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26 अगस्त 2024: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी कब है? जानें पूजन का शुभ मुहूर्त व व्रत पारण का समय

Astologar Gopi Ram : आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
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🪙 26 अगस्त 2024: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी कब है? जानें पूजन का शुभ मुहूर्त व व्रत पारण का समय
🔘 HIGHLIGHTS
◼️ इस साल भगवान श्रीकृष्ण का मनाया जाएगा 5251वां जन्मोत्सव
◼️ भाद्रपद में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाती है।
◼️ इस दिन मथुरा समेत देशभर में अधिक उत्साह होता है।
◼️ जन्माष्टमी पर लड्डू गोपाल की विशेष पूजा होती है।
🌍 हिन्दू धर्म में भगवान कृष्ण अपनी बाल लीलाओं के कारण सबसे ज्यादा पसंद किए जाते हैं. लोग उन्हें अपने घरों में बाल रूप में रखते हैं और परिवार के सदस्य की तरह उनकी देखभाल करते हैं. वहीं हर साल भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर कन्हैया का जन्मोत्सव मनाया जाता है. इस वर्ष कृष्ण जन्माष्टमी 26 अगस्त सोमवार को पड़ रही है. इस दिन लोग व्रत रखते हैं और विधि विधान से भगवान कृष्ण की पूजा करते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो लोग इस दिन श्री कृष्ण की सच्चे मन से आराधना करते हैं और उनके बाल रूप की पूजा करते हैं उन पर श्रीकृष्ण अपनी कृपा बरसाते हैं. आइए जानते हैं आचार्य श्री गोपी राम से मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में
❄️ श्री कृष्ण जन्माष्टमी शुभ मुहूर्त-
📆 अष्टमी तिथि प्रारम्भ – अगस्त 26, 2024 को 03:39 ए एम बजे
📝 अष्टमी तिथि समाप्त – अगस्त 27, 2024 को 02:19 ए एम बजे
💫 रोहिणी नक्षत्र प्रारम्भ – अगस्त 26, 2024 को 03:55 पी एम बजे
🪐 रोहिणी नक्षत्र समाप्त – अगस्त 27, 2024 को 03:38 पी एम बजे
🌃 मध्यरात्रि का क्षण – 12:28 ए एम, अगस्त 27
🌙 चन्द्रोदय समय – 11:41 पी एम
🗣️ निशिता पूजा का समय – 12:06 ए एम से 12:51 ए एम, अगस्त 27
⌛ अवधि – 00 घण्टे 45 मिनट्स
🎉 इस दिन मनाई जाएगी जन्माष्टमी

पंचांग के मुताबिक भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरुआत 26 अगस्त को सुबह 3:39 बजे से प्रारंभ होगी और 27 अगस्त को सुबह 2:19 बजे पर समाप्त होगी. ऐसे इस साल श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व 26 अगस्त दिन सोमवार को मनाया जाएगा. इस साल भगवान श्रीकृष्ण का 5251वां जन्मोत्सव मनाया जाएगा. कृष्ण जन्माष्टमी के पूजन का शुभ मुहूर्त 26 अगस्त को दोपहर 12 बजे से 27 अगस्त की देर सुबह 12 बजकर 44 मिनट तक रहेगा. जन्माष्टमी के दिन रोहिणी नक्षत्र दोपहर 03 बजकर 55 मिनट से प्रारंभ होगी और 27 अगस्त को दोपहर 03 बजकर 38 मिनट पर समाप्त होगी.
💮 30 साल बाद अद्भुत संयोग
इस साल श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर विशेष संयोग भी बना रहा है। जन्माष्टमी पर 30 साल बाद शनि ग्रह स्वराशि कुंभ में रहेंगे। इसके साथ ही, जन्माष्टमी के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है।
⚛️ हर्षण योग और जयंत योग का बन रहा है संयोग

आचार्य श्री गोपी राम के मुताबिक 26 अगस्त 2024 को हर्षण योग और जयंत योग भी बन रहा है। मान्यता है इन योगों में कृष्ण की आराधना करने से मन मांगी मुराद पूरी होती है…
🧘🏻 भगवान कृष्ण को ऐसे कराएं स्नान भगवान कृष्ण की धातु की प्रतिमा को किसी पात्र में रखें। साथ ही उस प्रतिमा को दूध, दही, शहद, शर्करा और अंत में घी से स्नान कराएं। इसी को पंचामृत स्नान कहते हैं… आप रात को 12 बजे भगवान के जन्म के बाद स्नान करा सकते हैं…
🍱 भगवान कृष्ण को इन चीजों का लगाएं भोग इस दिन आप भगवान श्री कृष्ण को धनिया पंजीरी, माखन मिश्री, मिठाई में तुलसी दल, मखाना पाग, चरणामृत. मेवा खीर आदि का भोग बनाकर लगा सकते हैं…
🤷🏻 जन्माष्टमी के दिन इन कार्यों को करने से बचें व्रत रखने वालों को गलती से भी दिन में सोना नहीं चाहिए। किसी को अपशब्द नहीं बोलने चाहिए। साथ ही इस दिन मांस- मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए…
🙇🏻 जन्माष्टमी के व्रत के दिन इन बातों का रखना चाहिए ध्यान शास्त्रों के अनुसार जन्माष्टमी का व्रत रखने वाले व्रतियों को पूरे दिन ब्रह्मचर्य रखना चाहिए। साथ ही जन्माष्टमी के व्रत में भूलकर भी अन्न ग्रहण नहीं करना चाहिए। जन्माष्टमी का व्रत रात को 12 बजे भगवान का जन्‍म करवाने के बाद खोलना चाहिए।
🗣️ जन्माष्टमी पर करें इन मंत्रों और स्तुतियों का जाप
ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय नम: – हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे – ऊँ कृष्णाय नम: – कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने। प्रणत क्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नम: – ऊँ नमो भगवते श्रीगोविन्दाय नम:
🤷🏻 कैसे करें जन्माष्टमी के दिन पूजा
▪️ श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन सबसे पहले सुबह उठकर ओम नमो भगवते वासुदेवा का मन में जप करना चाहिए
▪️ इसके बाद स्नान करके सूर्य देव को जल अर्पित करना चाहिए.
▪️ इसके बाद जिस स्थान पर श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप लड्डू गोपाल की मूर्ति स्थापित हो, वहां साफ-सफाई करके गंगाजल डालकर शुद्ध करना चाहिए.
▪️ इस स्थान को अशोक की पत्ती, फूल, माला और सुगंध इत्यादि से खूब सजाना चाहिए.
▪️ इस स्थान पर बच्चों के छोटे-छोटे खिलौने लगाएं. पालना लगाएं.
▪️ प्रसन्न मन के साथ श्री हरि का कीर्तन करें और व्रत रखें.
▪️ संभव हो सके तो निराहार अथवा फलाह व्रत रखें.
▪️ फिर शाम के समय भजन संध्या पूजन करें और रात्रि में भगवान श्री कृष्ण का पंचामृत से स्नान करें.
▪️ प्रभु को मीठे पकवान, माखन इत्यादि का भोग लगाएं. तुलसी दल अर्पित करें.
▪️ अंत में जीवन में सुख-शांति की कामना करें और लोगों में प्रसाद का वितरण करें.
📘 जन्माष्टमी व्रत कथा क्या है?
भगवान श्री कृष्ण का जन्म देवकी और वासुदेव से हुआ था, लेकिन उनका पालन-पोषण यशोदा और नंद बाबा ने वृंदावन में किया था। जन्माष्टमी का पर्व भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि या अंधेरे पखवाड़े के 8वें दिन पड़ता है।
ऐसा कहा जाता है कि भगवान कृष्ण का जन्म मथुरा कारागार में हुआ था। पौराणिक कथाओं की मानें तो कृष्ण की माता देवकी, कंस की बहन थीं। कंस एक समय अपनी बहन से बहुत प्रेम करते थे, लेकिन देवकी के विवाह के समय एक आकाशवाणी हुई जिसमें यह बताया गया कि कंस की मृत्यु का कारण देवकी का आठवां पुत्र होगा। इस आकाशवाणी के बाद कंस ने देवकी को मारने का फैसला किया ताकि वह किसी भी बच्चे को जन्म ही न दें, लेकिन उसके पति वासुदेव ने कंस से देवकी को माफ करने की विनती की और वादा किया कि वह अपनी हर एक संतान को जन्म के तुरंत बाद ही कंस को सौंप देंगे।
कंस ने देवकी और वासुदेव दोनों को कारागार में डाल दिया और उनकी एक-एक करके 7 संतानों को देवकी से लेकर मृत्यु प्रदान कर दी। जैसे ही श्री कृष्ण का जन्म हुआ उस समय वासुदेव तुरंत ही उन्हें एक टोकरी में बैठाकर यमुना नदी पार करके वृन्दावन पहुंचा आए। वहां श्री कृष्ण ने यशोदा और नंद के पुत्र के रूप में पहचान ली और उनका लालन-पालन भली-भांति होने लगा।
🪶 कृष्ण जन्माष्टमी का महत्व
जब जब पाप और अधर्म हद पार करता है, तब तब भगवान पृथ्वी पर अवतार लेते हैं और अपने भक्तों की रक्षा करते हैं। शास्त्रों के अनुसार, द्वापर युग में अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र में ही भगवान विष्णु ने अपना आठवां अवतार श्रीकृष्ण के रूप में लिया था। इस बार यह शुभ तिथि 26 अगस्त दिन सोमवार को है। भगवान कृष्ण मथुरा नगरी में राजकुमारी देवकी और उनके पति वासुदेव के आठवें पुत्र के रूप में अवतरित हुए थे। मान्यता है कि जो व्यक्ति कृष्ण जन्माष्टमी का उपवास करते हैं और विधि विधान के साथ पूजा अर्चना करते हैं, उनके सभी कष्ट व परेशानी दूर हो जाती है और जीवन में सुख समृद्धि का वास होता है। साथ ही वह व्यक्ति जन्म मरण के बंधन से मुक्त होकर मोक्ष की प्राप्ति करता है।

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