जन्म से मृत्यु का बोध कराती है श्रीमद् भागवत कथा: श्री ब्रह्मचारी महाराज
सिलवानी । आप सब पर भगवान जी की अहेतु की कृपा का दर्शन है। जिसकी वजह से आप आज कथा का आंनद ले रहे है। और श्रीमद भगवत कथा का रसपान कर पा रहें है। क्यूंकि जिन्हे गोविन्द प्रदान करते है जितना प्रदान करते है उसे उतना ही मिलता है।
उक्ताशय के उदगार नगर के वार्ड क्रमांक 14 उदयपुरा रोड पर चल रही श्रीमद्भागवत महापुराण के द्वितीय दिवस श्री श्री 1008 श्री ब्रह्मचारी जी महाराज जी ने व्यक्त किए। उन्होंने भागवत जी के प्रथम श्लोक का उच्चारण करते हुए कहा कि अगर आप भागवत कथा सुनकर कुछ पाना चाहते हैं, कुछ सीखना चाहते है तो कथा में प्यासे बन कर आये, कुछ सिखने के उद्देश्य से, कुछ पाने के उद्देश्य से आएं, तो ये भागवत कथा जरूर आपको कुछ नहीं बल्कि बहुत कुछ देगी। ये भगवान जिनकी आप कथा सुनने आएं है अगर आप उनके बारे में जानने की कोशिश करें तो भगवान के वो सत्य है सर्वेश्वर है, जो सृष्टि की रचना करता हैं सृष्टि का पालन करता हैं। और जब कोई आपत्ति आती है तो सृष्टि का संहार भी करते हैं।
श्री ब्रह्मचारी जी ने कहा कि हमें जो ये मानव जीवन मिला है। ये विषय वस्तु को भोगने के लिए नहीं मिला है लेकिन आज का मानव भगवान की भक्ति को छोड़ विषय वस्तु को भोगने में लगा हुआ है। उसका सारा ध्यान संसारिक विषयों को भोगने में ही लगा हुआ है। परन्तु मानव जीवन का उद्देश्य कृष्ण प्राप्ति शास्वत है अथवा हमारे जीवन का उद्देश्य कृष्ण को पाकर ही जीवन छोड़ना है और अगर हम ये दृढ़ निश्चय कर लेंगे की हमे जीवन में कृष्ण को पाना ही है तो हमारे लिए इससे बढ़कर कोई और सुख, संपत्ति या सम्पदा नहीं है। भगवत भागीरथी में जो आकर आप आज स्नान कर रहें है इसका मतलब ये है की स्वयं श्री कृष्ण आपसे मिलने आए है। जो भी इस भागवत के तट पर आकर विराजमान हो जाता है भागवत उसका कल्याण कर देती है।
कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओ ने कथा श्रवण कर भक्ति रस में भाव विभोर हो गए।




