पर्यावरणमध्य प्रदेश

कान्हा टाइगर रिज़र्व से बाघ को वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिज़र्व (नौरादेही) के लिए रवाना

ब्यूरो चीफ : भगवत सिंह लोधी
दमोह । वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के तहत कान्हा टाइगर रिज़र्व से एक नर बाघ को वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिज़र्व (नौरादेही) के लिए रवाना कर दिया गया है। पेंच टाइगर रिजर्व के रूखड़ परिक्षेत्र, सिवनी से रेस्क्यू किया गया था। उस समय बाघ शावक की उम्र लगभग 4 से 5 माह थी। इसके पश्चात बाघ को कान्हा टाइगर रिज़र्व के मुक्की स्थित घोरेला रिवाइल्डिंग बाड़ा में पालन-पोषण कर प्राकृतिक शिकार एवं स्वतंत्र विचरण के लिए प्रशिक्षित किया गया। वर्तमान में बाघ की उम्र लगभग 33 से 35 माह है तथा वह पूर्णतः स्वस्थ एवं जंगल में स्वतंत्र जीवन के लिए सक्षम पाया गया है।
विशेषज्ञ परामर्श के आधार पर निर्णय लिया गया कि बाघ को ऐसे संरक्षित क्षेत्र में छोड़ा जाए जहाँ बाघों का घनत्व कम हो और पर्याप्त आवास उपलब्ध हो। इस बाघ को वन्यप्राणी चिकित्सकों एवं वैज्ञानिकों द्वारा निश्चेत कर उसके शरीर के आवश्यक जैविक मापदंडों को विधिवत रूप से अभिलेखित किया गया। तत्पश्चात वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 11(1)(ए) के अंतर्गत सक्षम प्राधिकारी से अनुमति प्राप्त कर, विशेषज्ञों की सतत निगरानी में तथा निर्धारित मानक प्रोटोकॉल के अनुरूप बाघ को सेटेलाईट रेडियो कॉलर पहनाकर वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिज़र्व (नौरादेही) में सुरक्षित स्थानांतरण किया गया। इस टाइगर रिज़र्व में बाघ के दीर्घकालीन संरक्षण के लिए प्राकृतिक एवं अनुकूल आवास उपलब्ध है, जिससे वह स्वाभाविक रूप से स्वतंत्र विचरण कर सके।

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