धार्मिक
परिग्रह करना ही पाप है : मुनि श्री निर्णय सागर
रिपोर्टर : प्रशांत जोशी
देवरी । श्री नेमिनाथ जिनालय में दोपहर 2 बजे से धर्म सभा का आयोजन किया गया । जिसमें बड़ी संख्या में जैन समाज उपस्थित हुई । उपस्थित जन समुदाय को संबोधित करते हुए मुनि श्री 108 निर्णय सागर जी महाराज ने कहा कि उपयोग से अधिक वस्तु का संग्रह करना ही परिग्रह पाप कहा जाता है धर्म का उत्तम लक्षण वह मन को स्थिर करने वाला है पाप को नष्ट करने वाला है और सुख का उत्पादक है। इसलिए इस भाव में इस धर्म को आचरण में लावे उसी का पालन करो और उसी का श्रवण करो क्योंकि वह भव का क्षय करने वाला है
उपस्थित जनों में सुरेश कुमार जैन, वीरेंद्र कुमार , ऋषभ कुमार , राकेश कुमार जैन विमल कुमार , दीपक जैन राहुल जैन एवं अन्य समाज बंधु उपस्थित रहे।


