किराए के कमरों में चल रहीं दुकानें, छत से टपकता है बारिश का पानी, भीग जाते हैं गेहूं, चावल, शकर
समस्या: राशन भीगने के साथ ही उपभोक्ताओं एवं दुकानदारों को होती है परेशानी
जगह की कमी: इन कमरों में खुद बैठें या सामान रखें
सिलवानी। नगर सहित ब्लॉक के गांवों में अधिकतर शासकीय उचित मूल्य की राशन दुकानों का संचालन किराए के कमरों में किया जा रहा है। बताया जाता है कि इनमें कुछ दुकानों की छत पर लोहे की टीन लगी है, तो कहीं कबूेल बिछे हुए है। जानकारी के अनुसार इन दिनों हो रही बारिश के दौरान किराए के कमरों में संचालित शासकीय राशन दुकानों की छत से पानी टपकने की समस्या बनी हुई है। ऐसे में बारिश होने पर दुकानों में रखा गेहूं, चावल और शकर सहित अन्य राशन भींग जाता है। यहीं राशन दुकानदार की ओर से हितग्राहियों को बांट दिया जाता है। इससे कई बार हितग्राहियों एवं दुकानदारों के बीच विवाद की स्थिति बन जाती है। वहीं छोटे-छोटे कमरों में दुकानें होने से राशन का स्टॉक करने में भी दुकानदारों को दिक्कतें आती है। इसके बावजूद भी खाद्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे है। जिसका खामियाजा राशन दुकानदारों एवं हितग्राहियों को भुगतना पड़ रहा है।
भवन निर्माण में नहीं है विभाग की रुचि
ब्लॉक में राशन दुकानों के लिए खाद्य विभाग के पास खुद के भवन की कमी सालों से बनी हुई है। इसी के चलते ब्लॉक में 80 फीसदी राशन दुकानें किराए के कमरों में चल रही है। किराए के भवनों मेें जगह की कमी के कारण बैठने की उचित व्यवस्था नहीं है। पर्याप्त जगह नहीं होने से बारिश के दौरान व्यवस्था और भी बिगड़ती है। इसके बाद भी खाद्य विभाग का राशन दुकानों के लिए नए भवन की व्यवस्था पर ध्यान नहीं दे रहा है। खाद्य विभाग की ओर से उचित मूल्य की दर्जनों दुकानें संचालित की जा रही है। इनमें से 80 फीसदी दुकानें किराए के कमरों में लग रही हैं। यह तक कि नगरीय क्षेत्र की सभी दुकानें किराए के कमरों में ही संचालित हैं। सालों से यह स्थिति बनी हुई है। इससे राशन दुकान संचालित करने वाले सैल्समैन भी परेशान होते हैं। वहीं राशन दुकान पर खाद्यान्न लेने पहुंचने के दौरान उपभोक्ताओं को भी दिक्कतें होती है। वहीं दुकान में जगह की कमी से उपभोक्ताओं को खाद्यान्न लेने के लिए धूप और बारिश में खड़े होकर इंतजार करना पड़ता है।
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की ओर से उपभोक्ताओं को सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत राशन दुकानों से खाद्यान्न प्रदाय करने को लेकर नई-नई तकनीकें लागू की जा रही हैं। परंतु विभाग अपनी नई तकनीकों को शुरू करने के साथ-साथ राशन दुकानों के भवनों का निर्माण करने पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। जिससे ब्लॉक में शहर एवं गांव में संचालित राशन दुकानों के लिए विभागीय भवन नहीं हैं। दुकानों के लिए सालों से भवन निर्माण की दरकार है। बावजूद इसके खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग राशन दुकानों के लिए भवनों के निर्माण में कोई रुचि नहीं ले रहा है।
राशन दुकानों के लिए विभागीय भवन नहीं होने से सेल्समैनों के समक्ष खाद्यान्न भंडारण की समस्या बनी रहती है। दुकानों पर हर महीने उपभोक्ताओं को वितरण करने के लिए मिलने वाले गेहूं, चावल, शक्कर, बाजारा, नमक एवं केरोसिन को इन्हीं भवनों में भंडारण करने की परेशानी होती है। दुकानों के संचालन के लिए विभाग की और से कोई किराया निर्धारित नहीं होने से सेल्समैन अपने स्तर पर भवन की तलाश करते हैं। ऐसे में कम किराए का भवन होने से यहां खाद्यान्न का भंडारण करना भी असुरक्षित रहता है।




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