स्टेट हाईवे दमोह जबलपुर अभाना तिराहे पर रेंग रहे वाहन, रोजाना लग रहा घंटों जाम

जबलपुर मार्ग पर सुबह शाम बिगड़ रही यातायात व्यवस्था, राहगीर परेशान
ब्यूरो चीफ : भगवत सिंह लोधी
अभाना (दमोह)। दमोह से जबलपुर की ओर जाने वाले व्यस्त हाईवे (NH 31) पर स्थित ग्राम अभाना का तिराहा इन दिनों जाम का हॉटस्पॉट बन गया है। वही अभाना तिराहा आज अव्यवस्था और असुरक्षा का पर्याय बन चुका है। यहाँ की स्थिति इतनी भयावह है कि सड़क के दोनों ओर पैदल चलने वालों के लिए ‘साइड पट्टी’ या फुटपाथ का नामो-निशां तक नहीं है। भारी वाहनों के शोर और जाम के बीच पैदल राहगीर मौत के साये में चलने को मजबूर हैं। गाँव की ओर जाने वाले मार्ग और मुख्य हाईवे के मिलन स्थल पर वाहनों का दबाव इतना बढ़ गया है कि हर दिन यहाँ यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा रही है।
पीक ऑवर में हाईवे पर खड़ी हो रही वाहनों की कतारें
हाईवे पर वाहनों के अत्यधिक दबाव के कारण रोजाना सुबह 10 से 11 बजे और शाम को 4 से 5 बजे के बीच जाम की स्थिति निर्मित हो रही है। इस समय अवधि में दमोह और जबलपुर की ओर आने-जाने वाले सैकड़ों वाहन तिराहे पर फंस जाते हैं। स्थानीय निवासियों के अनुसार, तिराहे पर कोई व्यवस्थित ट्रैफिक सिग्नल या पुलिस बल न होने के कारण वाहन चालक आपस में उलझते रहते हैं, जिससे जाम और लंबा हो जाता है।
व्यवस्था जो झकझोर दे: भारी ट्रकों के नीचे चलने की मजबूरी
तिराहे की सबसे झकझोर देने वाली सच्चाई यह है कि यहाँ सड़क के दोनों ओर पैदल यात्रियों के लिए कोई व्यवस्थित कच्ची या पक्की पट्टी नहीं छोड़ी गई है। लोग मुख्य डामर रोड पर चलने को विवश हैं, जहाँ उनके बिल्कुल बगल से रफ़्तार भरते ट्रक और बसें गुजरती हैं। एक छोटी सी चूक यहाँ बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है। पैदल चलने वाले बुजुर्गों, महिलाओं और आम राहगीरों के पास जाम के दौरान बचने के लिए कोई सुरक्षित ‘एस्केप रूट’ तक नहीं है।
व्यापारिक और आपातकालीन सेवाओं पर असर
व्यस्त समय में लगने वाले इस जाम का सीधा असर कामकाजी लोगों और आपातकालीन सेवाओं पर पड़ रहा है। दमोह-जबलपुर मार्ग पर भारी व्यावसायिक वाहनों का आवागमन अधिक रहता है, ऐसे में एक बार जाम लगने पर उसे खुलने में काफी समय लग जाता है। यहाँ से गुजरने वाली एंबुलेंस और अन्य जरूरी सेवाएं भी अक्सर इस जाम में फंसी नजर आती हैं।
खड़े वाहन बने मुसीबत, संकीर्ण हुआ तिराहा
अभाना तिराहे की सबसे बड़ी समस्या यहाँ सड़क के किनारे खड़े होने वाले वाहन हैं। तिराहे के मुहाने पर ही मालवाहक और अन्य यात्री वाहनों के खड़े हो जाने के कारण मार्ग की वास्तविक चौड़ाई कम हो जाती है। इस संकीर्णता के कारण जब हाईवे से कोई भारी वाहन गुजरता है या गाँव की ओर मुड़ता है, तो यातायात पूरी तरह बाधित हो जाता है। तिराहे पर जगह कम बचने के कारण दो बड़े वाहन एक साथ नहीं निकल पाते, जिससे कुछ ही मिनटों में वाहनों की लंबी कतार लग जाती है।
प्रमुख मुद्दे:
तिराहे पर अव्यवस्था: गाँव की ओर मुड़ने वाले और हाईवे पर सीधे चलने वाले वाहनों के बीच तालमेल की कमी।
समय की बर्बादी: निर्धारित समय (सुबह 10-11 और शाम 4-5) पर निकलने वाले राहगीरों का आधा से एक घंटा जाम में बर्बाद हो रहा है।
सुरक्षा का अभाव: भारी वाहनों की आवाजाही के बीच सड़कों पर कोई स्पष्ट डिवाइडर या संकेतक नहीं हैं।
“रोजाना स्कूल के समय जाम लगने से बच्चों को देरी होती है। भारी वाहनों की तेज रफ्तार और अव्यवस्थित पार्किंग के कारण यहाँ पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है। शासन-प्रशासन को यहाँ तत्काल व्यवस्था सुधारनी चाहिए।” एक स्थानीय निवासी
प्रशासन से मांग
क्षेत्रीय नागरिकों का कहना है कि अभाना तिराहे पर यातायात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस प्रशासन को उचित प्रबंध करने चाहिए। व्यस्त समय में यहाँ कम से कम दो होमगार्ड या यातायात आरक्षकों की तैनाती अनिवार्य है ताकि वाहनों की आवाजाही सुचारू रूप से चलती रहे।



