ग्रीष्मकालीन सोयावीन, मूंग की जायद फसलो की अच्छी पैदावार

किसानों मे हर्ष, लेकिन मजदूरो का जबरदस्त अभाव
रिपोर्टर : कुंदनलाल चौरसिया
गौरझामर । इस समय खेतो मे जो हरियाली दृष्टिगोचर हो रही है उसे यदि हम लाभ की फसल की संज्ञा दे तो अतिश्योक्ति नही होगी, किसानो ने पिछले काफी समय से इस बात पर जोर दिया दिया की क्यो न हम परम्परागत खेती के साथ साथ रवि व खरीफ फसलों के अलावा ग्रीष्मकालीन फसलो को लेना शुरु करे गर्मी मे जायद फसल मे पहले किसानो ने मूंग बोना प्रारभ्भ किया इसकी अच्छी फसल से उत्साहित किसानो ने ग्रीष्मकालीन मूंग के साथ ग्रीष्मकालीन उन्नत सोयाबीन को भी उगाना शुरु कर दिया , बता दे की हर साल रवि फसल लेने के बाद किसानो के खेत खाली पडे रहते थे जिसका उन्हे कोई लाभ नही मिलता था जागरुक व साधन सम्पन्न किसानो ने अपनी सुविधानुसार जायद फसल लेने पर विचार किया तो उसमे वह आशातीत सफल सिध्द हुए यह तो हो गई शुरुआती बात ,जब पूरी सर्किल के किसानो ने जायद फसल मे मूंग सोयाबीन बोना शुरु किया तो क्षेत्र मे कृषि क्रांति आ गई इससे किसानो की ऋणात्मक कृषि मे सुधार होने से वह कर्जदार व कर्ज लेने से तो फिलहाल बचने लगे लेकिन किसानो के सिर मुडाते ही ओले पडना शुरु हो गये ,इन दिनो गांव देहातो मे काम धन्धे नही होने से नौकरी रोजगार के अभाव मे युवा मजदूर वर्ग काम धन्धे की तलाश मे पलायन कर गये इससे गांव के गांव मजदूरो से खाली हो गये किसानो को आज अपने खेतो मे आई हुई खडी मूंग सोयाबीन की फसलो की कटाई हेतु जिले के बाहर दूसरे जिलो के गांवो से मजदूर बुलाना पड रहे है किसानो की समस्या फसल कटाई के साथ साथ बेमौसम बरसात का भय उन्हे बेहद डराता है किसान आनन फानन मे जुगाड कर करके अपनी फसलो बचाने सवारने मे लगा देखा जा रहा है।



