धार्मिक

आदिवासी अंचल में श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ, कलश यात्रा में बैलगाड़ी पर विराजमान हुए कथावाचक

सिलवानी । जनपद पंचायत के ग्राम पंचायत रमपुरा खुर्द के गांव गैलपुर में श्रीमद्भागवत कथा का भव्य शुभारंभ कलश यात्रा के साथ किया गया, जिसमें ग्रामीण और श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस अनोखी यात्रा की खास बात यह रही कि कथावाचक पंडित भूपेंद्र शास्त्री को पारंपरिक बैलगाड़ी पर विराजमान कर पूरे ग्रामीण क्षेत्र में यात्रा निकाली गई, जिससे स्थानीय संस्कृति और आस्था का अद्भुत मेल देखने को मिला।
कलश यात्रा का आरंभ ग्राम गैलपुर के प्रमुख मंदिर से हुआ, जहाँ से भक्तजन, बैलगाड़ी में विराजमान कथा वाचक के साथ, गाजे-बाजे और भव्य साज- सज्जा के साथ यात्रा में सम्मिलित हुए। महिलाओं ने सिर पर कलश धारण कर श्रद्धा और भक्ति भाव से यात्रा की शोभा बढ़ाई। यह यात्रा पूरे गाँव से होते हुए कथा स्थल तक पहुँची जहाँ श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ हुआ।
इस आयोजन के पीछे का उद्देश्य ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर को पुनर्जीवित करना और लोगों को भक्ति और अध्यात्म से जोड़ना था। बैलगाड़ी पर कथावाचक को विराजमान कर यात्रा निकालने की परंपरा ने सभी का ध्यान आकर्षित किया, क्योंकि यह आधुनिक युग में पुरानी परंपराओं को संजोने का प्रयास है। कथा स्थल को अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया गया है, जिसमें भक्तों के बैठने और जलपान की व्यवस्था कि गयी है
कथावाचक पंडित भूपेंद्र शास्त्री ने कलश यात्रा के बाद भक्तों को संबोधित करते हुए कहा, “श्रीमद्भागवत कथा केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की कला सिखाती है। इस कथा का उद्देश्य सभी के जीवन में शांति और समृद्धि लाना है।” उन्होंने यात्रा में बैलगाड़ी के उपयोग को पारंपरिक आदिवासी संस्कृति का सम्मान बताते हुए इसे गाँव की सांस्कृतिक पहचान से जोड़ने का प्रयास बताया।
इस पूरे आयोजन में ग्रामीणों और आदिवासी समाज के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कलश यात्रा के दौरान पूरे क्षेत्र में भक्ति और उल्लास का माहौल रहा, और लोग रास्ते में पुष्प वर्षा कर कथा वाचक और कलश यात्रा का स्वागत करते नजर आए। श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन पूरे सप्ताह चलेगा, जिसमें भक्तजनों के लिए प्रतिदिन प्रवचन और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाएगा।

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