Aaj ka Panchang आज का पंचांग शनिवार, 15 जुलाई 2023
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शनिवार 15 जुलाई 2023
15 जुलाई 2023 दिन शनिवार को शुद्ध श्रावण मास के कृष्ण पक्ष कि त्रयोदशी तिथि है। आज श्रावण सोमवार व्रत एवं शनिवार का प्रदोष व्रत भी है। आज जिस स्त्री अथवा पुरुष को पुत्र की कामना हो उसे आज पीपल वृक्ष के मूल में भगवान विष्णु का आवाहन करके विविध उपचारों से पूजन एवं अभीष्ट फल प्राप्ति हेतु 108 परिक्रमा करनी चाहिए। आज शनिवार एवं चतुर्दशी अर्थात शनि-रिक्ता संयोग से सिद्धयोग निर्मित हो रहा है। इसलिए आज किसी विशिष्ट मनोकामना की पूर्ति हेतु भगवान शिव की पूजा करें तो पूर्ण हो जाता है। आप सभी सनातनी बंधुओं को श्रावण सोमवार व्रत एवं शनिप्रदोष व्रत की बहुत-बहुत हार्दिक शुभकामनायें एवं अनन्त-अनन्त बधाइयाँ।।
शनि देव जी का तांत्रिक मंत्र – ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।।
☄️ दिन (वार) -शनिवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से आयु का नाश होता है । अत: शनिवार को बाल और दाढ़ी दोनों को ही नहीं कटवाना चाहिए।
शनिवार के दिन प्रात: पीपल के पेड़ में दूध मिश्रित मीठे जल का अर्ध्य देने और सांय पीपल के नीचे तेल का दीपक जलाने से कुंडली की समस्त ग्रह बाधाओं का निवारण होता है ।
शनिवार के दिन पीपल के नीचे हनुमान चालीसा पड़ने और गायत्री मन्त्र की àएक माला का जाप करने से किसी भी तरह का भय नहीं रहता है, समस्त बिग़डे कार्य भी बनने लगते है ।
शिवपुराण के अनुसार शनि देव पिप्लाद ऋषि का स्मरण करने वाले, उनके भक्तो को कभी भी पीड़ा नहीं देते है इसलिए जिन के ऊपर शनि की दशा चल रही हो उन्हें अवश्य ही ना केवल शनिवार को वरन नित्य पिप्लाद ऋषि का स्मरण करना चाहिए।
शनिवार के दिन पिप्पलाद श्लोक का या पिप्पलाद ऋषि जी के केवल इन तीन नामों (पिप्पलाद, गाधि, कौशिक) को जपने से शनि देव की कृपा मिलती है, शनि की पीड़ा निश्चय ही शान्त हो जाती है ।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – उत्तरायण
☀️ ऋतु – सौर वर्षा ऋतु
🌤️ मास – श्रावण मास
🌒 पक्ष – कृष्ण पक्ष
तिथि : श्रावण मास कृष्ण पक्ष त्रयोदशी तिथि 08:32 PM तक उपरांत चतुर्दशी |
✏️ तिथि स्वामी – त्रयोदशी तिथि के स्वामी कामदेव को माना गया है। तथा तिथि में धन के स्वामी कुबेर जी है।
नक्षत्र : नक्षत्र म्रृगशीर्षा 12:23 AM तक उपरांत आद्रा
नक्षत्र स्वामी : नक्षत्र स्वामी मंगल है। तथा राशि स्वामी शुक्र है।
🔔 योग : वृद्धि योग 08:21 AM तक, उसके बाद ध्रुव योग
⚡ प्रथम करण : गर – 07:52 ए एम तक
✨ द्वितीय करण : वणिज – 08:32 पी एम तक
🔥 गुलिक काल : – शनिवार को शुभ गुलिक प्रातः 6 से 7:30 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – शनिवार को पूर्व दिशा का दिकशूल होता है ।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से अदरक खाकर, घी खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -सुबह – 9:00 से 10:30 तक।राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:16:00 AM
🌅 सूर्यास्तः- सायं 06:44:00 PM
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:11 ए एम से 04:52 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:32 ए एम से 05:33 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:59 ए एम से 12:55 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:45 पी एम से 03:40 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 07:20 पी एम से 07:40 पी एम
🌃 सायाह्न सन्ध्या : 07:21 पी एम से 08:22 पी एम
💧 अमृत काल : 02:52 पी एम से 04:36 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:07 ए एम, जुलाई 16 से 12:48 ए एम, जुलाई 16
🚓 यात्रा शकुन-शर्करा मिश्रित दही खाकर घर से निकलें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनयै नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-शिव जी का फलों के रस से अभिषेक करें।
🌳 वनस्पति तंत्र उपाय-शमी के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – भद्रा/शनि प्रदोष/अन्नप्राशन/ शनि प्रदोष व्रत/ शिवरात्रि, भारतीय चिकित्सा वैज्ञानिक बानो जहाँगीर कोयाजी स्मृति दिवस, अजमेर मुग़ल साम्राज्य के वरिष्ठ सेनापति (मिर्ज़ा राजा) जयसिंह जयन्ती, भारत रत्न सम्मानित स्वतंत्रता सेनानी, के. कामराज जन्म दिवस, प्रसिद्ध गायक बाल गन्धर्व स्मृति दिवस, पत्रकार प्रभाष जोशी जन्म दिवस, गणितज्ञ मरियम मिर्ज़ाख़ानी पुण्य तिथि, विश्व युवा कौशल दिवस
✍🏼 तिथि विशेष:- त्रयोदशी तिथि को बैंगन त्याज्य होता है। अर्थात आज त्रयोदशी तिथि में भूलकर भी बैंगन की सब्जी या भर्ता नहीं खाना चाहिए। त्रयोदशी तिथि जयकारी अर्थात विजय दिलवाने वाली तिथि मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि सर्वसिद्धिकारी अर्थात अनेकों क्षेत्रों में सिद्धियों को देनेवाली तिथि मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ और कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी होती है।
🗺️ Vastu Tips 🏚️
वास्तु शास्त्र में आज आचार्य श्री गोपी राम से जानिए भवन में किरायदारों की व्यवस्था के बारे में। यदि आप अपने घर का कुछ हिस्सा किराए पर उठाना चाहते हैं, यानी किरायदारों को भी अपने साथ घर में रखना चाहते हैं तो वास्तु शास्त्र के अनुसार किरायदारों को घर के अवनत हिस्से में, यानी कम ऊंचाई वाले हिस्से में रखना चाहिए और स्वंय उन्नत स्थान, यानी घर के ऊंचाई वाले हिस्से में रहना चाहिए। इससे आपको किरायेदारों से संबंधित कोई परेशानी नहीं आएगी।
लेकिन ध्यान रहे अगर आप किरायदार नहीं भी रख रहे हैं, तो भी घर के निचले हिस्से को यूं ही न छोड़े, उसे प्रयोग में लाते रहें। इसके अलावा पूर्वमुखी भवन में एक बात का ख्याल और रखना चाहिए कि घर के पूर्वी हिस्से और ईशान कोण को साफ-सुथरा रखें। इस हिस्से में कूड़ा-कर्कट या पत्थर आदि न रखें। अन्यथा आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
भवन में पूर्व दिशा की चार दिवारी बनवाते समय ध्यान रखना चाहिए कि पूर्व दिशा की दिवार दक्षिण और पश्चिम दिशा में बनी दिवारों से कम ऊंचाई में रखनी चाहिए। वहीं अगर पूर्व दिशा में बरामदा बनाने की बात की जाए तो बरामदे की ऊंचाई भी घर के बाकी हिस्सों में बने फर्श से कम ही रखनी चाहिए इससे अच्छा स्वास्थ्य और यश की वृद्धि होती है। साथ ही घर में शान्ति और सौभाग्य का वास भी बना रहता है। अन्यथा भवन के स्वामी को परेशानी होती है।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
प्रेगनेंसी में केसर दूध पीने के फायदे- ब्लड प्रेशर को मैनेज करता है प्रेगनेंसी के दौराम महिलाओं की हार्ट बीट 20-30% तक तेज हो सकती है। इससे ब्लड प्रेशर में उतार-चढ़ाव हो सकता है। ऐसे में केसर का क्रोसेटिन और पोटेशियम ब्लड प्रेशर को कम करने में मदद करता है। तों, प्रेगनेंसी में महिलाओं को ये दूध पीना चाहिए।
मूड स्विंग्स को कम करने में मददगार है प्रेगनेंसी अपने साथ मूड में काफी बदलाव लेकर आती है। इन मूड स्विंग्स को कम करने में केसर बहुत उपयोगी हो सकता है। आपके मस्तिष्क में रक्त के प्रवाह को बढ़ाने के अलावा, अवसाद की भावनाओं को कम करता है। जब कोई व्यक्ति इसका सेवन करता है तो सेरोटोनिन हार्मोन प्रड्यूस होता है जो आपके मूड को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। इसके अलावा, यह तनाव हार्मोन कोर्टिसोल को कम करने में भी मदद करता है जिससे बेहतर नींद आती है।
मॉर्निंग सिकनेस को कम करता है मॉर्निंग सिकनेस के कारण गर्भवती महिलाएं अक्सर सुस्त हो जाती है। यह पाचन तंत्र को आराम देता है और सीमित मात्रा में सेवन करने पर सुबह की मतली से राहत दिलाता है। तो, इन तमाम कारणों से आपको प्रेगनेंसी में केसर वाले दूध का सेवन करना चाहिए।
🍋 आरोग्य संजीवनी 🍶
अनार के फायदे और नुकसान :
आयुर्वेद में अनार को बहतु ही चमत्कारिक फल बताया गया है, और यह भी बताया गया है कि, इसके इस्तेमाल से कई सारी बीमारियों को ठीक किया जा सकता है। केवल अनार फल ही नहीं, बल्कि पूरा वृक्ष ही औषधीय गुणों से भरपूर होता है। जब अनार में इतनी खूबियां हैं, तो आप अनार के फायदे के बारे में जरूर जानना चाहेंगे। आइए जानते हैं कि अनार के फायदे क्या-क्या हैं।
अनार क्या है? स्वाद में अंतर होने के कारण अनार की तीन किस्में पाई जाती हैं।
देशी अनार खट्टे-मीठे होते हैं।
कन्धार के अनार मीठे होते हैं।
काबुल अनार भी मीठे होते हैं। काबुली अनारों में एक गुठली रहित अत्यन्त मीठा अनार होता है, जिसे बेदाना अनार कहते हैं। यह सबसे अच्छा होता है। फल की तुलना में कली, और छिल्के में अधिक गुण पाए जाते हैं।
रस में अंतर के अनुसार भी अनार फल तीन प्रकार के होते हैः-
मीठे रस वाला अनार
खट्टे रस वाला अनार
मीठा-खट्टा रस वाला अनार
📗 गुरु भक्ति योग 🕯️
भगवान शिव अपने भक्त की पूजा से प्रसन्न होते हैं। कोई भी शिवभक्त जितना-जितना भगवान शिव के पंचाक्षरी मंत्र का जप कर लेता है, उतना ही उसके अंतकरण की शुद्धि होती जाती है एवं वह भगवान शिव के समीप होता जाता है। उसके जीवन से दुख-दरिद्रता, रोग, शत्रुजनित पीड़ा तथा सभी कष्टों का अंत हो जाता है।
ॐ नमः शिवाय की उत्पत्ति उस समय हुई, जब भगवान शिव अग्रि स्तंभ के रूप में प्रकट हुए तब उनके 5 मुख थे। जो पांचों तत्व पृथ्वी, जल, आकाश, अग्नि तथा वायु के रूप थे। सर्वप्रथम जिस शब्द की उत्पत्ति हुई वह शब्द था ॐ था, बाकी 5 शब्द नम: शिवाय की उत्पत्ति उनके पांचों मुखों से हुई, जिन्हें सृष्टि का सबसे पहला मंत्र माना जाता है यही महामंत्र है। ॐ नमः शिवाय मंत्र ही शिववाक्य है और यही शिवज्ञान भी है।
जिसके मन में ॐ नमः शिवाय मंत्र निरंतर चलता रहता है वह शिवस्वरूप हो जाता है। भगवान शिव प्रत्येक मनुष्य के अंत:करण में स्थित अव्यक्त आंतरिक अधिष्ठान तथा प्रकृति मनुष्य की सुव्यक्त आंतरिक अधिष्ठान है। नम: शिवाय: पंचतत्वमक मंत्र है इसे शिव पंचक्षरी मंत्र कहते हैं। इस पंचक्षरी मंत्र के जप से ही मनुष्य संपूर्ण सिद्धियों को प्राप्त कर सकता है।
ॐ नमः शिवाय मंत्र ही एक ऐसा विशेष मंत्र हैं, जिसकी जप संख्या निर्धारित नहीं है। लेकिन यह भी सत्य हैं कि आप इस मंत्र का जितना अधिक जाप करेंगे वह उतना सिद्ध होता जाएगा और जीवन में चमत्कार का अनुभव होने लगेगा। यदि ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप पूर्वाभिमुख होकर एक मुखी रूद्राक्ष की माला से किया जाए तो अतिशीघ्र मनोकामना पूर्ण होती है।
👉🏽 आइए जानते हैं शिव जी को प्रसन्न करने के लिए कितनी बार जपें यह मंत्र-
लगातार 108 बार ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करने से मनुष्य को जीवन में बेहतरीन अनुभव मिलने लगता है।
यदि 27 दिन तक लगातार ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र की 1 माला प्रतिदिन जाप किया जाए तो एक तीर्थ दर्शन तथा एक ज्योतिर्लिंग के दर्शन का फल प्राप्त होता है।
सामान्यत: यदि आप ‘ॐ नमः शिवाय’ 108 मंत्र की 108 माला का जाप यदि कर लेते हैं तो यह मंत्र सिद्ध हो जाता है और इसके चमत्कारिक प्रभाव मिलने लगते हैं।
ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप आप प्रतिदिन 11 बार से लेकर 108 बार तक कर सकते हैं।
किसी भी विशेष इच्छा के लिए ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप सोमवार के दिन करना चाहिए।
अत: जीवन में सर्वोत्तम परिणाम पाने के लिए प्रतिदिन कम से कम 108 बार इस मंत्र का जाप करना चाहिए। यदि आप पूर्णश्रद्धा और भक्तिपूर्वक ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करते हैं तो निश्चित ही शिव जी प्रसन्न होते हैं। इस मंत्र के जाप से सभी मनोरथों की सिद्धि होती है। समस्त व्याधियों को शांत कर देने वाला यह मंत्र भोग और मोक्ष दोनों देने वाला माना गया है।
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⚜️ इस त्रयोदशी तिथि के देवता मदन (कामदेव) हैं। शास्त्रानुसार भगवान कृष्ण और रुक्मिणी के पुत्र हैं भगवान कामदेव। कामदेव प्रेम और आकर्षण के देवता माने जाते हैं। जिन पुरुषों अथवा स्त्रियों में काम जागृत नहीं होता अथवा अपने जीवन साथी के प्रति आकर्षण कम हो गया है, उन्हें आज के दिन भगवान कामदेव का उनकी पत्नी रति के साथ पूजन करके उनके मन्त्र का जप करना चाहिये। कामदेव का मन्त्र – ॐ रतिप्रियायै नम:। अथवा – ॐ कामदेवाय विद्महे रतिप्रियायै धीमहि। तन्नो अनंग: प्रचोदयात्।
आज की त्रयोदशी तिथि में सपत्निक कामदेव की मिट्टी कि प्रतिमा बनाकर सायंकाल में पूजा करने के बाद उपरोक्त मन्त्र का जप आपका वर्षों का खोया हुआ प्रेम वापस दिला सकता है। आपके चेहरे की खोयी हुई कान्ति अथवा आपका आकर्षण आपको पुनः प्राप्त हो सकता है इस उपाय से। जो युवक-युवती अपने प्रेम विवाह को सफल बनाना चाहते हैं उन्हें इस उपाय को करना चाहिये। जिन दम्पत्तियों में सदैव झगडा होते रहता है उन्हें अवश्य आज इस उपाय को करना चाहिये।
त्रयोदशी तिथि ज्योतिषशास्त्र में अत्यंत श्रेष्ठ माना गया है। इस तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति महापुरूष होता है। इस तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति बुद्धिमान होता है और अनेक विषयों की अच्छी जानकारी रखने वाला होता है। यह व्यक्ति काफी विद्वान होता है तथा अन्यों के प्रति दया भाव रखने वाला एवं किसी की भी भलाई करने हेतु सदैव तत्पर रहने वाला होता है । इस तिथि के जातक समाज में काफी प्रसिद्धि हासिल करते ही हैं।


