक्ष माला पहनें।*
घर के बुजुर्गों को बुरी आत्माओं से माफी का अनुरोध करना चाहिए।* भगवान हनुमान और देवी दुर्गा की पूजा करें।*
किसी भी लोहे की बनी वस्तु जैसे चाकू और कैंची को तकिया के नीचे रखना चाहिए।* कमरे में हल्की अगरबत्ती।*
कमरे में भगवान हनुमान, देवी दुर्गा या भगवान शिव की तस्वीरें लटकाएं।* बुरी आत्माओं के लिए कभी भी अशिष्ट शब्दों का दुरुपयोग और उपयोग न करें। ऐसा करने से उन्हें और भी गुस्सा आएगा।*
बुरी नजर से दूर रहने के लिए हनुमान चालीसा का जाप करें।* बुराई के प्रभाव को कम करने के लिए माथे पर हनुमान टीका लगाएं।*
बुरी आत्माओं से मुक्त होने के लिए अपने हाथ पर धतूरा की शाखाओं को बांधें।* अपने घर के मुख्य द्वार पर सफेद फूल लगाएं।*
अपने घर के हर कोने में गंगाजल छिड़कें।_*
1 नारियल, 1 कील, 100 ग्राम तिल लें और फिर एक काले कपड़े में बांध दें और शनिवार को नदी में प्रवाहित कर दें।
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⚜️ प्रजापति व्रत दूज को ही मनाया जाता है तथा किसी भी नए कार्य की शुरुआत से पहले एवं ज्ञान प्राप्ति हेतु ब्रह्मा जी का पूजन आवश्यक करना चाहिए। वैसे तो मूहूर्त चिंतामणि आदि ग्रंथों के अनुसार द्वितीय तिथि अत्यंत शुभ फलदायिनी तिथि मानी जाती है। परंतु श्रावण और भाद्रपद मास में इस द्वितीया तिथि का प्रभाव शून्य हो जाता है। इसलिए श्रावण और भद्रपद की द्वितीया तिथि को कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए।



