Today Panchang आज का पंचांग सोमवार, 26 अगस्त 2024
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला मुख्यालय हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
सोमवार 26 अगस्त 2024
आप सभी सनातनी को श्री कृष्ण जन्मोत्सव के पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं।।
महा मृत्युंजय मंत्र – ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।।
☄️ दिन (वार) – सोमवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से पुत्र का अनिष्ट होता है शिवभक्ति को भी हानि पहुँचती है अत: सोमवार को ना तो बाल और ना ही दाढ़ी कटवाएं ।
सोमवार के दिन भगवान शंकर की आराधना, अभिषेक करने से चन्द्रमा मजबूत होता है, काल सर्प दोष दूर होता है।
सोमवार का व्रत रखने से मनचाहा जीवन साथी मिलता है, वैवाहिक जीवन में लम्बा और सुखमय होता है।
जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए हर सोमवार को शिवलिंग पर पंचामृत या मीठा कच्चा दूध एवं काले तिल चढ़ाएं, इससे भगवान महादेव की कृपा बनी रहती है परिवार से रोग दूर रहते है।
सोमवार के दिन शिव पुराण के अचूक मन्त्र “श्री शिवाये नमस्तुभ्यम’ का अधिक से अधिक जाप करने से समस्त कष्ट दूर होते है. निश्चित ही मनवाँछित लाभ मिलता है।
🌐 शुभ हिन्दू नववर्ष 2024 संवत्सर क्रोधी
📖 संवत्सर (उत्तर) कालयुक्त
🧾 विक्रम संवत 2081 विक्रम संवत
🔮 गुजराती संवत 2080 विक्रम संवत
☸️ शक संवत 1946 शक संवत
☪️ कलि संवत 5125 कलि संवत
🕉️ शिवराज शक 351_
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर शरद ऋतु
🌤️ मास – भाद्रपद मास
🌓 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – सोमवार भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि 02:20 AM तक उपरांत नवमी
✏️ तिथि स्वामी – अष्टमी तिथि के देवता हैं रुद्र। इस तिथि को भगवान सदाशिव या रुद्रदेव की पूजा करने से प्रचुर ज्ञान तथा अत्यधिक कांति की प्राप्ति होती है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र कृत्तिका 03:55 PM तक उपरांत रोहिणी
🪐 नक्षत्र स्वामी – कृतिका नक्षत्र के स्वामी सूर्य और राशि के स्वामी शुक्र हैं। कृतिका नक्षत्र के देवता अग्नि देव है।
⚜️ योग – व्याघात योग 10:16 PM तक, उसके बाद हर्षण योग
⚡ प्रथम करण : बालव – 02:55 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : कौलव – 02:19 ए एम, अगस्त 27 तक तैतिल
🔥 सोमवार का शुभ गुलिक कालः-शुभ गुलिक काल 01:42:00 P.M से 02:59:00 P.M बजे तक
⚜️ दिशाशूलः- आज के दिन पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करना चाहिए यदि यात्रा करना ज्यादा आवश्यक हो तो घर से दर्पण देखकर या दूध पीकर जायें।
🤖 राहुकालः- आज का राहु काल 08:31:00 A.M से 09:49:00 A.M बजे तक
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:39:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 06:21:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:27 ए एम से 05:12 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:50 ए एम से 05:56 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:57 ए एम से 12:48 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 02:31 पी एम से 03:23 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:49 पी एम से 07:11 पी एम
🎆 सायाह्न सन्ध्या : 06:49 पी एम से 07:56 पी एम
💧 अमृत काल : 01:36 पी एम से 03:09 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:01 ए एम, अगस्त 27 से 12:45 ए एम, अगस्त 27
⭐ सर्वार्थ सिद्धि योग : 03:55 पी एम से 05:57 ए एम, अगस्त 27
🚓 यात्रा शकुन-मीठा दूध पीकर यात्रा करें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ सौं सौमाय नम:।
💁🏻♀️ आज का उपाय-भगवान श्रीकृष्ण का केसरयुक्त गौदुग्ध से अभिषेक करने के उपरान्त माखन मिश्री का नैवेद्य निवेदित करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-पलाश के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
❄️ पर्व एवं त्यौहार – सर्वार्थसिद्धि योग/ श्री कृष्ण जयन्ती (उपवास)/ श्री कृष्ण जन्मोत्सव/ कालाष्टमी/ जयन्ती योग/ शिव पूजन/ भारत रत्न मदर टेरेसा जयन्ती, हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल जन्म दिवस, प्रसिद्ध राजनेत्री मेनका गांधी जन्म दिवस, भारतीय स्वतंत्रता सेनानी गणेश प्रभाकर प्रधान जयन्ती, राष्ट्रीय चेरी पॉप्सिकल दिवस, राष्ट्रीय टॉयलेट पेपर दिवस, राष्ट्रीय वेबमिस्ट्रेस दिवस, राष्ट्रीय कुत्ता दिवस, राष्ट्रीय महिला समानता दिवस, राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा
✍🏼 विशेष:- अष्टमी तिथि को नारियल त्याज्य बताया गया है। अष्टमी तिथि बलवती अर्थात स्ट्रांग तिथि मानी जाती है। इसका मतलब कोई भी विकट कार्य आज आप कर-करवा सकते हैं। इतना ही नहीं अपितु अष्टमी तिथि व्याधि नाशक तिथि भी मानी जाती है। इसका मतलब आज आप कोई भी भयंकर रोगों के इलाज का प्रयत्न भगवान के नाम के साथ करेंगे-करवाएंगे तो निश्चित लाभ होगा। यह अष्टमी तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह अष्टमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है।
🗺️ Vastu tips 🗽
इससे जुड़ी पौराणिक कथा
वैसे तो उपरोक्त मुहावरे के पीछे कई तर्क और लोक कथाएं जुड़ी हुई हैं फिर भी इसके बारे में कोई भी जानकारी एकत्र करना असंभव है। लेकिन बुरी नज़र वाले व्यक्ति का चेहरा काला क्यों हो जाता है, इसकी कहानी ज़रूर बताई जा सकती है। आपने देवी अहिल्या, चंद्रमा, इंद्र और महर्षि गौतम की कहानी सुनी होगी।
इंद्र देव देवी अहिल्या के रूप पर आकर्षित हो गए और उन्होंने महर्षि गौतम का रूप धारण कर लिया। इस षड्यन्त्र में उसने चंद्रमा को अपना भागीदार बनाया। आधी रात को चंद्रमा ने मुर्गे के रूप में बांग दी तो ऋषि गौतम गंगा स्नान करने चले गए। इस दौरान इंद्र ने अहिल्या के पति का रूप धारण किया और उनके साथ दुर्व्यवहार किया। महर्षि गौतम के खतरे से बचने के लिए इंद्र ने चंद्रदेव को दरवाजे के पीछे बैठा दिया। जब गौतम ने चंद्रमा को देखा, तुम पर राहु की दृष्टि हो जाए। इसके बाद चंद्र ग्रहण लगने लगा। इसी के साथ, चंद्रमा के मुंह पर काला दाग भी लग गया। इसी प्रकार इन्द्र को भी पृथ्वी पर पूजे न जाने का श्राप दिया गया था। इसलिए इंद्रदेव का कोई मंदिर नहीं है।
🔆 जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
घर के झगड़े मिटाने और सुख-शांति पाने के उपाय
शनिदेव स्वयं कहते हैं कि ‘जो शनिवार को पीपल को स्पर्श करते है, उसको जल चढ़ाता है, उसके सब कार्य सिद्ध होंगे तथा मुझसे उसको कोई पीड़ा नहीं होगी |’ ग्रहदोष और ग्रहबाधा जिनको भी लगी हो, वे अपने घर में 9 अंगुल चौड़ा और 9 अंगुल लम्बा कुमकुम का स्वस्तिक बना दें तो ग्रहबाधा की जो भी समस्याएँ है, दूर हो जायेगी |
स्नान के बाद पानी में देखते हुए ‘हरि ॐ शांति’ इस पावन मंत्र की एक माला करके वह पानी घर या जहाँ भी अशांति आदि हो, छिडक दे और थोडा बचाकर पी लें फिर देख लो तुम्हारा जीवन कितना परिवर्तित होता है |
🍃 आरोग्य संजीवनी ☘️
लेसिथिन के अधिक सेवन से कुछ दुष्प्रभाव हो सकते हैं। यहां इसके संभावित प्रभावों की सूची दी गई है:
पाचन संबंधी समस्याएं: दस्त पेट में ऐंठन मतली पेट फूलना
सिरदर्द: कुछ लोगों को अधिक लेसिथिन सेवन से सिरदर्द हो सकता है।
वजन बढ़ना: लेसिथिन में कैलोरी होती हैं, अत्यधिक सेवन से वजन बढ़ सकता है।
एलर्जिक प्रतिक्रियाएं: विशेषकर सोया-आधारित लेसिथिन से एलर्जी हो सकती है।
रक्तचाप में परिवर्तन: कुछ मामलों में यह रक्तचाप को प्रभावित कर सकता है।
लीवर पर दबाव: अत्यधिक मात्रा में लेसिथिन लीवर पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है।
हार्मोनल असंतुलन: कुछ अध्ययनों से पता चलता है कि यह कुछ हार्मोन स्तरों को प्रभावित कर सकता है।
औषधि अंतःक्रिया: यह कुछ दवाओं के प्रभाव को बदल सकता है।
गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान सावधानी: गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाओं को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
अनिद्रा: कुछ लोगों को नींद में समस्या हो सकती है।
📗 गुरु भक्ति योग_ 🕯️
शंख व शंखजल के लाभ
शंख के कुछ स्वास्थ्य – प्रयोग
शंख के स्वास्थ्य-हितकारी प्रयोग बताते हुए कहते हैं : “कोई बच्चा तोतला अथवा गूँगा है तो शंख में पानी रख दो | सुबह का रखा हुआ पानी शाम को, शाम का रखा हुआ पानी सुबह को 50 – 50 मि.ली. उस बच्चे को पिलाओ और उसके गले में छोटा-सा शंख बाँध दो | 1 – 2 चुटकी ( 50 से 100 मि.ग्रा. ) शंख भस्म शहद के साथ सुबह-शाम चटाओ तो वह बच्चा बोलने लग जायेगा | शंख भस्म अन्य कई रोगों में भी एक प्रभावकारी औषधि है |
गर्भिणी स्त्री शंख का पानी पिये तो उसके कुटुम्ब में २-४ पीढ़ियों तक तोतला – गूँगा बच्चा नहीं पैदा होगा | यह हमारे भारत की खोज है, पाश्चत्य विज्ञानियों की खोज नहीं है | गूँगे और तोतले व्यक्ति को शंख फायदा करता है और शंख -ध्वनि वातावरण को शुद्ध करती है इतना ही नहीं, दूसरे भी बहुत सारे फायदे बताये गये हैं | जहाँ लोगों का समूह इकट्ठा होता है वहाँ शंखनाद पवित्र, सात्विक माना जाता है |”
🐚 शंखजल का छिड़काव व पान क्यों ?
शंख में जल भरकर उसे पूजा-स्थान में रखे जाने और पूजा – पाठ, अनुष्ठान होने के बाद श्रद्धालुओं पर उस जल को छिड़कने का कारण यह है कि इसमें कीटाणुनाशक शक्ति होती है और शंख में जो गंधक, फॉस्फोरस और कैल्शियम की मात्रा होती है उसके अंश भी जल में आ जाते हैं | इसलिए शंख के जल को छिड़कने और पीने से स्वास्थ्य सुधरता है |
भगवान कहते हैं : “जो शंख में जल लेकर ‘ॐ नमो नारायणाय’ मंत्र का उच्चारण करते हुए मुझे नहलाता है वह सम्पूर्ण पापों से मुक्त हो जाता है | जो जल शंख में रखा जाता है वह गंगाजल के समान हो जाता है | तीनों लोकों में जितने तीर्थ है वे सब मेरी आज्ञा से शंख में निवास करते है इसलिए शंख श्रेष्ठ माना गया है | जो शंख में फूल, जल और अक्षत रखकर मुझे अर्घ्य देता है उसे अनंत पुण्य की प्राप्ति होती है | जो वैष्णव मेरे मस्तक पर शख का जल घुमाकर उसे अपने घर में छिडकता है उसके घर में कुछ भी अशुभ नहीं होता | मृदंग और शंख की ध्वनि तथा प्रणव (ॐकार) के उच्चारण के साथ किया हुआ मेरा पूजन मनुष्यों को सदैव मोक्ष प्रदान करनेवाला है |” (स्कन्द पुराण, वैष्णव खंड)
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⚜️ अष्टमी तिथि के देवता भगवान शिव भोलेनाथ जी माने जाते हैं। इसलिये इस अष्टमी तिथि को भगवान शिव का दर्शन एवं पूजन अवश्य करना चाहिए। आज अष्टमी तिथि में कच्चा दूध, शहद, काला तिल, बिल्वपत्र एवं पञ्चामृत शिवलिंग पर चढ़ाने से भगवान शिव की कृपा सदैव बनी रहती है। घर में कोई रोगी नहीं होता एवं सभी मनोकामनाओं की सिद्धि तत्काल होती है।
मंगलवार को छोड़कर बाकि अन्य किसी भी दिन की अष्टमी तिथि शुभ मानी गयी है। परन्तु मंगलवार की अष्टमी शुभ नहीं होती। इसलिये इस अष्टमी तिथि में भगवान शिव के पूजन से हर प्रकार की सिद्धियाँ प्राप्त होती है। इस अष्टमी तिथि को अधिकांशतः विष्णु और वैष्णवों का प्राकट्य हुआ है। इसलिये आज अष्टमी तिथि में भगवान शिव और भगवान नारायण दोनों का पूजन एक साथ करके आप अपनी सम्पूर्ण मनोकामनायें पूर्ण कर सकते हैं।

