किसान ऐसे परेशान : दिन यूरिया की कतार में तो रात सिंचाई में बीत रही, गेहूं में लगा जड़ माहू रोग
रिपोर्टर : शिवलाल यादव
रायसेन । शहर सहित रायसेन जिले के किसानों की समस्याएं खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। कई दिनों से यूरिया, डीएपी खाद के लिए मारामारी चल रही है। सुबह से किसान खाद विक्रय केंद्रों पर इस उम्मीद से पहुंचते हैं कि आज उन्हें खाद मिल जाएगा। लेकिन जब शाम तक भी हाथ में कुछ नहीं लगता है तो निराश होकर घर लौट आते हैं। दिन भर खाद के लिए मशक्कत करने के बाद जब घर पहुंचते हैं तो पता चलता है कि आज रात के समय सिंचाई के लिए बिजली मिलेगी। इसलिए पानी देने के लिए रात खेतों में कट रही है।
गेंहू में लगा जड़माहू रोग…..
उनकी समस्या तो और भी ज्यादा बढ़ जाती है जिनके यहां दिन के समय सिंचाई के लिए बिजली मिलती है। ऐसे किसान खाद के लिए नहीं जा पा रहे हैं। इसी के साथ उपज बेचने मंडी जाओ तो वहां की अपनी ही समस्याएं हैं जिनसे किसान अब परेशान हो चुके हैं। इन परेशानियों तो किसान जूझ ही रहा है पर साथ ही एक नई परेशानी भी सामने आई है। दरअसल गेहूं में जड़माहू रोग लगने लगा है जो फसल को सुखा रहा है।
यूरिया: डेढ़ रेक में 2000 टन आया और बंट गया, अब फिर डिमांड
किसान खाद के लिए अभी भी परेशान नजर आ रहे हैं। दो दिन पहले विदिशा में डेढ़ रेक लगी थी तो 2000 टन यूरिया खाद रायसेन, बरेली, बेगमगंज, सिलवानी, गौहरगंज के लिए मिला था । लेकिन यह भी आते ही खत्म हो गया। अब फिर से यूरिया, डीएपी खाद को लेकर किल्लत बनी हुई है। हालांकि औबेदुल्लागंज, मंडीदीप , सलामतपुर में रेक लगने पर तहसील क्षेत्रों को खाद मिला है। इस तरह से अभी तक जिले में 46384 टन यूरिया आ चुका है ।जबकि कुल डिमांड 76 हजार 500 टन की है। पैमत के किसान रमेश वर्मा, द्वारका पटेल का कहना है कि जब बोवनी से लेकर सिंचाई तक में यूरिया खाद की जरूरत होती है तो फिर इसकी किल्लत होना समझ से बाहर है।
फसल : गेहूं पीला पड़ने लगा
गेहूं की फसल में इस समय जड़माहू कीट का प्रकोप दिखाई देने लगा है। इस रोग में पौधे पीले होकर सूखने लगते हैं। समस्या का समय पर निदान नहीं किए जाने पर यह कीट फसल को बड़ा नुकसान पहुंचाता है। जड़माहू कीट गेंहू के पौधे के जड़ भाग में चिपका हुआ रहता है जो निरन्तर रस चूसकर पौधे को कमजोर कर सुखा देता है। कृषि विज्ञान केंद्र नकतरा के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ स्वप्निल दुबे ने बताया कि संभावित खेतों में पौधे को उखाड़कर ध्यान से देखने पर बारीक हल्के पीले, भूरे व काले रंग के कीट चिपके हुए दिखाई देते हैं। मौसम में उच्च आर्द्रता व उच्च तापमान होने पर यह कीट अत्यधिक तेजी से फैलता है। अनुकूल परिस्थितियां होने पर यह कीट फसल को नष्ट करने की क्षमता रखता है।
किसानों को सलाह…..
अभी तक जहां गेहूं की बोवनी नहीं की गई है वहां इससे पहले इमिडाक्लोरोप्रिड 48 प्रतिशत एफएस की 1 मिली दवा डालें । जिन क्षेत्रों में बोवनी हो चुकी है वहां पर कीट प्रकोप पर इमिडाक्लोरोप्रिड 17.8 एसएल की 80-100 मिली मात्रा डाले।



