खरीदी केंद्र दशरमन में साहूकार से चल रही खरीदी, किसान रहे नदारद
रिपोर्टर : सत्तीश चौरसिया
उमरियापान l खरीदी केंद्र दशरमन मे जब खरीदी के विषय में जानकारी ली गई तो बताया गया कि यहां साहूकारों के द्वारा ही खरीदी चल रही है केंद्र प्रभारी की ऐसी मनमानी चल रही हैं कि मौसम खराब होने के बाद भी केंद्र में कोई व्यवस्था नही की गई, साहूकारों का खराब माल तौलकर अपनी जेब गर्म की जा रही हैं। साहूकारों का कमीशन देखना हैं तो केंद्र प्रभारी दशरमन संतोष दुबे से मिलीये। दशरमन में धान कम बदरा ज्यादा दिखाई दे रहा हैं ऐसा लग रहा हैं जैसे खरीदी प्रभारी उच्चाधिकारियों को चुनौती दे रहा हैं। किसानो की मांग हैं कि ऐसा प्रभारी हमको नही चाहिए इसकी उच्चाधिकारियों से जांच होना चाहिए। जिले में धान गेहूं की खरीदी की व्यवस्थाएं स्थाई हैं।लेकिन यहां व्यवस्थाएं अस्थाई हैं। खरीदी केंद्रों में अपनी उपज को बेचने के लिए अपनी वर्ष भर की मेहनत को बेचने के लिए इंतजार करते अन्नदाता की नजर हमेशा आसमान की तरफ रहती है कि कहीं उपर वाला पानी न गिरा दे और उसकी वर्ष भर की मेहनत पर क्वालिटी का डंडा चलाकर प्रशासन उसकी फसल को रिजेक्ट न कर दे। यहीं नहीं किसान के अनाज को बेचे जाने के बाद भी रिजेक्ट कर दिया जाता है। ऐसे किसान जिले में 15 से अधिक हैं जिनकी उपज बेचे जाने के बाद गोदामों से रिजेक्ट कर दी गई। अब किसान भुगतान के लिए चक्कर लगाते रहते हैं पर दशरमन खरीदी प्रभारी को इन सबसे क्या मतलब वहां पर तो कोई व्यवस्था नही हैं। जिले हर वर्ष दो बार खरीदी केंद्रों में किसान अपना धान, गेहूं लेकर पहुंचता है। यहां पर भी सारी व्यवस्थाएं अस्थाई ही होती हैं। बिजली कनेक्शन से लेकर अन्य व्यवस्थाएं भी अस्थाई हैं। धान और गेहूं के सीजन में खरीदी केंद्रों पर हजारों किसान अपनी धान लेकर पहुंचते हैं। यहां पर भी किसान के अनाज बेचने तक या बेचने के बाद बारिश सहित अन्य आपदाओं से बचाने के लिए कोई इंतजाम नहीं होते हैं। इन्ही सब भ्रष्टाचारो के कारण सरकार खरीदी केंद्रों का कम्पनियों से निजीकरण कर रही हैं।
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जानकार बताते हैं कि मिलर, खरीदी केंद्र प्रभारी और फर्जी किसानों का गिरोह खुलेआम कागजों में धान खरीदी के बाद उसके एवज में सरकार से मिलने वाली का बंदरबाट करते हैं। इसमें मिलर को बिना धान परिवहन के ही परिवहन राशि मिलने से अतिरिक्त लाभ होता है। धान की मात्रा के एवज में चावल जमा करने के लिए खराब धान सस्ते दर पर मंगवाई जाती है, इससे निम्न गुणवत्ता की धान जरुरतमंद परिवारों को आपूर्ति होती है।



